सरकारों को कोसकर क्या फायदा. हम कौन से सुधर गए हैं.


कोरोना. इस नाम से पूरी दुनिया लड़ रही हैं. एक ऐसी बीमारी जो खत्म होने का नाम नहीं ले रही लेकिन अपने आगोश में हर रोज़ न जाने कितने ही लोग को ख़त्म कर दे रही हैं. कोरोना का असली बाप चीन हैं लेकिन आजकल कोई उसका नाम ही नहीं लेता. ऐसा नहीं हैं की लोग उसका नाम भूल गए हैं या चायना से किसी को डर हैं.

बात ऐसी हैं की इस बीमारी ने हम सभी को आपस में उलझकर रख दिया हैं. अब ये बीमारी का हिस्सा नहीं बल्कि राजनीती का हिस्सा बन चुकी हैं. आने वाले सालों में चुनाव भी इसी मुद्दे पर लड़े जायेंगे. हर कोई एक दूसरे पर अपनी गलतिया डाल दे रहा हैं.

वैसे ये कोरोना बिलकुल खत्म सा हो गया था बहुत ज़्यदा केस नहीं आ रहे थे. लेकिन जहाँ तक मेरा मानना हैं की ये कोरोना सर बीमारी नहीं हैं बल्कि चायना का वो युद्ध हैं हर देश के खिलाफ ताकि पूरी दुनिया चीन के सामने कमज़ोर हो जाएं. जैसे एंड्राइड के अपडेटेड वर्शन आते रहते हैं ठीक वैसे हैं इसके डबल म्युटेंट, ट्रिपल म्युटेंट और ना जाने क्या क्या वर्शन आनेवाले हैं.

चायना ने ये सब अपने लैब में बनाकर रखा था जिस पर वो पिछले कई साल से काम कर रहा था. ये कोई चमगादड़ और किसी जानवर को खाने से नहीं फैला हैं. अगर ऐसा होता तो इसका सब ज़्यादा शिकार चीन ही बनता. क्यूंकि कोरोना चीन के सिर्फ एक ही शहर वुहान में फैला पूरे चीन में नहीं फैला.

इस वायरस को बनाने के साथ चीन ने इसकी दवा भी बनाकर रख ली थीं. लेकिन दुनिया को दिखाने के लिए उनके कुछ लोग मरे सो मरे इससे कुछ फर्क नहीं पड़ता क्यूंकि चीन की जनता गुलामों वाली ज़िंदगी जी रही हैं.

अब सोचनेवाली बात ये हैं की इस साल कोरोना की दूसरी लहर जब पूरे भारत में दहशत फैलाकर रखी हैं तो ये हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान और श्रीलंका में क्यों नहीं फ़ैली. क्या वहा के लोग भारत के लोगो से ज़्यादा सावधानी बारात रहे थे ऐसा नहीं हैं. चीन का सबसे बड़ा दुश्मन भारत ही हैं.

पाकिस्तान उसका करीबी हैं और चीन के क़र्ज़ तले दबा हैं. नेपाल पर वो हमेशा अपनी नज़र रखता हैं. बांग्लादेश और श्रीलंका को भी कई तरह के क़र्ज़ दे रखे हैं. और हो ना हो चीन ने किसी ना किसी तरह उस वायरस के सबसे ज़्यादा खतरनाक वाले हिस्से को भारत में फैला दिया.

हमारी सरकार भी इतनी अलर्ट नहीं थीं. किसी को नहीं पता था की ये कितना भयानक रूप ले लेगा. पिछले साल लॉक डाउन लगा तब विपक्ष ने सवाल किया की लॉक डाउन लगा दिया लोग बर्बाद हो जायेंगे. केंद्र ने ये जिम्मेदारी राज्यों के ऊपर छोड़ दी. कुछ राज्यों ने अच्छी तरह संभाली तो कुछ ने बेडा गर्क कर दिया.

सबसे बड़ी बात पांच राज्यों में चुनाव होना इस बीमारी को उफान पर लेकर आया. लाखों की संख्या में रैलियों में हर राजनीतिक पार्टी ने भीड़ जमा किया. वो अलग बात हैं की हर पार्टी एक दूसरे पर आरोप ही लगा रही हैं. कोई जिम्मेदारी नहीं लेना चाहता हैं की उनकी भी गलती हैं. चाहे केंद्र की बार कर लो या फिर राज्य सरकार की.

