बेटियां सच में सोना होती हैं, विधवा माँ की शादी करा दी | जमकर हो रहीं हैं तारीफ़

जिस सभ्य समाज में आज भी लोग अपने आप को संस्कारी मानते हैं और दुनिया भर की बड़ी बड़े बाते करते हैं लेकिन अंदर से सिर्फ खोखलापन ही नज़र आता हैं उसी समाज में तमाम रिश्तेदारों के विरोध के बावजूद राजस्थान की रहनेवाली संहिता अग्रवाल ने डिप्रेशन की शिकार हो चुकी अपनी विधवा माँ की दूसरी शादी करवा दी हैं | संहिता के इस कदम की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ़ हो रही हैं |

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साल २०१६ में जयपुर की रहनेवाल संहिता अग्रवाल के पिता मुकेश गुप्ता की अचानक से दिल का दौरा पड़ने की वजह से मौत हो गयी | उनकी माँ गीता अग्रवाल को इस घटना से ज़ोरदार झटका लगा और वो डिप्रेशन का शिकार बन गयी | जैसे -तैसे दिन निकल रहे थे लेकिन बड़ी बहन की शादी हो जाने के बाद सिर्फ माँ और संहिता ही घर में रह गए थे, कुछ समय बाद संहिता की नौकरी गुड़गांव में लग गयी और उनकी माँ गीता घर पर और अकेले पद गयी |

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उनकी हालत ऐसी हो गयी थीं की वो घंटो दरवाजे पर बैठकर संहिता का इंतज़ार करती रहती और कभी अचानक से रात में उठकर पूछती, “पापा कहाँ हैं ?” और संहिता उन्हें सोने के लिए कह देती | घर से दूर संहिता अग्रवाल ने बताया की घर में कोई उन्हें अकेला ना समझे इस वजह से वो रात को टीवी चालु कर देती थीं |

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अपनी माँ के दुख और अकेलेपन को संहिता बर्दाश्त नहीं कर पा रहीं थीं और एक दिन मैट्रिमोनियल साइट पर अपनी माँ को बिना बताये उनकी प्रोफाइल अपलोड कर दी जिसके बाद उन्हें काफी रिश्ते आने लगे | एक रिश्ता ऐसा भी आया जो संहिता को पसंद आया लेकिन जब अपनी माँ से इस बारे में बात की तो माँ ने साफ मना कर दिया |

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जो रिश्ता संहिता को पसंद आया था वो बांसवाड़ा में रेवेन्यू अधिकारी के पद पर विराजमान गोपालदास गुप्ता हैं और उनकी खुद की पत्नी कैंसर की वज़ह से मर चुकी थीं | इसी बीच गीता अग्रवाल का यूट्रस का मेजर ऑपरेशन हुआ और जब यह बात गोपाल गुप्ता को पता चली तब उन्होंने जाकर गीता अग्रवाल की देखरेख की | निस्वार्थ भाव से की गयी सेवा गीता अग्रवाल को पसंद आयी और उन्होंने शादी के लिए हां कर दी |

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हालाँकि उनके कुछ रिश्तेदारों की यह बात पसंद नहीं आयी और ना ही वो शादी में शरीक हुए | इसी लिए कहते हैं बेटा तभी तक आपका बेटा हैं जब तक उसकी शादी नहीं हो जाती हैं लेकिन बेटियां शादी के बाद और शादी के पहले ज़िंदगी भर माँ-बाप के लिए एक जैसी ही होती हैं | संहिता अग्रवाल के इस जज्बे को सलाम |

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