अपनी शादी से दुम दबाकर भागा पिठानी..सुशांत फँस पहुंच गए मंडप में


इंसान मिटटी के घड़े को भी चारो तरफ से ऊपर नीचे से ठोंक बजा के यह तक की उस घड़े में पानी भरकर देखता हैं की की कहीं घड़ा फूड थो नहीं. कहीं लेने के बाद ये धोखा तो नहीं देगा. इतनी सावधानी बरतता हैं. ठीक ऐसी ही चीज़ एक माँ बाप जब अपने बेटी की शादी करते हैं तो लड़के के खानदान का उस लड़के का पूरा इतिहास खंगाल लेते हैं. कहीं ये शराबी तो नहीं. जुवा तो नहीं खेलता. लड़कीबाज तो नहीं.

और वही एक उस लड़की के माँ बाप है जिसने अपनी लड़की सिद्धार्थ पिठानी के हाथ में दे दी. जो अपने दोस्त को धोखा दे सकता हैं वो अपनी बीवी को धोखा देने में कितना टाइम लगाएगा. वो दोस्त सुशांत सिंह राजपूत जिसके टुकड़े पर ये पिठानी पल रहा था. ना घर का भाड़ा देने का टेंशन ना कपडे खरीदने का और ना खाने का. फिर भी ये गूंगा स्वामी बनकर बैठा है.

इस इंसान को हर के बात पता है की सुशांत के साथ क्या क्या हुआ लेकिन ये मुँह नहीं खोलता. या तो ये बीक गया हैं या फिर इसे अपनी जान का डर हैं. या इसमें से दोनों ही बात हैं. लेकिन जान का खतरा तो गणेश हिवरकर और अंकित को भी हैं. उन्हें तो कोई सुरक्षा तक नहीं मिली हैं. अपनी जान पर खेलकर अपनी दोस्ती का फ़र्ज़ निभा रहे हैं.

ये सिद्धार्थ पिथाणी इसकी शादी की शहनाई बज रही थीं उसी वक्त सुशांत के कुछ फैंस वह पहुंच गए. उन लोगो ने कैसे पता लगाया कहा शादी हो रही हैं इसके लिए वो सम्मान के हकदार हैं. सुशांत फैंस जैसे ही वहा पहुंचे उन लोगो ने जसटिस फॉर सुशांत सिंह राजपूत के नारे लगाना शुरू कर दिया. सुशांत फैंस ने इस पिथाणी को ना मारा न पिता, ना हाथ लगाया लेकिन ये बन्दा इतना डर गया की वहा से भाग लिया. भागकर खुद को एक कमरे में बंद कर लिया.

अब बताओं जो बन्दा शादी करने के लिए इतना बेताब था. हनीमून मानाने की जिसे इतनी चूल मची थीं वो अपनी बीवी को छोड़कर वहा से भाग गया. तू सही है तो तुझे किस बात का डर है बे. सही इंसान सीना छुड़ाए करके बैठता हैं. इसके जैसा गलत इंसान ही डरता हैं. चोर को ही डर होता हैं की उसकी चोरी कहीं पकड़ी ना जाएं.

उस लड़की के माँ बाप ने इतना नहीं सोचा की कल को ये फंसा तो तुम्हारी लड़की का क्या होगा ? जो इंसान इतना डरपोक हैं. जो अर्नब से सवाल जवाब के दौरान माइक फेंककर भाग जाता हैं. जो मंडप छोड़कर बाग़ जाता हैं वो इंसान किसी का नहीं हो सकता. भाग ले बेटा जितना भागना हैं. लेकिन अपने कर्मो से भागकर कोई कहीं नहीं जा सकता हैं. तेरे कर्म ही तेरा काल बनेंगे. और जब वो सिचुएशन आएगी तब ये अपने मुँह से सारी बात बोलकर जायेगा.

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