रामयुग : आज श्रीराम होते तो कुणाल कोहली का वध कर देते.


कुछ चीज़े बड़े ही दिल से बनाई जाती हैं और कुछ चीज़े इस तरह से बनाई जाती हैं की समझ में नहीं आता की ये क्या बन गयी हैं. ना देखनेवाले को समझ आता हैं और ना बनानेवाला को.

लॉक डाउन के चलते जब दूरदर्शन पर रामायण दिखाया गया तो पूरी दुनिया से ज़बरदस्त टीआरपी मिली. हर किसी ने रामायण को पसंद किया. रामायण के हर किरदार को देख कर ऐसा लग रहा था मानो स्वयं भगवन श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण, हनुमान जी सभी के सभी फिर से धरती पर आ गए हो. और रावण ने धरती पर हाहाकार मचा दिया हैं.

इन किरदारों के संवाद में इतने प्रेम और सहजता थीं जिसे देखकर ही दिल खुश हो जाता हैं. मन को एक शांति मिलती हैं. ये तो खैर आज का दर हैं साल २०२० लोगो ने देखा और पसंद किया. लेकिन रामायण जब पहली बार दूरदर्शन पर दिखाया गया था तो जैसे ही इसकी शुरुवात होती थीं घर के बुजुर्ग अगरबत्ती, आरती और फूल लेकर बैठ जाते थे. इतना विश्वास और इतना प्रेम था इस सीरियल के लिए.

रामानंद सागर जिन्होंने रामायण बनाई उनकी जमकर तारीफ होने लगी. अब बॉलीवुड ने सोचा की चलो यार हम भी बनाते हैं रामायण. और रामानंद सागर से कहीं ज़्यादा अच्छा बनाकर दिखाएंगे. लेकिन वो कहते हैं ना ऐतिहासिक चीज़े एक बार ही बनती हैं उसके बाद कितना भी अच्छा बना लो वो कभी अच्छी नहीं बन सकती.

कुणाल कोहली ने लॉक डाउन में बना दिया रामयुग. जब इसका पोस्टर लांच हुआ तो लगा कुछ तो अच्छा बन रहा हैं. लेकिन जैसे ही ट्रेलर आया सारा मूड ख़राब हो गया. ये रामयुग कम और एकता कपूर का सास बहु वाला सीरियल कुछ ज़्यादा ही लगा रहा हैं.

जब रामायण की बात होती हैं तो सवाल ये आता हैं की राम कौन बनेगा, सीता के किरदार में कौन सा कलाकार होगा. हनुमान जी कौन होंगे. क्यूंकि अरुण गोविल, सुनील लाहिरी, दीपिका चिखलिया और दारा सिंह के सामने कोई भी चेहरा पसंद ही नहीं आता.

रामयुग को बाहुबली जैसा बनाने का काम किया गया हैं. लेकिन रियलिटी में ये बालवीर से भी ज़्यादा बकवास VFX कर दिखाया था. श्री राम को क्लीन शेव में ना दिखाकर दाढ़ी में दिखाया गया ताकि आज के ज़माने के लोग पसंद करे. हर कोई दाढ़ी रखकर घूम रहा हैं. गुरु वसिष्ठ के भाव कपडे को सफ़ेद रंग में बदल दिया हैं क्यों भाई भगवा रंग से इतनी तकलीफ क्यों हैं.

हनुमान जी का गेटउप ऐसा दिखा दिया की दिमाग ही सुन्न हो गया. एक चायनीज़ फिल्म आयी थीं मनकी किंग ठीक वैसा ही लुक देने का काम किया हैं. और तो और हनुमान जी की दाढ़ी भी बीच से गायब कर दी गयी हैं. हनुमान जी का पूरा लुक ही बिगाड़ दिया हैं. सिर्फ उन्हें बॉडी बिल्डर दिखा दिया गया.

रावण को आज कल के कूल डूड जैसा दिखाया गया. मनाओ अभी अभी नाई की दूकान से बालो में जेल लगाकर आया हो. VFX बेहद बकवास. किरदारों का चयन किसी काम का नहीं. गेट उप ऐसा दिया की रामायण से भरोसा ही उठ जाएं. डायलॉग में कोई सहजता और शांति नहीं. ऐसा लग रहा हैं की सड़क किनारे गली के खड़े होकर एक दूसरे से झगड़ा कर रहे हैं. मतलब जो संवाद वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस में भी नहीं हैं वो आपको रामयुग में देखने को मिल जायेगा.

जब्बरदस्ती के डायलॉग. ऐसा लग रहा हैं की लॉक डाउन में कुणाल कोहली ने खुद की ही अपनी रामायण लिख डाली हैं. अभी ये सीरीज देखिए नहीं हैं और देखने की ऐसी कोई इच्छा भी नहीं हैं. मुझे लग रहा हैं की रामसेतु बनाते वक्त जब सभी वानर गए रहे थे ‘श्रीरघुवर की वानर सेना सेतु बाँध रही. उसकी जगह कुणाल कोहली ने कहीं वानरसेना को लेकर कुछ और ही ना दिखा दिया लाइक.रावण की कोई भूतनी वानरों से बदला लेने के लिए आई हो और वानर उसे पकड़ कर आइटम डांस करवा रहे हो.

ऐसा लग रहा हैं की रामयुग में कुणाल कोहली ने सारे टिक टोक स्टार को ले लिया हैं. क्यूंकि टिक टोक तो बंद हैं तो ओवर एक्टिंग करनेवाले एक्टर्स को मौका दे दिया हो.

खैर ये तो मज़ाक की बात हैं लेकिन ये क्यों बनाया गया. क्या सोचकर बनाया गया. कुछ पता नहीं. बस बना दिया यार. लॉक डाउन में बोर हो रहे थे. सही बोले तो कुणाल कोहली ने रामायण का मज़ाक बनाकर रख दिया हैं. इसे ना देखे तो ही आपके लिए बेहतर होगा. Vfx तो ले आओगे वो भाव कहाँ से लाओगे श्री रामानंद सागर जी वाले

सही हुआ के रामायण रामानन्द सागर जी ने अपने टाइम पे बना डाली , नहीं तो आज हमे यही सब देखने सीखने को मिलता। रामानन्द सागर जी के रामायण में प्यार, त्याग,धर्म, कर्म, सलीनता, समर्पण और ना जाने क्या क्या सीखने को मिलता है। उस रामायण की तुलना कभी नही हो सकती

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