इंसाफ इसलिए नहीं मिल पाता… इसके जिम्मेदार हम सभी भी हैं.


इस देश में पांच ऐसी चीज़े है जो कोई भी सरकार कभी नहीं रोक सकती हैं. बलात्कार, जनसख्यां, महंगाई, मीडिया का दोगलापन और राजनीती का गिरता स्तर.

साल 2018 में भारत में कूल 33356 रेप के मामले सामने आएं. साल 2019 में 32000 रेप के मामले सामने आये. देखा जाये तो हर रोज़ तकरीबन 70 से लेकर 80 रेप के केस हर रोज़ आते हैं. अगर आज़ादी के बाद से देखे तो अब तक ४ करोड़ से भी अधिक बलात्कार के मामले हो चुके होंगे. हज़ारो की संख्या में केस तो ऐसे होते हैं जिनमें पीड़ित समाज के डर और परिवार की इज्जत के चलते सामने नहीं आ पाते.

हज़ारों की संख्या में रेप ऐसे होते हैं जो करनेवाले खुद उनके रिश्तेदार होते हैं. अब सोचिये जब हर साल 30 हज़ार से भी ज़्यादा रेप केस हो रहे हैं तो सिर्फ साल या दो साल में कुछ गिने हुए केस ही सामने क्यों आते हैं. क्यों सिर्फ और सिर्फ उन्ही की चर्चा होती हैं. जब उस पर्टिकुलर रेप को दिन रात मीडिया में दिखाया जाता हैं तब तक दो दिनों में 200 रेप के मामले सामने आ जाते हैं. अगर आप से पुछा जाये की रेप का ऐसा कौन सा मामला है जो आपको याद होगा.

तो आप कहेंगे दिल्ली का निर्भया केस, कठुआ का आसिफा केस, कुलदीप सेंगर का उन्नाव रेप केस बस इतने ही नाम आपको तुरंत याद आएंगे क्यूंकि सोशल मीडिया से लेकर इलक्ट्रोनिक मीडिया पर सिर्फ और सिर्फ इसी की बात चल रही होती हैं.

मीडिया भी इस तरह की खबर इसलिए दिखाती हैं क्यूंकि इस तरह की खबर को लगातार दिखाने के लिए उन्हें करोड़ो रूपये दिए जाते हैं. और ये पैसे देता कौन हैं. इसे बताने या समझाने की ज़रूरत नहीं हैं . वरना बाकी रेप केस के मामले तो सिर्फ हेडलाईन्स में ही सिमटकर दम तोड़ देते हैं. इन खबरों की भी अकाल मृत्यु हो जातीं हैं. दिल्ली का निर्भया केस इसलिए याद हैं क्यूंकि 2014 में चुनाव थे. कठुआ का आसिफा वाला केस इसलिए याद हैं क्यूंकि उस साल भारत के कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले थे. अब हाथरस का मामला इसलिए मीडिया में बना हुआ हैं क्यूंकि उत्तरप्रदेश में उपचुनाव होने वाले और 2022 में उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव आनेवाला हैं.

उत्तरप्रदेश में रेप का मामला सामने आता हैं तो कांग्रेस, बीजेपी पर इल्जाम लगा देती हैं. राजस्थान में रेप का मामला आता हैं तो बीजेपी, कांग्रेस पर इल्जाम लगा देती हैं. रेप एक लड़की, एक महिला, एक बेटी, एक मासूम का होता हैं. लेकिन राजनीती, धर्म और जाति के नाम पर उसे बाँट दिया जाता हैं. न्यूज़ की हेडलाइन्स भी ऐसी होती हैं. दलित महिला का बलात्कार, मुस्लिम महिला का बलात्कार, हिंदू महिला का बलात्कार.

सोशल मीडिया पर आम जनता भी बंट जातीं हैं. कैसे कैसे कमेंट्स पढ़ने को मिलते हैं. देखा मुस्लमान था इसलिए मीडिया ने नाम छुपा दिया, देखा हिंदू था इसलिए मीडिया ने नाम छुपा दिया. ब्रह्मण है इसलिए बलात्कारियों को बचाया जा रहा हैं. ठाकुर हैं इसलिए बलात्कारियों को बचाया जा रहा हैं. और इस बात से बिलकुल भी इंकार नहीं किया जा सकता हैं की सच में बलात्कारियों को पैसे और रुतबे के नाम पर बचाया ही जाता हैं. जो बड़े जातीं के लोग होते हैं अगर उन महिलाओं का रेप होता हैं वो समाज में इज्जत खराब ना हो इसलिए सामने नहीं आती और ना ही उनके परिवार वाले इस तरह के केस को दर्ज करना चाहते हैं. जो छोटे जाति की महिलाएं होती हैं अगर वो FIR करवाने जाएँ तो पुलिस उनकी शिकायत सुनती ही नहीं हैं. अगर सुनती भी है तो रेप करनेवाले उनके पूरे परिवार पर दबाव बनाते हैं और कई बार तो उन्हें जान से भी मार दिया जाता हैं.

