सत्यजीत रे ‘पाथेर पांचाली’ एक ऐसी फिल्म जो हर किसी को देखनी चाहिए.


ये सिर्फ एक वीडियो नहीं हैं. ये एक इमोशन हैं. जिस शख्श और उनकी फिल्म की बात करने जा रहा हूँ उन पर आप जितनी बात कर लो उतना कम हैं. सत्यजीत रे एक ऐसे फिल्मकार जिन्होंने अपनी ज़िंदगी में 37 फिल्मे बनाई. जिसमे फीचर फिल्म, शार्ट फिल्म और डाक्यूमेंट्री शामिल हैं. सबसे बड़ी बात ये हैं की इनमे से कोई भी फिल्म फ्लॉप नहीं हैं. सब एक से बढ़कर एक नायाब हीरे की तरह हैं.

सत्यजीत रे की सभी फिल्मे बंगाली में हैं. हिंदी में उन्होंने सदगति और शतरंज के खिलाडी बनाई थीं.. कलकत्ता से बाहर रहकर उन्होंने कभी काम नहीं किया जबकि आप उनका बातचीत करने का अंदाज़ा देख लो, अंग्रेजी में बात करने की स्टाइल देख लो. उनकी पूरी पर्सनालिटी बेहद अद्भुत हैं.

सत्यजित रे अपनी फिल्मों की स्क्रिप्ट खुद लिखते थे. आज के दौरा में फिल्म बनाने के लिए एक बड़ी टीम की जरुरत पड़ती है लेकिन सत्यजीत रे अपनी फिल्मों का कैमरा वर्क, एडिंटिंग, कास्टिंग, स्कोरिंग और डिजाइनिंग भी वो खुद ही करते थे.

पद्मश्री’, ‘पद्म विभूषण’ से लेकर दादासाहेब फाल्के और ऑस्कर अवार्ड तक, हर तरह के पुरस्कार उन्हें मिले. इसके अलावा कुल 32 नेशनल अवॉर्ड उनके नाम हैं. 1992 में उन्हें भारत के सबसे प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाज़ा गया.

ऑस्कर जीतना हर फिल्मकार का सपना होता है लेकिन सत्यजीत रे इसके पीछे कभी नहीं भागे. उन्होंने अपनी फिल्मों की एंट्री कभी ऑस्कर के लिए नहीं भेजी. लेकिन उनके काम को देखते हुए 1992 में उन्हें ऑस्कर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया. उन्हें ये अवॉर्ड लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड की कैटेगरी में दिया गया था. इस साल सत्यजीत रे काफी बीमार थे और अस्पताल में एडमिट थे. उन्हें ये अवॉर्ड वहीं पर दिया गया था. उन्होंने इस अवॉर्ड को लेने के बाद हॉस्पिटल से ही लाइव स्पीच भी दी थी.

सत्यजीर रे ने की पाथेर पांचाली, ‘अपराजितो’ (1956) और ‘अपूर संसार’ (1959), ‘देवी’, ‘महापुरुष’, ‘चारुलता’, ‘तीन कन्या’, ‘अभियान’, ‘कापुरुष’ (कायर) और ‘जलसाघर’ , महानगर, नायक, गोपी गयने बाघा बायने और सोनार केला ये वो फिल्मे हैं जिसे आपने नहीं देखा तो कुछ भी नहीं देखा.

सत्यजीर रे फिल्म बनाने की ट्रेनिंग कहीं से नहीं ली थीं. सिर्फ फिल्मे देखकर सीखा की फिल्म कैसे बना सकते हैं वो भी अमेरिकन. पाथेर पांचाली बनाने से पहले उन्होंने लंदन में रहकर तीन महीने की भीतर 99 फिल्मे देखी. जबकि जिस ऐड कंपनी में वो काम करते थे उसने उन्हें वहा और भी ज्ञान लेने के लिए भेजा था. की जब वो इंडिया लौटकर आएंगे तो उनकी विज्ञापन कंपनी के लिए एक से बढ़कर एक ऐड बनाएंगे. फिल्म बाइसकिल थीव्स को देखकर ही उन्होंने फैसला किया की अब वो फिल्मे बनाएंगे.

उनकी पहली फिल्म पाथेर पांचाली जो बिभूतिभूषण बंद्योपाध्याय की ऑटोबायोग्राफिकल नावेल पर आधारित थीं. जिसे लोग अप्पू ट्राइलॉजी के नाम से भी जानते हैं. जिसमे पाथेर पांचाली पहली फिल्म, अपराजितो दूसरी फिल्म और अपुर संसार तीसरी फिल्म हैं. इन तीनो ही फिल्मो को मैंने तीन तीन बार देखा. जिसे देखने के बाद बंगाली फिल्म देखना और आसान हो गया.

इन फिल्मों को देखने के बाद ऐसा लग रहा था की ये इतनी जल्दी कैसे ख़त्म हो गयी. काश इसके और भी पार्ट्स बने होते. पाथेर पांचाली इस फिल्म में ख़ुशी, निराशा, गरीबी, बिछड़ना, उम्मीद, प्यार सब कुछ हैं. ये फिल्म देखने में बेहतर इसलिए भी हैं की ये ब्लैक एंड वाइट में हैं. आपको जानकार हैरानी होगी की पाथेर पांचाली और सत्यजीर रे के चलते भारत के फ़िल्मी दुनिया में बहुत बड़ा नाम हैं. सत्यजीर रेने फिल्म बनाने की अद्भुत कला को पूरी दुनिया से सिखने के लिए लोग आते थे.

पाथेर पांचाली जब आप देखोगे तो इसका एक एक सीन इतना बेजोड़ हैं की आप नज़र नहीं हटा सकते. इसके हर सीन को आप खुद से जोड़कर देखोगे. इस फिल्म का जो सबसे बेस्ट सीन हैं वो हैं कांस के घास के बीच फिल्माया गया ट्रेन वाला सीन. जहा पहुंचने से पहले इस फिल्म के किरदार दुर्गा और उसका भाई अप्पू किस तरह से वहा पहुंचते हैं. ट्रांसफार्मर की आवाज़ को सुनते हैं. अप्पू ध्यान से उस ट्रांसफार्मर को देखता हैं फिर गन्ने खाने वाला सीन. सब कुछ लाजवाब हैं.

सत्यजीर रे लॉन्ग शॉट लेने के लिए जाने जाते थे. मतलब सीन ख़त्म हो गया लेकिन फिर भी उसके बाद की हरकतों को कैद किया करते थे. पाथेर पांचाली के दो इमोशनल सीन जब इंदिर ठाकुरान की मौत होती हैं और जब दुर्गा बुखार के चलते दुनिया छोड़ जाती हैं. इस सीन में दुर्गा की माँ के जो इमोशन हैं वो बखूबी फिल्माया गया हैं.

इस फिल्म को वेस्ट बंगाल के बोरल गाँव में बनाया गया था जो अब शहर में तब्दील हो चूका हैं. लेकिन वो घर वो रास्ते आज भी मौजूद हैं. सच में सत्यजीत रे एक महान फिल्म मेकर थे. पाथेर पांचाली दुनिये की 100 बेहतरीन फिल्मो में से एक हैं. अब आप फैसला कीजिये की आपको ये फिल्म देखनी है या नहीं. जिन लोगो ने अप्पू ट्राइलॉजी देख ली हैं वो कमेंट करके अपना अनुभव बता सकते हैं.

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