रोहित सरदाना की मौत पर खुश होने वाले कौन लोग हैं ?


ये कोरोना का दौर हैं. संभलकर नहीं रहे तो मौत होना तय हैं. किसी की मौत होना बेहद दुखद होता हैं. उसमे सिर्फ पीड़ा होती हैं. खासकर उस परिवार के लिए जिसने किसी अपने को खो दिया हो. लेकिन कुछ लोगो के लिए ये ख़ुशी का भी मौका होता हैं. किसी की मौत पर कुछ लोग बस इस वजह से खुश हो जाते हैं की वो उसका विरोधी हैं. उसकी बात उसकी राय उसे पसंद नहीं आती हैं. ये बात वो तब तक नहीं समझता हैं जब तक उसके किसी अपने के साथ इस तरह का हादसा नहीं हो जाता हैं.

रोहित सरदाना पत्रकारिता जगत में ऐसा नाम जिसे हर कोई जानता था. एक तरफ कई लोग उनकी मौत से दुखी हैं तो कई ऐसे भी लोग हैं जो पटाखे फोड़ रहे हैं. केक काट रहे हैं. खुशिया मन रहे हैं. इतनी ख़ुशी तो उन लोगो ने तब भी नहीं मनाई होगी जब उनकी शादी हुई होगी. उनके घर किसी बच्चे का जन्म हुआ होगा.

जब तक इंसान ज़िंदा हैं आप उससे और उसकी बातों से नफरत करते रहिये. लेकिन मरने के बाद नफरत करके क्या फायदा. कौन सी जीत मिल रही हैं आपको ? किसी वीडियो या पोस्ट के नीचे कमेंट करके क्या हांसिल कर लिया आपने ? अगर इस तरह की बात में आपको ख़ुशी मिलती हैं तो दुनिया में आप से बड़ा जानवर कोई नहीं हैं. शायद जानवर भी ऐसा नहीं करते होंगे.

कोरोना के इस दौर में हिन्दू मुस्लीम हर कोई मर रहा हैं और पूरी दुनिया से मर रहा हैं. अगर ज़िंदा है तो सिर्फ नफरत. कमेंट में क्या पढ़ने को मिल रहा हैं. बहुत अच्छा हुआ मोदी का दलाल पत्रकार मर गया. किसी ने लिखा ऐसी ही दलाली करते रहे तो अगला नंबर अर्नब गोस्वामी, अंजना ओम कश्यप, अमीश देवगन का भी हो सकता हैं.

जो लोग रोहित सरदाना को पसंद नहीं करते थे और जो लोग रविश कुमार को पसंद करते हैं. उनके लिए रविश कुमार ने क्या लिखा वो भी पढ़ लीजिये.

“जो लोग रोहित के निधन पर अनाप-शनाप कहीं भी लिख रहे हैं उन्हें याद रखना चाहिए कि फ़र्ज़ इंसान होने का है। और यह फ़र्ज़ किसी शर्त पर आधारित नहीं है। तो इंसान बनिए। अभी भाषा में मानवता और इंसानियत लाइये। इतनी सी बात अगर नहीं समझ सकते तो अफ़सोस।विनम्र बनिए। इससे बड़ा कुछ नहीं है। किसी को पता नहीं है कि कौन किससे बिछड़ जाए। सारे झगड़े और हिसाब-किताब फ़िज़ूल के हैं इस वक़्त।”*-

देखिये कमेंट में तो बहुत कुछ लिखा हैं. वो बोलकर यहाँ नफरत नहीं फैलना चाहता हूँ. क्यूंकि हमारा देश आलरेडी बहुत ज़्यादा तकलीफ में हैं. लेकिन इस तरह के कमेंट करके अपने अंदर के शैतानी इंसान का परिचय मत दो. कल को यही चीज़ आपके किसी अपने के साथ हो गयी तो नफरत भरी यही लाइन जब आपके लिए कोई लिखेगा तो शायद बर्दाश्त नहीं कर पाओगे. अच्छा नहीं बोल सकते. अच्छा नहीं कर सकते तो अपने भीतर की नफरत को अपने भीतर ही रखों.

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