गंजे सर पर बाल उगाने का झूठा विज्ञापन करनेवाली जूही चावला को 5G से प्रॉब्लम हैं | पति आज तक गंजा हैं


पहले मुझे लगता था की बॉलीवुड में कुछ ही लोग हैं जो बेवक़ूफ़ हैं लेकिन गहराई से रिसर्च करने के बाद पता चला की बॉलीवुड में एक से बढ़कर एक बेवक़ूफ़ पड़े हैं. जहा पर चीज़े इनके मतलब से जुडी होती हैं. वो सारी चीज़े अच्छी हैं. फिर चाहे विमल पान मसाला हो, पाकिस्तान से रिश्ते भले ही ख़राब हो लेकिन वहा के एक्टर्स और सिंगर्स को बॉलीवुड की फिल्मो में लेना सही हैं ? क्यों ? क्यूंकि कलाकार का कोई मज़हब नहीं होता. कोई देश नहीं होता?

जूही चावला की टीम KKR कोरोना के बावजूद आईपीएल खेल सकती हैं. उनके खिलाडी कोरोना संक्रमित होते हैं लेकिन किसी को बताते नहीं हैं. इस बात में जूही चावल को कोई प्रॉब्लम नहीं. लेकिन जिस 5G टेक्नोलॉजी के बारे में सरकार और मोबाइल कंपनीया कई बार कह चुकी हैं की इससे कोई प्रॉब्लम नहीं इसके बाद भी बॉलीवुड लगातार इसका विरोध कर रहा हैं. जबकि पूरे दिन इसका इस्तेमाल करता हैं.

जूही चावला ने 5G टेक्नोलॉजी के ट्रायल को रुकवाने के लिए कोर्ट पहुंच गयी हैं. अब ना तो ये सरकार में हैं ना विपक्ष में और ना ही कोई एनजीओ से फिर किस हिसाब से ये कोर्ट पहुंच गयी. कोर्ट में इन्होने दलील दी हैं :

“हम टेक्नोलॉजी के खिलाफ़ नहीं हैं. बल्कि हमें तो लेटेस्ट टेक्नोलॉजी के डिवाइस इस्तेमाल करने में मज़ा आता है. जिसमें वायरलैस कम्युनिकेशन भी शामिल है. लेकिन इन लेटेस्ट उपकरणों के इस्तेमाल के साथ ही हम लगातार इससे होने वाले खतरों को लेकर एक असमंजस में भी बने रहते हैं. जब हमनें इन उपकरणों और नेटवर्क टावर्स से निकलने वाली रेडिएशन के बारे में रिसर्च की, तब हमें कई पर्याप्त कारण मिले जो ये साबित करते हैं कि रेडिएशन लोगों के स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है.”

सबसे पहली बात अगर आपको इससे प्रॉब्लम हैं तो आज से ही मोबाइल का इस्तेमाल करना बंद कर दो. क्यूंकि रेडिएशन तो 2G,3G,4G हर किसी में होगा. थोड़ा काम थोड़ा ज़्यादा. जूही चावल को अपने घर से ऐसी को निकाल फेंकना चाहिए क्यूंकि उससे भी पर्यावरण को खतरा पहुँचता हैं. जूही चावला को महंगी कार का इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए क्यूंकि उससे भी खतरा हैं.

सबसे बड़ी बार देश की जनता को जो इतने सालो से बेवक़ूफ़ बना रही हो की केश किंग लगाओ तुम्हारा बाल नहीं झाड़नेवाले हैं. तो ये तेल अपने पति को क्यों नहीं देती. बेचारे के पास इतने पैसे हैं लेकिन गांजा होकर घूमता हैं तुम्हे तो शर्म आनी चाहिए. नेक काम की शुरुवात अपने घर से क्यों नहीं करती हो.

अब रही 5G टेक्नोलॉजी के ट्रायल की बात तो दो टाइप की रेडिएशन तरंगें होती हैं
1-आयोनाइजिंग रेडिएशन.
2- नॉन आयोनाइजिंग रेडिएशन.

आयोनाइजिंग रेडिएशन की तीव्रता काफ़ी तेज़ होती हैं. उदाहरण के लिए अल्ट्रावॉयलेट तरंगें जैसे एक्स रे और गामा रेज़. ये तरंगें शरीर को नुकसान पहुंचा सकती हैं. शरीर की कोशिकाओं और डीएनए तक पर असर छोड़ सकती हैं. इसलिए ही कहा जाता है कि बार-बार एक्स-रे न कराएं. यहां तक कि सूरज की रोशनी में भी ज्यादा देर बैठने को मना किया जाता है.

दूसरी हैं नॉन आयोनाइजिंग रेडिएशन. इनकी तीव्रता काफी कम होती है. इन वेव्स में इतनी ताकत नहीं होती कि शरीर पर कोई रिएक्शन कर सकें. उदहारण के तौर पर रेडियो वाली मीडियम वेव, शॉर्ट वेव और एफएम वाली तरंगें. इसी तरह की तरंगों का इस्तेमाल टीवी सिग्नल, सेलफोन 4जी और 5जी तकनीक में होता है. अमेरिकन कैंसर सोसाइटी ने रेडियो वेव्स पर कई बरसों तक की गई अपनी स्टडी में पाया है कि इनका इंसानों पर कोई भी बुरा प्रभाव नहीं पड़ रहा है.

इस मामले में टेलीकम्युनिकेशन मिनिस्ट्री का भी बयान है. उनका कहना है,

“SERB (साइंस एंड इंजीनियरिंग रिसर्च बोर्ड) की रिसर्च के मुताबिक़ कहीं भी ये पुष्टि नहीं होती है कि 2G, 3G, 4G, 5G तरंगों का मानव, जानवरों, पक्षियों, पेड़-पौधों या अन्य जीव जंतुओं पर कोई असर होता है. “

बात सिर्फ इतने सी हैं की 5G टेक्नोलॉजी का विरोध सिर्फ मुकेश अम्बानी की जिओ के लिए करना हैं. जबकि इंडिया में एयरटेल, जियो, वोडाफ़ोन, आईडिया, एमटीएनएल जैसी कंपनियां इस ट्रायल का हिस्सा हैं. इन कंपनियों का 5G उपकरणों के लिए एरिक्सन, नोकिया, सैमसंग और सीडॉट जैसी कंपनियों के साथ टाई-अप है.

बॉलीवुड और विपक्ष को प्रॉब्लम सिर्फ इतनी सी बात से हैं की इस ट्रायल में चीन को इजाजत नहीं मिली हैं. जिन जिन लोगो को रेडिएशन के बारे में इतनी चिंता हैं. अगर आप रिसर्च करोगे तो पता चलेगा की सबसे ज़्यादा मोबाइल का इस्तेमाल यही लोग करते हैं. तो आज से इन जागरूक लोगो को मोबाइल का इस्तेमाल करना बंद कर देना चाहिए. अगर जूही चावला कहती हैं एक कॉन्ट्रैक्ट साई करती हैं हैं की आज से वो मोबाइल फ़ोन, ऐसी और कार का इस्तेमाल बंद कर रही हैं तो मैं जूही चावला के साथ हूँ. वरना उनको इस तरह की फालतू बात नहीं करनी चाहिए.

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