बड़े बड़े केस इस तरह से आपकी नज़र से गायब हो जाते हैं. क्या सुशांत वाला भी ?


क्या आपको 1984 की वो घटना याद हैं जब सिखों को जलाकर मार दिया गया था. क्या आपको मुंबई का वो आतंकी हमला याद हैं CST स्टेशन, ताज होटल, होटल ट्रिडेंट, क्या आपको 26 जुलाई की बाढ़ याद हैं ? क्या आपको मुंबई ट्रेन बम ब्लास्ट याद हैं ? क्या आपको वर्ल्ड ट्रेड सेण्टर की वो बिल्डिंग याद हैं जो एयरोप्लेन की घुसने के बाद गिर गयी. इन सभी घटनाओं में ना जाने कितने लोग मारे गए.

आपको और मुझे ये सारे बाते और घटनाएं तो पता हैं. लेकिन जो दर्द इन सभी घटनाओं में हैं उसे हम सिर्फ महसूस कर सकते हैं. लेकिन जिनके साथ ये हादसा होता हैं वो असली दर्द समझाता हैं. किसी अपने को खोने का दर्द हर कोई नहीं समझ सकता हैं. उस पर सिर्फ राजनीती होती हैं. चाहे इंडिया की बात कर लो या पूरी दुनिया की.

एक समय के बाद लोग हर चीज़ को भूल जाते हैं. लेकिन ना जाने सुशांत वाले मामले में वो कौन सी चीज़ हैं जिसके लिए लोग अभी भी लड़ रहे हैं. कुछ बाते और यादें ज़रूर थोड़ी देर के लिए रूक जाती हैं. लेकिन जो सुशांत को इन्साफ दिलाने की बात करते हैं वो कहीं ना कहीं किसी ना किसी तरह एक्टिव ज़रूर हैं. हालांकि कुछ लोग चाहते हैं की आप इस मुद्दे को भूल जाओ.

बॉलीवुड में ना जाने कितने ही कलाकारों की मौत हो गयी जिन्हे आत्महत्या का नाम दे दिया गया. यही काम सुशांत मामले में भी करने की पूरी प्लानिंग थीं लेकिन सब फेल हो गया. क्यूंकि पाप का घड़ा चाहे कितना ही बड़ा क्यों ना हो एक ना एक दिन फूटता ज़रूर हैं.

सुशांत केस से जुड़े वो लोग जो इस वक्त कहाँ हैं किसी को नहीं पता. कोई शादी कर रहा हैं. कोई वॉर्डल टूर पर निकला हैं. कोई फिल्म बना रहा हैं. अब कुछ दिन पहले सिद्धार्थ पिथाणी की इंगेजमेंट की तस्वीर सामने आयी. वही पिथाणी जो अर्नब गोस्वामी का जवाब नहीं दे सका. ऐसा लग रहा था मानो अभी इसकी सांसें अटक जाएगा.

सुशांत का वो नौकर दीपेश सावंत, रिया हर कोई गायब हैं. यहाँ तक की सीबीआई भी गायब हैं. केस गायब कैसे होते हैं. इतना बड़ा देश इतने सारे मुद्दे. है रोज़ होते मर्डर, छेड़खानी, बलात्कार, राजनीती, कूटनीति, हिंदू मुस्लिम, पाकिस्तान चीन, घूसखोरी, हवाल काण्ड, घोटाला और इन सभी से धीरे धीरे गायब हो जाता हैं वो बड़ा मुद्दा जो एक समय टीवी न्यूज़ के लिए टीआरपी का काम करता हैं. चुनाव के दौरान जमकर इस्तेमाल किया जाता हैं.

नेता अपने में मस्त. जनता खुद में पस्त. कानून किसी कोने में पड़ा आराम कर रहा होता हैं. इंसाफ दर दर की ठोकरे खा रहा होता हैं. ऐसे में सुशांत का मुद्दा मानो कहीं खो सा गया हैं. कुछ लोग हैं जो सुशांत की एक ही न्यूज़ को बार बार रिपीट कर रहे हैं की 14 जून को ये हुआ था वो हुआ था.

मेरे ख्याल से आपके पास सुशांत को लेकर कुछ नयी बात या न्यूज़ हैं तो करो. एक ही न्यूज़ दिखकर जो आपने पिछले साल जून में दिखाइ थीं उसे दिखाकर सुशांत के जो फँस हैं जो इंसाफ के लिए लड़ रहे हैं उनका दिल मत तोड़ो. वो आपके चैनल पर एक उम्मीद लेकर आते हैं की आप कुछ नया बताओगे. लेकिन निराश होकर निराशा वाले कमेंट करके चले जाते हैं.

सुशांत को इंसाफ कब मिलेगा ये तो नहीं पता लेकिन मिलेगा ज़रूर. क्यों स्वर्ग और नरक जैसी कोई चीज़ नहीं होती हैं. जिसने पाप किया हैं वो सजा भी इसी धरती पर भुगत कर जानेवाला हैं. मेरे ख्याल से देरी भी इसी लिए हो रही हैं की आम जनता की आँखें खुल रही हैं. ये जो आप बायकाट वाली चीज़ कर रहे हो इसने बॉलीवुड का जीना मुश्किल कर दिया हैं.

जो दो दो सौ करोड़ लगाकर फिल्मे बनाकर पांच सौ करोड़ कमाते थे आज वही लोग आपके सामने गिड़गिड़ा रहे हैं की हमारी फिल्मे देख लो. और ये सिर्फ कैमरे के सामने हैं पीठ पीछे इनका घमंड अभी भी बरक़रार हैं. अभी आपने इनकी फिल्मो पर हमला किया हैं जिस दिन आप उन प्रोडक्ट्स का बहिस्कार करना शुरू कर दोगे जिसका इस्तेमाल ये लोग करते हैं असली क्रांति उस दिन आएगी.

लेकिन एक बात तो कहनी होगी की सोशल मीडिया पर आम जनता एक्टिव नहीं होती तो सुशांत का मामला कब का भुला दिया जाता. क्यूंकि हमारे देश की मीडिया सिर्फ वही खबर तोड़ मरोड़कर दिखाती हैं जिसके लिए उन्हें जितने पैसे मिलते हैं. पैसे के लिए तो ये अपने माँ बाप को बेच दें.

सुशांत का केस कोई भुला नहीं हैं बस थोड़ा सा ब्रेक लगा हुआ हैं. आप कानून, सीबीआई, पुलिस और नेता किसी पर भरोसा मत करो लेकिन उस ऊपर वाले पर आँख बंद कर भरोसा करो वो सुशांत को इंसाफ दिलाने के लिए अपनी चाल चल चुका हैं.

What's Your Reaction?

hate hate
0
hate
confused confused
0
confused
fail fail
0
fail
fun fun
0
fun
geeky geeky
0
geeky
love love
0
love
lol lol
0
lol
omg omg
0
omg
win win
0
win

You may also like

More From: Entertainment

DON'T MISS