जो बाइडेन राष्ट्रपति बनाते ही भारत और पाकिस्तान के लिए लिया इतना बड़ा कदम


दुनियाँ के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका में इस बार चुनाव के बाद से ही मामला काफी गड़बड़ रहा हैं. मतलब ट्रम्प चीचा कुर्सी छोड़ने को तैयार ही नहीं थें. ट्रम्प को कुर्सी से ना हटना पड़े इसके लिए उन्होंने हर संभव प्रयास किया. यहाँ तक की उनके समर्थकों ने तो वाइट हाउस में जो तोड़ फोड़ की वो अमेरिका के इतिहास में कभी नहीं हुआ.

देखियें ट्रम्प को बहुत से लोग पसंद नहीं करते थे खासकर मुस्लिम देश. लेकिन ट्रम्प ने अपने राष्ट्रपति रहते कई मुस्लिम देशों पर भले ही बैन लगाया हो लेकिन किसी भी देश पर अमेरिका ने हमला नहीं किया था. जबकि आज तक जितने भी अमेरिकी राष्ट्रपति रहे उन सभी ने किसी ना किसी वजह से किसी ना किसी देश पर हमला किया ही था.

अब जो बाइडेन अमेरिका के ४६वें राष्ट्रपति के रूप में अपनी कुर्सी पर बैठ चुके हैं. और बैठने के बाद से ही कई बड़े फैसले किये हैं. उन फैसले को बारे में कुछ देर में आते हैं लेकिन एक थोड़ा जनरल नॉलेज की बात हो जाएं.

बात अमेरिका की करें तो अमेरिका खुद भी एक लोकतांत्रिक देश हैं. पिछले 233 वर्षों में वहां पर 45 राष्ट्रपति हुए हैं. 72 बार शपथग्रहण हो चुका है. लेकिन लोकतंत्र होने के बावजूद भारत और अमेरिका में एक अंतर है.

हमारे यहाँ जब लोकसभा का चुनाव होता हैं तब प्रधानमंत्री का शपथग्रहण समारोह होता हैं जिसमे विपक्ष से लेकर पड़ोसी देश के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को भी बुलाया जाता हैं. लेकिन अमेरिका में इसे Inauguration Day यानी उद्घाटन समारोह कहा जाता है. अब आपके मन में एक सवाल होगा कि एक जैसी भूमिका होने के बावजूद भारत में होने वाले शपथ ग्रहण समारोह को अमेरिका में Inauguration Day क्यों कहा जाता है?

Inauguration शब्द का इस्तेमाल प्राचीन रोमन साम्राज्य में किया जाता था. उस समय पादरी एक धार्मिक संस्कार की मदद से ये फैसला करते थे कि कोई व्यक्ति ऊंचे पद पर बैठने के योग्य है या नहीं और इस अनुष्ठान को ही Inauguration कहा जाता था. इस समय अमेरिका, रूस, आयरलैंड और ब्राजील सहित कई देशों में शपथग्रहण के लिए Inauguration शब्द का ही इस्तेमाल होता है.

Inauguration Day एक औपचारिक समारोह है. इसके पूरा होते ही राष्ट्रपति के कार्यकाल की शुरुआत हो जाती है. यह समारोह अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में अमेरिका की संसद के सामने आयोजित किया जाता है और इसी समारोह में अमेरिका के नए राष्ट्रपति अपने पद की शपथ लेते हैं.

अमेरिका के संविधान के मुताबिक हर राष्ट्रपति को चुनाव खत्म होने के बाद 20 जनवरी की दोपहर तक शपथ लेना अनिवार्य है.

इस कार्यक्रम में सबसे पहले उप-राष्ट्रपति शपथ लेते हैं और उसके बाद राष्ट्रपति का नंबर आता है और इसके लिए राष्ट्रपति को संविधान द्वारा निर्धारित सिर्फ 35 शब्दों की शपथ को दोहराना होता है.

जब नए अमेरिकी राष्ट्रपति का शपथ समारोह चलता हैं तब पिछले वाले राष्ट्रपति को वहा मौजूद रहना होता हैं. लेकिन डोनाल्ड ट्रम्प अपने बीवी को बच्चों को लेकर निकल गए. गए तो गए साथ ही नूक्लिर वाला फूटबाल भी लेकर चले गए जो की नए राष्ट्रपति को देना होता हैं.