उसके कुछ दिन बाद हरिद्धार में कुम्भ मेला लगाया गया. लाखों की संख्या में लोग आएं और अब उन्हें में से लोग कोरोना का शिकार होने लगे. आज चुनाव और कुम्भ ने भी इस बीमारी को बढ़ा दिया.

अब विपक्ष को केंद्र पर हमला करने का मौका मिल गया और मुस्लिम समुदाय को हिन्दू धर्म पर मौका मिल गया की जमातियों का नाम तो बहुत लिया लेकिन अब बोलो कुम्भ ने कितना बड़ा योगदान किया.

लेकिन कुछ दिन बाद हिन्दू धर्म को एक के बाद एक कई मौके मिल गए मुस्लिम धर्म पर हमले करने के लिए. पहला रमजान को लेकर बाजारों में चल रही भीड़. उसके बाद राजस्थान में मुस्लिम धर्म गुरु गाजी फ़कीर के अंतिम संस्कार में दस हज़ार लोगो को भीड़ जमा हो गयी.

फिर दो दिन पहले एक वीडियो वायरल हुआ जिसमे मुस्लिम धर्मगुरु हजरत हाजी अहमदशाह बाबा बुखारी मुफ्ती के अंतिम संस्कार में लाखो की भीड़ जमा हो गयी. मतलब दोनों ही धर्म हिन्दू मुस्लिम को एक दूसरे पर मौका मिल गया इलज़ाम लगाने का.

होना ये चाहिए था की दोनों ही अपनी गलती मानते की इस समय में ये सब करने का कोई मतलब नहीं हैं. अब कई लोगो को ये डर हैं की ईद के मौके पर पूरे देश में मस्जिदों में ना जाने कितनी ही भीड़ जमा होने वाली हैं.

अगर ये कहे की इस बीमारी को लेकर सरकार लापरवाह हैं तो ऐसा भी नहीं हैं. सरकार ने पिछले एक साल में भारत के अंदर ही मास्क से लेकर सेनीटाइजर, पीपीए कीटस बनाने का काम किया हैं जिसमे से पहले ये चीज़े चीन से आया करती थीं. चीन का प्रोडक्ट्स पर बेन लगाना और खुद ही वो सामान बनाना चीन को अखर गया.

भारत ने वैक्सीन बनाने का भी काम किया हैं जिसमे से बीस करोड़ लोगो को इंजेक्शन लग चूका हैं लेकिन विपक्ष ने इसमें भी जनता को भ्रमित किया हैं. की वैक्सीन लगने के बाद लोगो की मौत हो रही हैं. विपक्ष सिर्फ राजनीती कर रहा हैं.

ऐसा नहीं हैं की हमारे देश में अस्पतालों की कोई कमी हैं. अस्पताल हो नार्मल डेज में यानी कोरोना आने के पहले इंतज़ार किया करते थे की कोई तो पेशेंट आये. अब जितने अस्पताल हैं उससे कहीं ज़्यादा हर रोज़ कोरोना का शिकार लोग आ रहे हैं.

हमारे देश के वो गद्दार लोग जिसमे हर धर्म के लोग शामिल हैं. कोई ऑक्सीजन की कालाबाज़ारी कर रहा हैं कोई नकली दवा बना रहा हैं. कोई एम्बुलेंस के लाखो रूपये चार्ज कर रहा हैं. कोई ऑक्सीजन को जमकर छुपा कर रखा रहा ताकि उसे और भी महंगे दाम पर बेचा जा सकें.

लेकिन इस माहौल में भी कुछ लोग हैं जो अपनी इंसानियत निभा रहे हैं वो भी अपने खर्च पर. लेकिन बात जिम्मेदारी की करे तो सरकार, विपक्ष को कोसने से पहले हम काम इंसान खुद भी भ्रस्टाचार से भरे पड़े हैं. सरकारों का क्या उनके लिए आप महज के डेटा हो. इस वक्त सिर्फ जान बचा लेना ही आपका सबसे बड़ा अचीवमेंट माना जायेगा. बाकी चीज़ सब बेकार हैं.

इसलिए सिर्फ सरकारों को दोष देने के पहले एक बार अपने भीतर देख लेना की क्या तुम कोरोना के सभी नियमों का पालन कर रहे हों. चाहे वो मास्क लगाना हो या सोशल डिस्टन्सिंग या फिर कोई सामान खरीद कर लाते हो तो उसे सेनीटाइज़ करते हों. लेकिन हम तो एक दूसरे पर आरोप लगाकर अपनी अपनी जिम्मेदारी से छुटकारा पा लेते हैं उसमे ही खुश रहते हैं. जय हिंद

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