MAASSAB REVIEW : वो कहानी जो आईने की तरफ साफ़ हैं, सिस्टम से बस धूल हटाना ज़रूरी.


रेटिंग : 4.5 /5
मुकेश दुबे ( Aapki Baat Mukesh Ke Saath You Tube Channel )

फिल्में हमारे समाज का आईना होती हैं और आईना कभी झूट नहीं बोलता. बस उस आईने पर पड़ी हुई धूल को हटाना बेहद ज़रूरी होती हैं. हम ऐसी कई फिल्में देखते हैं जिसकी कहानी एकदम बकवास होती हैं. लेकिन फिल्म का बजट बहुत बड़ा होता हैं. बड़े सितारे जुड़े होते हैं जिसके चलते फिल्म अच्छा बिजनेस भी करती हैं और लोगो के बीच में अपनी एक अच्छी बुरी इमेज दोनों ही बना लेती हैं.

लेकिन कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जिसकी कहानी एकदम बेजोड़ होती हैं. ऐसी कहानी जो समाज को बदलने की हिम्मत रखती हैं. हमें सोचने पर मज़बूर करती हैं की ये बदलाव होना चाहिए. इस बदलाव की समाज को सख्त ज़रूरत हैं. ऐसी ही एक फिल्म हैं ‘मास्साब’ यानी मास्टर साहब. जैसा की गाँव देहात में स्टूडेंट्स अपने टीचर्स को बोला करते थे. इस फिल्म को बनाया हैं फिल्मकार आदित्य ओम ने जो इनकी सत्ताईसवीं फिल्म हैं. साउथ की कई फिल्में बना चुके हैं.

‘मास्साब’ में एक डॉयलग हैं. “आप लोगो के लिए शिक्षा धन कमाने का एक ज़रीया हैं लेकिन मेरे लिए शिक्षा ही धन हैं”. बस इस एक लाइन को इस फिल्म में कितना बड़ा दिखाया गया हैं वो आप फिल्म देखकर समझ सकते हैं. इस फिल्म के अभिनेता शिवा सूर्यवंशी जिनका फिल्म में नाम आशीष कुमार हैं वो अपनी आईएएस की नौकरी छोड़कर एक ऐसे स्कूल में पढ़ाने के लिए जाते हैं. जहा पर शिक्षा रामभरोसे हैं.

यानी उस स्कूल के चपरासी से लेकर, मास्टर और प्रिंसिपल तक अपनी जगह गाँव के अनपढ़ लोगो को बैठाकर अपना निजी काम करने के लिए स्कूल से बाहर रहते हैं लेकिन अपनी सैलरी टाइम पर लेते हैं. यानी की कोई अपने खेतों में फसल उगा रहा हैं. कोई ठेकेदारी कर रहा हैं तो कोई अपना बिजनेस चला रहा हैं.

इस तरह के स्कूल में जब आशीष कुमार जाते हैं तब उनका सर चकरा जाता हैं. लेकिन वो उस स्कूल की, उस गाँव की, उस शिक्षा व्यवस्था को बदलने की भरपूर कोशिश करते हैं. जिसमे उनका साथ देती हैं उस गाँव की प्रधान शीतल सिंह यानी की फ़िल्मी नाम उषा देवी जो उस गाँव की सबसे पढ़ी लिखी महिला हैं.

फिल्म में जिन जिन बच्चों ने काम किया हैं उन सभी ने अपने किरदार को बखूभी निभाया हैं. इस फिल्म में जो शख्श नेगेटिव किरदार में हैं महेंद्र यादव जिनका असल ज़िंदगी में नाम चंद्रभूषण सिंह हैं जो इस शिक्षा व्यवस्था को बदलने नहीं देना चाहते हैं क्यूंकि लोग पढ़ लिख गए तो उनका नुकसान होगा. वो किसी कीमत पर नहीं चाहता की उस गाँव में ये बदलाव देखने को मिले.

महेंद्र यादव शिक्षक आशीष कुमार के खिलाफ कई तरह के षड्यंत्र रचता हैं जिसमे अंत में आकर उसे हार ही मिलती हैं. फिल्म के बाकी किरदार कृतिका सिंह, मानवीर चौधरी इन सभी ने अपने किरदार से इस फिल्म में जान डाल दी हैं. ये फिल्म भले ही करोडो की कमाई ना कर सकें लेकिन पूरी दुनिया के फिल्म फेस्टिवल में इस फिल्म ने अब तक पचास से भी ज़्यादा अवार्ड जीत लिए हैं और सबसे बड़ी बात ये फिल्म आपको कुछ सिखने के लिए मज़बूर करती हैं. प्रेरणा देती हैं. आपको उकसाने का काम करती हैं की आप इस फिल्म को ज़रूर देखें.

निर्देशक आदित्य ओम की जितनी तारीफ की जाएं उतना कम हैं. अभी ये फिल्म कुछ ही सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई हैं लेकिन जल्दी ही OTT प्लेटफार्म पर आ सकती हैं. रिलीज़ से पहले इस फिल्म के कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर जबरदस्त वायरल हुए थे.

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