मोदी ने मिटा दी धारा 370, अब कश्मीर भी देश की मुख्य धारा में…


पिछली पाँच जुलाई को कश्मीर घाटी में जब पहली बार अतिरिक्त रूप से सेना की तैनाती की कि किसी को सपने में उम्मीद नहीं थी कि सरकार धारा 370 को हटाने जा रही है। गृहमंत्री अमित शाह ने सावन के तीसरे सोमवार को राज्यसभा में जैसे ही धारा 370 हटाने की जानकारी दी। पूरा देश जश्न में डूब गया। राष्ट्रपति के आदेश से अनुच्छेद 370 खत्म कर दी गई।

सही मायने में देखा जाए तो यह धारा एक भारत श्रेष्ठ भारत के रास्ते का सबसे बड़ा रोड़ा थी। आजादी के बाद अस्थाई रूप से बनाई गई इस धारा को पिछली सरकारों ने लाइलाज बीमारी बना दिया था। 370 के डर दिखाकर कश्मीर के दो तीन राजनैतिक परिवार पूरी आवाम को ब्लैकमेल करने का काम करते थे। इसी धारा की आड़ में कश्मीरी पंडितों का पायलन हुआ और आतंकवाद को पनपने का मौका मिला। लेकिन देख के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक साहसिक फैसले ने कश्मीर को अपनी जागीर बताने वालों को जड़ से उखाड़कर फेंक दिया। आज पूरे देश में हर तरफ खुशी की लहर है। अब पूरे देश में केवल अपना तिरंगा ही लहराएगा जबकि बीते कल तक कश्मीर का अलग एक झण्डा था। लोग कह रहे हैं कि मोदी ने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू कि भूल को ठीक करने का काम किया। भले ही ये गलती नेहरू की हो या नहीं लेकिन आवाम इसका खामियाजा आज तक भुगत रहा था।

आज राज्यसभा में भारी हंगामे के बीच  गृहमंत्री शाह ने कहा कि अनुच्छेद 370 के कई खंड लागू नहीं होंगे।  सिर्फ खंड एक बचा रहेगा, इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर को मिला विशेष राज्य का दर्जा खत्म हो गया। वहीं उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर अलग केंद्र शासित प्रदेश बनेगा और लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया जाएगा।   जम्मू-कश्मीर विधानसभा के साथ केंद्र शासित प्रदेश बनेगा। शाह के इस ऐलान के होते ही दिल्ली से लेकर कन्याकुमारी तक लोगों ने मिठाई बांटकर फैसले का समर्थन किया। यहाँ ताक कि बसपा सुप्रीमो मायावती और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी सरकार के इस फैसले के पक्ष में खड़े नजर आए लेकिन हर बार की तरह इस ऐतिहासिक फैसले का भी कांग्रेस ने खुलकर विरोध किया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने आज के दिन को इतिहास में काला दिन करार दिया। उन्होने मोदी सरकार पर जनता से गद्दारी करने का भी आरोप लगाया। दूसरी ओर पीडीपी के राज्यसभा सांसद नजीर अहमद और एमएम फैयाज ने सरकार के फैसले का विरोध करते हुए अपने कुर्ते फाड़ लिए। हाँ गुलाम नबी आजाद ने बस अपना कुर्ता नहीं फाड़ा। बाकी इस निर्णय के विरोध में जो भी कटु शब्द कह सकते थे, उन्होने कहे। हालांकि हर बार की तरह इस बार भी कांग्रेस ने देश की भावना और बहुसंख्यक जनता का साथ देना उचित नहीं समझा। हालांकि अब जम्मू कश्मीर के लिए अब कोई अलग से संविधान और झण्डा नहीं होगा। जिसके लिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हार्दिक अभिनंदन है। मोदी ने एकबार फिर साबित कर दिया कि वो साहसिक फैसले लेने के लिए जाने जाते हैं। मोदी है तो मुमकिन है का नारा उनके भक्तों ने ऐसे ही नहीं गढ़ा है जिसको वक्त आने पर उनके विरोधी भी मानते हैं। आज के फैसले के बाद मोदी का विरोध करने वाले भी उनके साथ खड़े नजर आ रहा हैं। ये राष्ट्रवाद की जीत है। हम उम्मीद करते हैं कि सरकार के इस कदम के बाद कश्मीर भी देश कि मुख्य धारा में आ जाएगा और वहाँ भी विकास की रफ्तार तेज हो सकेगी। सभी भारतीय गर्व से कश्मीर के विकास में अपनी भागेदारी सुनिश्चित कर सकेंगे। 

क्या है आर्टिकल 370?

भारत में विलय के बाद जम्मू-कश्मीर के महाराजा हरी सिंह ने तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक संबंध को लेकर बातचीत की. इस मीटिंग के नतीजे में बाद में संविधान के अंदर आर्टिकल 370 को जोड़ा गया. आर्टिकल 370 जम्मू-कश्मीर को विशेष अधिकार देता है. इस आर्टिकल के मुताबिक, भारतीय संसद जम्मू-कश्मीर के मामले में सिर्फ तीन क्षेत्रों-रक्षा, विदेश मामले और संचार के लिए कानून बना सकती है. इसके अलावा किसी कानून को लागू करवाने के लिए केंद्र सरकार को राज्य सरकार की मंजूरी चाहिए.1956 में जम्मू-कश्मीर का अलग संविधान बना।

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