कभी प्रयास करना बंद ना करें. इस वीडियो को देखे और बदले अपना जीवन


दोस्तों एक बार की बात हैं. एक प्रयोगशाला में एक अलग ही किस्म का प्रयोग किया गया. ये प्रयोग था छोटी छोटी मच्छलियों और शार्क मछली के बीच में. हुआ ऐसा की एक बड़े से शीशे के टैंक में ढेर साड़ी मछलियों को छोड़ दिया गया. उसके कुछ देर बाद ही एक शार्क मछली को भी उस शीशे के टैंक में छोड़ दिया गया. लेकिन उन छोटी मछलियों और शार्क मछली के बीच में एक कांच की दीवार को भी रखा गया था ताकि वो एक दुसरे से अलग रहे.

दरअसल होता क्या हैं … की शार्क मछली, छोटी मछलियों को अपना भोजन बना लेती हैं उनपर हमला करके उन्हें खा जाती हैं. यहाँ भी कुछ ऐसा ही हुआ..जब शार्क मछली ने अपने सामने इतने सारे शिकार को देखा तो बिना एक पल की भी देर किये वो उनपर टूट पडी. लेकिन ये क्या.. उसका हमला बेकार हो गया…क्यूंकि उसे पता ही नहीं था की उन मछलियों तक पहुंचने के लिए उसके बीच एक मज़बूत शीशे की दीवार खड़ी हैं जो उसे दूसरी तरफ जाने ही नहीं देगी…

किन्तु उस शार्क मछली ने हार नहीं मानी.. इस बार उसने दुगुनी ताकत लगाकर हमला किया… लेकिन इस बार भी वो उन मछलियों तक पहुंच नहीं सकी… इस बार शार्क मछली बुरी तरह तिलमिला उठी और अपनी पूरी ताकत लगाकर उसे शीशे की दीवार पर हमला किया.. लेकिन इस बार भी उसकी ये कोशिश बेकार हो गयी… उस शार्क मछली का प्रयास काफी देर तक चलता रहा.. और एक समय ऐसा भी आया की उसने अपनी इस कोशिश को छोड़ दिया और एक कोने में जाकर शांतिपूर्वक तैरने लगा.

अब कुछ देर के बाद प्रयोग करने वाले वैज्ञानिकों ने उस टैंक से मछली और शार्क मछली के बीचवाले शीशे की दीवार को निकाल दिया. उन्होंने सोचा अब यह शार्क उन मछलियों पर टूट पड़ेगी और इन्हे मारकर खा जाएगी… लेकिन हैरानी की बात यह रही की ऐसा बिलकुल भी नहीं हुआ… काफी देर बीत जाने के बाद भी शार्क मछली उन छोटी मछलियों पर हमला नहीं कर रही थीं. उसने अपने मन में यह बात बना ली थीं की उसके और उन मछलियों के बीच में एक दीवार हैं जो उसे आगे नहीं जाने देगी.. इसलिए उसने अपने प्रयास को बंद कर दिया…

दोस्तों इस कहानी से हमें यह सीख मिलती हैं की हम भी कहीं ना कहीं इस शार्क मछली की तरह हैं जो अपनी कई कोशिशों के बाद जब हार जाते हैं तब यही बात अपने मन में बैठा लेते हैं की यह कार्य हमसे कभी होगा ही नहीं. लेकिन हम इस बात को भूल जाते हैं की कोई भी परेशानी या रूकावट आपके जीवन में हमेशा के लिए नहीं रहती. उसे आज नहीं तो कल हटना ही होता हैं. लेकिन दुःख की बात यह होती हैं की हम इस बात को मानकर बैठ जाते हैं की हमारे सामने भी कांच की ऐसी ही कोई दीवार हैं जो हमें रोक रही हैं..जबकि वास्तव में ऐसा होता हैं की वो कांच की दीवार तो कब की हैट चुकी होती हैं.

इस कहानी का मतलब भी यही हैं की प्रयास करते रहिये…छोटी छोटी मुश्किलों से अपने प्रयास को बंद मत कीजिये. एक ना एक दिन कामयाबी आपके कदम ज़रूर चूमेगी.

 

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