वेब सीरीज का तांडव: सुप्रीम कोर्ट की दो टूक, अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर कुछ भी दिखाने की छूट नहीं


जहां एकता होती हैं वहा अच्छे अच्छों की बैंड बज जाती हैं. यही बात तांडव वेब सीरीज बनाने वालों के साथ हो रही हैं. इस तरह की चीज़ बनाकर तुम दूसरे धर्म की भावनाओ को आहत तो करते ही हो साथ ही अदालत का समय भी बर्बाद करते हो. अली अब्बास ज़फर कई बार माफ़ी मांग चुका हैं. उस विवादित सीन को डिलीट भी कर चुका हैं. लेकिन ऐसा कर देने से तुम्हारा पाप धुल तो नहीं जाएगा ना ?

आज सुप्रीम कोर्ट ने भी कह दिया हैं की भैया हम तुम्हरे मामले में कुछ नहीं कर सकते हैं. कोर्ट ने तो ये भी कह दिया हैं की तुम सभी की गिरफ़्तारी हो सकती हैं और तुम्हे कोई प्रोटेक्शन भी नहीं दिया जायेगा. क्यूंकि अभिव्यक्ति की आज़ादी की नाम पर तुम किसी धर्म की भावनाएं आहत नहीं कर सकते हो.

तांडव को लेकर विरोध अभी थमा नहीं हैं. उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक में इन सभी के खिलाफ दर्जनों FIR हो चुके हैं. इन लोगो को हर राज्य का दौरा ना करना पड़े इसके लिए सभी फिर को एक जगह पर लाने की बात भी चल रही हैं. जिसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने कह दिया हैं की तुम अपनी अपील हाई कोर्ट में करो.

जब सुनवाई चल रही थीं तब ज़ीशान अयूब ने कहा,”मैं एक अभिनेता हूं। मुझसे इस तरह की भूमिका निभाने के लिए संपर्क हुआ था। इस पर जज ने कहा, ‘आपकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता असीमित नहीं है। आप ऐसा किरदार नहीं निभा सकते हैं जो एक समुदाय की भावनाओं को आहत करता हो।’

मलतब ज़ीशान अयूब को कोई बोल दें की तुम्हे एक फिल्म में गोबर खाना हैं तो ये खा लेगा क्या ? शायद खा भी सकता हैं. पैसे का भूखा जो ठहरा. खुद के बाप को गाली भी दे सकता हैं. नंगा होकर पूरे शहर में घूम भी सकता हैं. आखिर है तो दो कौड़ी का कलाकार ही. जो सिर्फ दूसरों के धर्म की भावनाओं को नुकसान पहुंचना जानता हैं.

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