मेरे इस वीडियो को जब आप देख रहे हैं तब तक दस और बलात्कार के मामले हो चुके होंगे. लेकिन क्या फर्क पड़ता हैं.प्रियंका और राहुल गाँधी हाथरस पीड़ित परिवार का हाल देखने के लिए जा रहे हैं. जबकि राजस्थान में जहां उनकी सरकार हैं वो लोग वहाँ क्यों नहीं जा रहे हैं उस पीड़ित का हाल देखने के लिए. यहाँ बात राज्य या मुख्यमंत्री की नहीं हो रही हैं. साल 2019 में उत्तरप्रदेश में रेप के 3000 मामले सामने आएं तो राजस्थान में 6,000 रेप के मामले सामने आएं. अब आप किसे दोष देंगे और किसे नहीं. हर पार्टी बस एक दूसरे पर इल्जाम लगाकर केस को किसी और दिशा में मोड़ देती हैं. और इन्साफ एक कोने में सिसक सिसकर कर मर रहा होता हैं.

हम आम जनता भी किसी भी गुनाह को सिर्फ कुछ दिन तक गंभीरता से लेती हैं उसके बाद शांत होकर बैठ जातीं हैं. अगर कोई उसे गंभीरता से लेता भी हैं तो उसे उठाकर जेल में डाल दिया जाता हैं. हम हर मुद्दे को किसी और मुद्दे से जोड़कर देखने लगते हैं. आप इस बात को क्यों भूल जाते हो की हर वो मुद्दा जिसमे किसी के साथ गलत हुआ हैं वो हर मुद्दा महत्वपूर्ण हैं. जब सुशांत सिंह राजपूत की मौत हुयी तब पूरे देश में आक्रोश था. CBI की डिमांड की गयी. जब सीबीआई इस केस में आई तो ड्रग्स का मामला सामने आया और फिर आया बॉलीवुड का काला सच. मीडिया ने भी दिन रात इस मुद्दे को दिखाना शुरू किया.

अब जब हाथरस का मामला सामने आया तब वही जनता अब ये बोल रही हैं की मीडिया के लिए सिर्फ कंगना, रिहा, दीपिका ही इम्पोर्टेन्ट हैं हाथरस की वो दलित लड़की नहीं. इस देश की सरकार कंगना को वाय सिक्योरिटी की सुरक्षा दे सकती हैं लेकिन दलित की बेटी को सुरक्षा नहीं दे सकती हैं. अगर कंगना को सुरक्षा नहीं देती तो कल को तुम वापस सरकार पर दोष डाल देते की कंगना ने सुरक्षा माँगी थीं लेकिन उसे दिया नहीं गया. कंगना का 50 करोड़ का घर तोड़कर गिरा दिया गया और ये बात आपके लिए छोटी हैं. क्यूंकि ये आपके राजनीती वाले अजेंडे में फिट नहीं बैठती हैं. दरअसल समय, राजनीती, जातीं और धर्म के हिसाब से हम इंसाफ की उम्मीद करते हैं. क्यूंकि सामने वाले राजनीतिक पार्टी की किरकिरी देखने का मज़ा ही कुछ और होता हैं. इन्साफ सुशांत सिंह राजपूत को भी मिलना चाहिए और इन्साफ उस हाथरस की पीड़िता को भी मिलनी चाहिए. ये दोनों अब इस दुनियाँ में नहीं हैं. अगर कुछ हैं तो बस राजनीती हैं.

इस देश की आबादी 135 करोड़ हैं. जिसमे 50 करोड़ अगर महिलाएं होंगी तो इन सभी को सिक्योरिटी तो नहीं दी जा सकती है ना ? रेप पीड़िता चाहे जो भी हो हिंदू, मुस्लिम, ब्रह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र वो सब इस देश की बेटी हैं. माँ है, बहु हैं, एक महिला हैं. बाकी चीज़ें तो बाद में आती हैं. क्यों हमारी सरकारें कोई ऐसा कानून लेकर नहीं आती हैं की रेप करनेवालों को बीच सड़क पर गोली मार दो, उनके हाथ काट दो. उनके घर को बुलडोजर से गिरा दो. उनकी पूरी प्रॉपर्टी जब्त करके पीड़ित परिवार को दे दो. उन्हें ऐसी जगह पर लेकर जाओ और भूखे कुत्तों को छोड़ दो ताकि जिस तरह से वो किसी महिला के बदन को नोचते हैं ठीक वैसे ही वो भूखे कुत्ते उस बलात्कारी के बदन को नोंच खाएं.

