जोमैटो मामले में कहीं दिल्ली वाली गलती तो नहीं की जा रही.


कोई फैसला कभी भी बिना दो पक्षों की बात सुने नहीं करना चाहिए. लेकिन ज़माना सोशल मीडिया का हैं कुछ लोग को व्यूज चाहिए. किसी को लाइक्स तो किसी को फालोवर. हम सब अंधी भीड़ का हिस्सा हैं. खुद ही पुलिस खुद ही अदालत बन जाते हैं. जैसे सुशांत वाले मामले में पांच मिनट के अंदर ही बता दिया गया की सुशांत ने आत्महत्या की हैं.

बाबा का ढाबा मामला. बाबा ने घड़ियाली आंसू क्या गिराए पूरा देश पागल हो गया. डोनेशन की लाइन लग गयी. बाद में पता चला बाबा तो ठरकी हैं. पैसे का भूखा हैं. जो उसकी मदद करेगा उसका ही गला काट देगा.

अब बेंगलुरु में जो हुआ उसका भी यही हाल है. एक लड़की ने कह दिया की जोमैटो वाले लड़के ने उसे इतना मारा की उसकी नाक से खून निकलने लगा. मीडिया से लेकर सोशल मीडिया पर हर कोई उस लड़के को गालीया देने लगा. रेपिस्ट बताने लगा. समाज के लिए खतरा बताने लगा. लेकिन उसकी साइड जानने की कोशिश किसी ने भी नहीं की.

देखिये ये भी सच हैं की हमारे समाज में औरतों पर किसी ना किसी तरह जुल्म किये जाते हैं. हर रोज़ छेड़खानी से लेकर बलात्कार तक के मामले आते हैं. जिस पर सिर्फ और सिर्फ राजनीती होती हैं बाकी इन्साफ नहीं मिलता.

लेकिन कई मामले ऐसे हैं की लड़की है तो सच ही बोल रही होगी. लड़का है तो उसने कुछ तो गलत किया ही होगा. अब आप पहले लड़की की साइड सुन लो की उसने क्या कहा “मैं सुबह से काम कर रही थी, तो मैंने ज़ोमैटो से खाना ऑर्डर किया. दोपहर 3:30 बजे के आसपास खाना ऑर्डर किया, जो कि 4:30 बजे तक डिलीवर होने वाला था, और मुझे समय पर ऑर्डर नहीं मिला, इसलिए मैं ज़ोमैटो कस्टमर केयर से बात करके ऑर्डर लेने से मना कर दिया, पर जब डिलीवरी बॉय घर आया. तो मैंने दरवाजा हल्का सा खोला. क्योंकि घर में पालतू जानवर हैं, तो उनकी वजह से मैं पूरा दरवाजा खोलती नहीं. और मैंने उससे वेट करने को कहा, क्योंकि मैं कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव से बात कर रही थी. फिर मैंने डिलीवरी बॉय को ऑफर दिया कि वो या तो ऑर्डर वापस ले जाए या फिर फ्री में दे जाए. इतने पर वो चिल्लाने लगा. कहने लगा कि क्या मैं गुलाम हूं तुम्हारा?”

अब उस जोमाटो वाले लड़के की बात सुन लो की उसने क्या कहा,”“मैं जब उनके अपार्टमेंट के दरवाजे पर पहुंचा तो मैंने उन्हें उनका ऑर्डर दिया. मैं पेमेंट का इंतजार करने लगा क्योंकि उन्होंने कैश देने का ऑप्शन चुना था. ट्रैफिक और खराब सड़कों की वजह से ऑर्डर लेट हो गया था, इसके लिए मैंने उनसे माफी भी मांगी. लेकिन उन्होंने मुझसे बद्तमीजी से बात की. उन्होंने पूछा- तुम लेट क्यों हो गए? मैंने माफी मांगते हुए कहा कि सड़कों पर कंस्ट्रक्शन वर्क चल रहा है इसलिए रोडब्लॉक्स लगे हुए हैं. लेकिन वो बार-बार कहती रहीं कि ऑर्डर 45 से 50 मिनट के भीतर डिलीवर होना चाहिए. मुझे यह नौकरी करते हुए दो साल से अधिक समय हो गया है और यह पहली बार था जब मेरे साथ कुछ ऐसा हुआ हो.”

“इसके बाद जब मैं लिफ्ट की तरफ जाने लगा तो महिला ने हिंदी में अपशब्द बोलने शुरू कर दिए. उन्होंने मेरे ऊपर अचानक से चप्पलें भी फेंकी और मुझे मारना शुरू कर दिया. मैंने अपने हाथ उठाकर खुद को बचाने की कोशिश की. जब उन्होंने मेरे हाथ हटाने का प्रयास किया तो धोखे से उनकी खुद की अंगूठी उनकी ही नाक पर लग गई. जिससे खून निकलने लगा. कोई भी व्यक्ति जो उनकी चोट को देखेगा तो उसे पता लग जाएगा कि उन्हें मेरे मुक्के से घाव नहीं हुआ. ये घाव एक अंगूठी से हुआ है और मैं तो अंगूठी पहनता भी नहीं”

जोमैटो के फाउंडर दीपिंदर गोयल का बयान भी सामने आया है. ट्विटर पर पोस्ट किए बयान में उन्होंने कहा कि वे हितेशा और कामराज दोनों की मदद कर रहे हैं. साथ ही साथ पुलिस को सभी जरूरी जानकारी मुहैया करा रहे हैं ताकि पूरी निष्पक्षता से जांच हो और सच बाहर आ सके.

