WEB SERIES के नाम पर गंदगी परोसी तो खैर नहीं | OTT NEWS


जब भी किसी चीज़ की अति हो जाती है तब उस रोकना बेहद ज़रूरी हो जाता. अगर समय रहते उस चीज़ पर लगाम नहीं लगाई गयी तो वो विनाश का कारण बन जाती हैं.बॉलीवुड की फिल्मों से तो लोग परेशान ही थे जिस तरह से कई फिल्मों में बार बार हिन्दू धर्म को टारगेट करना, ऐतिहसाईक चीज़ों को तोड़ मरोड़ कर दिखाना. नग्नता और सेक्स को प्रमोट करना. ज़रूरत से ज़्यदा हिंसात्मक चीज़े दिखाना. इस तरह की चीज़े की जाती थीं. लेकिन जब इन चीज़ों पर बवाल बढ़ता था तब फिल्म के उस हिस्से को काट दिया जाता था.

जिस तरह से बॉलीवुड के लिए सेंसर बोर्ड हैं. प्रिंट न्यूज़ के लिए प्रेस काउंसिल हैं. न्यूज चैनलों के लिए न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन, विज्ञापन के लिए एडवरटाइजिंग स्टैंडर्ड काउंसिल ऑफ इंडिया है. लेकिन डिजिटल माध्यम के लिए कोई एजेंसी नहीं थी. यानी की OTT प्लेटफॉर्म्स जिसने अपनी सारी लिमिट्स क्रॉस ही कर दी हैं.

इन प्लेटफॉर्म्स ने अगर सबसे ज़्यदा किसी का नुक्सान किया हैं तो वो हैं हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति का. चलिए मान लेते हैं की आप डिजिटल युग के 2020 में अपनी लाइफ एन्जॉय कर रहे हैं. लेकिन इसका मतलब ये नहीं हैं की आप हर बार किसी एक ही धर्म को टारगेट करते रहों. उसके बारे में अनाप शनाप दिखाते रहो. वैसे भी हिंदू धर्म तो एक सॉफ्ट टारगेट हैं की कुछ भी बना दो, दिखा दो, बोल दो और बाद में माफ़ी मांग लो. मामला ख़त्म.

आज हर घर में दो साल की उम्र से बच्चे मोबाइल देखना शुरू कर देते हैं. चलो वो तो पेरेंट्स की निगरानी में मोबाइल देखते हैं. लेकिन जो बच्चे 10 साल के ऊपर वाले हैं आप उनके ऊपर कितना ध्यान दोगे की वो क्या कर रहे हैं और क्या नहीं कर रहे हैं.वेब सीरीज के नाम पर जो स्टोरीज दिखाई जाती हैं इन चीज़ों को दिखाना ज़रूरी है क्या? इंडियन वेब सीरीज मेकर्स ने OTT प्लेटफॉर्म्स को इंडिया का अपना पोर्नहब बना दिया हैं.

बस इसी पर नियंत्रण रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने भारत सरकार को ध्यान देने के लिए कहा था. तो अब भारतसरकार इन OTT प्लेटफॉर्म्स जैसे नेटफ्लिक्स, हॉटस्टार, ऐमज़ॉन प्राइम, ऑल्ट बालाजी, उल्लू, एमेक्स प्लेयर. सोनी लिव, ज़ी ५ इन सभी को अब सूचना और प्रसारण मंत्रालय के अन्तर्गत ले लिया हैं. यानी अब ये लोग वेब सीरीज में ना नग्नता दिखा सकेंगे, ना हिंसा और ना ही किसी धर्म को टारगेट कर सकते हैं. और अगर ऐसा करते हैं तो उनकी वेब सीरीज रिलीज़ नहीं की जाएगी.

बहुत सारे लोगो की ये दलील है की क्या सरकार मीडिया के बाद अब डिजिटल प्लेटफार्म पर बंदिस लगाकर हमारी आज़ादी छीन लेना चाहती हैं. तो बात ऐसी हैं की आज की जेनरेशन को असली आज़ादी क्या हैं इसके बारे में पता ही नहीं. आज़ादी का मतलब सत्यानाश करना नहीं होता हैं. अपने कल्चर को ख़त्म करना नहीं होता हैं. आज आप यंग हो आपके बच्चे नहीं हैं. लेकिन कल जब आपकी शादी होगी तब आप खुद अपने बच्चों को इस तरह की चीज़ों से दूर रखना चाहोगे. कोई भी पेरेंट्स ये नहीं चाहेगा की उसका बच्चा गलत संगत में पड़े और कुछ भी देखे.

आज हम इंडियंस अपने कल्चर को भूलते जा रहे हैं लेकिन हमारे अपने इंडियन कल्चर को आज कई देश फॉलो कर रहे हैं. आखिर कुछ तो बात हैं भारतीय संस्कृति में जो हर कोई फॉलो करना चाहता हैं. क्यूंकि जो चीज़ें आज हम इंडियंस को बहुत अच्छी लग रही हैं ये सब चीज़ें वेस्टर्न कल्चर को बर्बाद कर चुकी हैं.

अगर मेरी निजी राय को देना चाहु तो ये सरकार का बहुत ही अच्छा कदम हैं. क्यूंकि बॉलीवुड और वेब सीरीज बनाने वाले लोगो को आपसे कोई मतलब नहीं की आप अपनी ज़िदगी में बर्बाद हो रहे हो या आबाद. एक तरफ बॉलीवुड सेक्स और नग्नता को बढ़ावा देने के साथ इंडियन कल्चर को बर्बाद करता हैं तो दूसरी तरफ साउथ की फिल्मे इंडियन कल्चर को बढ़ावा देती हैं. और कुछ सालों में हम सभी का झुकाव साउथ की फिल्मों की तरफ बढ़ा हैं. ऐसा नहीं हैं की पूरा बॉलीवुड ही गंदा हैं. कुछ अच्छी लोग हैं जो अच्छी फिल्मे बनाते हैं.

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