ये सब कुछ हो सकता हैं. और उस दिन ही होगा जब हर मामले से राजनीती ख़त्म हो जाएगी. जाति और धर्म की बात खत्म हो जाएगी. लेकिन ऐसा कभी नहीं होगा. क्यूंकि किसी भी सरकार में वो हिम्मत ही नहीं हैं की ऐसा कानून ला सकें. जो इस तरह के दरिंदो को कड़ी से कड़ी सजा दे सकें. पुलिस जब अपना काम ईमानदारी से करती हैं हैदराबाद में रेप करनेवाले उन दरिंदों का एनकाउंटर करती हैं तब कुछ फ़र्ज़ी , मौकापरस्त मानवाधिकार वाले उन पुलिसवालों पर जांच बैठा देते हैं. एक निर्भया को इंसाफ मिलने में सात साल लग जाते हैं. देश में ना जाने ऐसी कितनी निर्भया इन्हे कब इंसाफ मिलेगा इसकी कोई गारंटी नहीं हैं. इसलिए अपनी बेटियों को ताकतवर बनाने की ज़रूरत हैं. वरना लड़के है गलतीया तो हो ही जातीं हैं. जब इस देश के नेता ऐसा बोलेंगे तो ऐसे केस तो होते ही रहेंगे.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल हाथरस के बलात्कारियों को सज़ा दिलाने की बात करते हैं लेकिन निर्भया केस के एक बलात्कारी को दस हज़ार रूपये और सिलाई मशीन उपहार में दे देते हैं. तुम्हारे सिलाई मशीन से क्या वो बलात्कारी दरजी बन जाएगा. नहीं उसे जब भविष्य में मौका मिलेगा वो फिर से ऐसे काम करेगा. क्यूंकि इंसान को बदला जा सकता हैं हैवान को नहीं.

आसिफा का रेप होता हैं तो बात रेप की नहीं होती. बात हिंदू धर्म और मंदिर को बदनाम करने के लिए पूरा का पूरा केम्पेन ही चला दिया जाता हैं. क्या बाकी धार्मिक स्थलों पर रेप जैसी घटनाएं नहीं होती हैं ?

आज एंटरटेनमेंट के नाम पर हमें क्या परोसा जा रहा हैं. सिर्फ और सिर्फ गंदगी. हम इस तरह के वेब सीरीज देखकर खुश हो जाते हैं. जहां पर भाभी और देवर तो कभी ससुर और बहु को गलत तरीके से दिखाया जाता हैं. आप उल्लू ऐप को देख लो या एकता कपूर का ऑल्ट बालाजी या MX प्लेयर इन सभी में औरतों को सिर्फ गलत तरीके से इस्तेमाल करने का तरीका सिखाया जाता हैं. आज हर बच्चे के हाथ में मोबाइल में हैं. ऑनलाइन एजुकेशन के नाम पर बच्चे इस तरह की चीज़ें आसानी से देख लेते हैं. सेंसर बोर्ड जैसी चीज़ें तो सिर्फ नाम के लिए हैं. एक साइन करना हैं बाकी जो दिखाना है दिखाओं.

बॉलीवुड के कलाकर आम जनता के साथ रेप हो जाएं तो उसे तुरंत ट्वीट कर देते हैं वो भी अपने अजेंडे को ध्यान में रखकर. लेकिन उसी बॉलीवुड में अगर किसी निर्माता -निर्देशक पर रेप का इल्जाम लगे तो ये लोग मुँह में दही जमा लेते हैं.

किस किस पर इलजाम लगाओगे यहाँ तो हर आदमी बिका हुआ हैं. किसी का ईमान बिका हैं, कोई राजनीती के हाथों बीक गया हैं तो कोई धर्म के आगे झुक गया हैं. इंसाफ तो इस अंधी भीड़ में रास्ता ही भटक गया हैं.

तो वजह सिर्फ यही हैं की
इंसाफ इसलिए नहीं मिल पाता क्यूंकि, बीच में राजनीती आ जाती हैं,
मेरी जाति मेरा धर्म आ जाता हैं,मेरी पार्टी तेरी पार्टी आ जातीं हैं,
मीडिया का दोहरा चरित्र आ जाता हैं,झूठे मानवाधिकार संगठन आ जाते हैं.

तो रेप होता रहेगा. राजनीती चलती रहेगी. कैंडल जलते रहेंगे. और इंसाफ खुद ही फंदे से लटकर आत्महत्या करता रहेगा. और हम हर मामले में बस एक दुसरे के ऊपर दोष मँढते रहेंगे.

– mukesh dube

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