एक चीज़ और बताना चाहूंगा की जब जो बाइडेन शपथ लेने के पहले चर्च गए तो हमारे देश के कुछ लोग बोले वाह कितना अच्छा इंसान हैं. देखों इतनी बड़ी जिम्मेदारी से पहले चर्च में गया. लेकिन जब हमारे देश के प्रधानमंत्री इस तरह का पूजा पाठ या मंदिर जाना करते हैं तब कुछ लोगो को ये बातें ढकोसला लगती हैं और यही चीज़ खुद के मुँह पर चप्पल मारने जैसा होती हैं जो लोग करते हैं.

खैर अब आते हैं जो बाइडेन पर की उन्होंने आते ही क्या क्या बदलाव किये हैं.
– कई मुस्लिम देशों से यात्रा पर लगाया गया बैन भी हटा लिया गया है जो की डोनाल्ड ट्रम्प ने लगाया था. वर्ष 2017 में ट्रंप ने सात मुस्लिम बहुल देशों पर यह बैन लगाया था।
– कोरोना के खतरे को देखते हुए जो बाइडेन ने देशभर में मास्‍क को अनिवार्य कर दिया है।
– मैक्सिको की सीमा पर बन रही बाड़ के पैसे को भी रोक दिया गया है।
– जो बाइडेन ने पेरिस जलवायु समझौते में फिर से शामिल होने को हरी झंडी दे दी
– विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन से अमेरिका के हटने की प्रक्रिया को भी रोक दिया है। जो की डोनाल्ड ट्रम्प ने WHO की गैर जिम्मेदाराना चीज़ के लिए लगाया था जिसके चलते पूरी दुनियाँ में कोरोना फैल गया.
– बाइडेन ने घरेलू आतंकवाद और श्वेतों को श्रेष्ठ मानने वाली मानसिकता को हराने की लड़ाई में अमेरिका के सभी नागरिकों से शामिल होने का आह्वान किया था।

अब डोनाल्ड ट्रम्प को काम किस किस चीज़ों में करना हैं.

– रंगभेद के मुद्दे ने अमेरिका को दो हिस्सों में बांट दिया है और इससे वहां सामाजिक सौहार्द भी बिगड़ा है. इस चीज़ को सुधारना होगा.
– महामारी से अमेरिका का मध्यम वर्गीय समाज प्रभावित हुआ है और आय में एक बड़ा अंतर पैदा हुआ है. और इस खाई को भरना भी जो बाइडेन के लिए बड़ी चुनौती साबित होगा.
– जो बाइडेन पर अमेरिका की अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने की भी जिम्मेदारी है.
– अब बाइडेन ने भले ही सौ दिनों के लिया मास्क लगाना ज़रूरी कर दिया हो लेकिन जो बाइडेन को कोरोना वायरस से निपटने के लिए बड़े और कड़े कदम उठाने होंगे.
– संसद में हुई हिंसा की वजह से अमेरिका की दुनिया के दूसरे देशों में जो नकारात्मक छवि बनी है उसे तोड़ना Joe Biden के लिए सबसे मुश्किल चुनौती होगी.

भारत-अमेरिका की दोस्ती की नई कहानी

Joe Biden की शपथ के साथ ही भारत-अमेरिका की दोस्ती की नई कहानी शुरू होगी.

– ओबामा के दौर में जो बाइडेन ने कई मुद्दों पर भारत का समर्थन किया था. इनमें वर्ष 2008 की न्यूक्लियर डील भी शामिल है.

– आतंक के खिलाफ जो बाइडेन का सख्त रुख भारत के लिए काफी अच्छा माना जा रहा है.

– इमिग्रेशन के मामले पर बाइडेन की पॉलिसी से भारतीय प्रोफेशनल्‍स और छात्रों को फायदा हो सकता है.

– चीन के खिलाफ जो बाइडेन भारत का समर्थन कर सकते हैं. इससे भारत को फायदा हो सकता है.

हालांकि कुछ मुद्दे ऐसे भी है जिस पर जो बाइडेन का रुख भारत से मेल नहीं खाता है.

जम्मू-कश्मीर, CAA और NRC के मुद्दों पर जो बाइडेन भारत के विचारों से पूरी तरह से सहमत नहीं हैं.

पाकिस्तान के मसले पर भी जो बाइडेन ने अपना रुख कभी साफ नहीं किया है. तो ये भी एक ऐसा मामला है जहां भारत के लिए कुछ मुश्किलें आ सकती हैं.

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