उन्होंने कहा कि हितेशा के इलाज में जो भी पैसा खर्च हो रहा है, उसे जोमैटो कवर कर रहा है. दूसरी तरफ कंपनी कामराज को भी हर संभव मदद दे रही है ताकि दोनों पक्ष सामने आ सकें.

गोयल ने बताया कि प्रोटोकॉल के तहत कामराज को अस्थाई तौर पर डिलीवरी करने से सस्पेंड कर दिया गया है. लेकिन उनकी पेमेंट और लीगल चार्ज को कवर किया जा रहा है. यानी कानूनी कार्रवाई में कामराज पर जो खर्च आ रहा है, उसका ख्याल भी कंपनी रख रही है.

गोयल ने यह भी बताया कि कामराज पिछले 26 महीनों से कंपनी के साथ काम कर रहे हैं और उन्होंने लगभग 5 हजार ऑर्डर डिलीवर किए हैं. कामराज को पांच में से 4.75 की ओवरऑल रेटिंग मिली हुई है, जो कि उनके प्लेटफॉर्म में सबसे अधिक रेटिंग्स में से एक है.

अब देखो जो भी सच है वो तो बाहर आएगा ही. लेकिन एक केस आपको और भी याद रखना चाहिए की दिल्ली में जब आम आदमी पार्टी से जुडी एक लड़की जसलीन कौर जिसने सर्वजीत सिंह पर छेड़खानी का आरोप लगाया था. मीडिया और बॉलीवुड ने तुरंत ही सर्वजीत सिंह को दोषी करार दे दिया जबकि सर्वजीत सिंह ने अपना पक्ष भी फेसबुक पर पोस्ट किया था. लेकिन वह एक लड़का था इसलिए उसकी बात कोई मायने नहीं रखती.

इस केस में सोनाक्षी सिन्हा ने कहा था की एक लड़की होने के नाते बेनिफिट ऑफ डाउट जसलीन कौर को दिया जाना चाहिए. और उस लड़के को बना शर्त माफ़ी मांगनी होगी.

उस लड़के की नौकरी चली गयी. घरवालों पर पड़ोसियों ने तमाम जली कटी बातें कही. मोहल्ले में निकलना मुश्किल हो गया. चार साल के बाद पता चला की इस केस में कोई सबूत है ही नहीं और सर्वजीत सिंह को कोर्ट ने माफ़ कर दिया की उसने कुछ नहीं किया था.

कई सारे मीडिया हाउस ने माफ़ी मांगी और सर्वजीत सिंह ने कहा कोई बात नहीं ये आपका काम था. दिल्ली मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने जसलीन कौर को एक बहादुर लड़की बताते हुए इनाम तक दिया. ठीक उसी तरह जैसे निर्भया केस में उस माइनर बलातकारी को दस हज़ार रूपये और सिलाई मशीन दी थीं. लेकिन चार साल में सर्वजीत सिंह की ज़िंदगी बर्बाद हो गयी उसका क्या ? आज जसलीन कौर कनाडा में अपनी ज़िंदगी अच्छी तरह गुजार रही हैं लेकिन एक लड़के की ज़िंदगी बर्बाद करने के बाद.

एक खबर आपने और देखी होगी विष्णु तिवारी वाली. हमारे देश की अदालत को बीस साल बाद पता चला की उसके ऊपर बलात्कार का जो आरोप लगा था वो झूठा था. साथ ही साथ उसके ऊपर एससी/एसटी एक्ट भी लगा दिया गया. जिसमे दस साल बलात्कार के लिए और आजीवन कारावास की सजा एससी/एसटी एक्ट के तहत लगा था.

अब आप वो सुन लीजिये जो विष्णु ने कहा, “मैं जेल में था. बाहर माता-पिता ने जमीन बेचकर मुझे निर्दोष साबित करने की आखिरी कोशिश की. हार्ट अटैक से माता-पिता का निधन हो गया, और वह दुनिया से चले गए. इसके बाद दो भाइयों का भी देहांत हो गया.”

पुराने दिनों को याद करते हुए विष्णु ने कहा कि “हमारे पास खुशहाल परिवार था, खेत थे, इंजन था, बैल थे, तीन हल चलते थे, दस भैंसें थीं, लेकिन आज कुछ नहीं है. जब घर पहुंचा तो देखा यहां कुछ भी नहीं है.”

जिस तरह से कानून की आँखों पर पटियाँ लगी होती हैं और हमारा कानून कुछ देख नहीं पता. अगर इन्साफ मिलता भी हैं तो पूरी ज़िंदगी बर्बाद हो जाती हैं. क्या विष्णु तिवारी वाले केस में उस लड़की उस महिला पर झूठा आरोप लगाने के लिए कोई सजा नहीं होनी चाहिए ? अगर सजा हो भी गयी तो वो फिर से महिला विक्टिम कार्ड खेलेंगे की मेरी शादी हो गयी हैं मेरे बच्चे हैं. जेल चली गयी तो उनकी देखभाल कौन करेगा. ठीक उसी तरह जैसे शबनम ने अपने पूरे परिवार को जान से मार दिया और अब बच्चे का मोह दिखाकर खुद फांसी से बचना चाहती हैं.

कहने का मतलब यही हैं की हमारे देश की मीडिया बिना सच जाने किसी की भी ज़िन्दगी दो मिनट में बर्बाद कर देती हैं. और इलज़ाम लगानेवाला अपनी ज़िंदगी और भी अच्छी तरह से जीता हैं. खैर जोमेटो वाले केस में जो भी गुनेहगार हो उसे सजा मिलनी चाहिए लेकिन पूरी जांच पड़ताल के बाद.

वो केस जिसने कई लड़कों की ज़िंदगी बर्बाद कर दी. क्या कामराज है अगला शिकार ?

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