टीवी पर कृष्णा बने और वैसी ही ज़िन्दगी जी रहे हैं एक्टर सर्वदमन डी. बनर्जी | प्रेरणा से भरपूर है कहानी


नियति किसके भाग्य में क्या लिख दें ये बात सिर्फ उस उपरवाले खुदा को ही पता होती हैं जो अपनी लिखी कलम से हर इंसान के लिए कुछ ना कुछ ऐसी बात लिख देती हैं जिसके वजह से सदियों तक लोग उसे उसी किरदार से जानने लगते हैं | ठीक ऐसी ही कुछ कहानी हैं टीवी के उत्तम कोटि के कलाकार सर्वदमन डी. बनर्जी की जिन्होंने भगवान् श्री कृष्णा के किरदार को जीवंत कर दिया |

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वो ९० के दशक की बात थीं जब रविवार सुबह ९ बजे सभी लोग अपने  सारे काम छोड़कर ‘कृष्णा’ देखने बैठ जाते थे | सर्वदमन डी. बनर्जी ने कृष्णा के किरदार को इस कदर किया की लोग उन्हें सच का भगवान् समझ बैठे थे और ऐसा भी समय आया जब टीवी के सामने लोग फूलमाला और अगरबत्ती लेकर उनकी पूजा तक किया करते थें |

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सर्वदमन डी. बनर्जी का जन्म एक बंगाली हिन्दू ब्राह्मण परिवार में १४ मार्च १९६५ को हुआ था | उनकी पढाई सेंट अलॉयसियस स्कूल कानपूर से हुयी उसके बाद उन्होंने ‘पुणे फिल्म इंस्टिट्यूट’ से उन्होंने ग्रेजुएशन की पढाई पूरी की और फिल्मों में चले आये |

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टीवी पर उनके कुछ खास सीरियल इस प्रकार से हैं ‘कृष्णा’, ‘अर्जुन’, ‘जय गंगा मैया’ और ‘ॐ नमः शिवाय’ जिनमे उन्होंने भगवान् के किरदार निभाए और भलीभाँती अपनी किरदारों को साथ इन्साफ किया और वही किरदार आज उनकी ज़िन्दगी में भी दिखाई पड़ते हैं |

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फिल्मों की शुरुवात उन्होंने १९८३ की ‘आदि शंकराचार्य’ से की थीं उसके बाद ‘वल्लभाचार्य गुरु’, ‘श्री दत्ता दर्शनम’, ‘सिरिवेनेला, ”स्वयम कृषि’,औ प्रेम कथा’, ‘माधावत्याना, ‘स्वामी विवेकानंद’, ‘पैरो में भगवान्’ और उनकी आखिरी फिल्म थीं महेंद्र सिंह धोनी के ज़िन्दगी पर आधारित फिल्म ‘म.अस. धोनी : दी अनटोल्ड स्टोरी’ में उनके कोच के रूप में दिखे थे |

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उनकी टीवी और फिल्मों की ज़िन्दगी की तरह उनकी निजी ज़िन्दगी भी काफी साफ़ सुथरी हैं लेकिन एक्टिंग को उन्होंने बहुत पहले ही छोड़ दिया था | उसके बाद वो शान्ति के लिए जीना शुरू कर चुके थे और ऋषिकेश की सुन्दर और हरी भरी वादियों में रहने लगे |

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सर्वदमन बनर्जी फिल्मी चकाचौंध से दूर ऋषिकेश में हैं और वहां लोगों को मेडिटेशन सिखाते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स  के अनुसार सर्वदमन ने कहा था, ‘मैंने ‘कृष्णा’ करते वक्त ही फैसला कर लिया था कि मैं 45-47 साल की उम्र तक ही काम करूंगा और उसके बाद जीवन ने कनेक्टेड कुछ काम करूंगा। बस फिर मुझे मेडिटेशन मिल गया और अब मैं पिछले 20 साल से वही कर रहा हूं” |

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मेडिटेशन के अलावा सर्वदमन बनर्जी पंख नाम की एक एनजीओ को भी सपोर्ट कर रहे हैं जो उत्तराखंड में स्लम में रहने वाले करीब 200 बच्चों को आजीविका कमाने में मदद कर रही है गरीबी में रहने वाले 200 बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने में सहायता कर रही है।

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हालाँकि उन्होंने कहा था की जब उन्हें कोई अच्छा रोल मिलेगा तो वो ज़रूर करेंगे और उसके बाद वो धोनी के कॉच के रूप में दिखाई पड़े | इसलिए तो कहते हैं ‘आसमान पर रहकर भी ज़िन्दगी की सच्चाइयों से सर्वदमन डी. बनर्जी अपना साथ कभी नहो छोड़ा’ | सही मायनो में वही एक अच्छी और सच्ची ज़िन्दगी जी रहे हैं सर्वदमन डी. बनर्जी |

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