इंडिया के अमीर देश छोड़कर भाग रहे. आखिर गलती किसकी हैं ?


दुनिया ख़त्म हो जाएगी इस विषय पर एक फिल्म आयी थी 2012. खैर दुनिया ख़त्म तो नहीं हुयी लेकिन उस फिल्म ने एक बात सीखा दी थीं की अगर आपके पास पैसा हैं तो पूरी ताकत लगा दो अपनी जान बचाने के लिए. स्वार्थी हो जाओ. कौन क्या कहता हैं इस पर ध्यान मत देना. तुम्हारी ज़िंदगी का एक ही मकसद हैं अपनी और अपनी फॅमिली की जान बचाना.

इसमें कुछ गलत भी नहीं हैं. हर कोई अपनी और अपनी फॅमिली की जान बचना चाहता हैं. प्रॉब्लम उनके लिए हैं जिनके पास पैसे नहीं हैं. जिन्हे इस वक्त अस्पतालों में जगह नहीं मिल रही हैं. इंजेक्शन नहीं मिल रहे हैं. ऑक्सीजन नहीं मिल रहा हैं. और अगर ये सब मिल भी जा रहा है तो बहुत देर हो जाती हैं. उस मरीज़ की जान बच नहीं पा रही हैं.

ये समय ऐसा हैं की लोग एक दूसरे की जान लेने से पीछे भी नहीं हट रहे हैं. कल एक अफवाह फैली की एक मरीज की मौत हो गयी जिसके बाद उसके घरवालों ने अस्पताल में जाकर तोड़ फोड़ की. एक नर्स ये सब रोकने की कोशिश कर रही थीं तो उस भीड़ ने चारो तरफ से घेरकर उस नर्स को लाठी डंडो से पिता. हेलमेट से उसके सर पर हमला किया जिसके बाद वो ज़मीन पर गिर गयी. वो नर्स ज़िंदा है या मर गयी वो भी नहीं पता.

एक और तस्वीर दिखी जिसमे कोरोना पीड़ित पति की जान बचाने के लिए उस महिला ने अपने मुँह से अपने पति को अस्पताल पहुंचने तक साँसे देने के काम किया. हालाँकि उसके पति की जान बच नहीं सकी. लेकिन सोचिये उस महिला की हिम्मत उसे पता हैं की वो ऐसा करेगी तो वो खुद भी कोरोना का शिकार हो सकती हैं लेकिन सावित्री बनकर पति की जान बचाने की कोशिश की.

उत्तरप्रदेश का एक गाँव जहा एक औरत की मौत हो जाती है तो गांववाले उसे गाँव में घुसने तक नहीं देते ना ही उसका साथ देते हैं. वो बूढ़ा अकेला इंसान सायकल पर अपनी पत्नी के मृत हो चुके शरीर को लादकर ले जाता हैं. जहा पुलिस वालो की मदद से उसका अंतिम संस्कार किया जाता हैं.

RSS से जुड़े पचासी साल के एक कोरोना संक्रमित बुजुर्ग ने अपनी अस्पताल की बेड एक महिला को दे दी और कहा की मैंने अपनी ज़िंदगी जी ली. दुनिया देख ली हैं. मुझसे ज़्यादा ज़रूरत इस नौजवान युवती को हैं. तीन दिन बाद उस बुजुर्ग की मौत हो जाती हैं.

अगरतला में एक शादी समारोह में परमिसन लेटर होने के बाद भी वहा के डीएम ने शादी हाल में घुसकर शादी करा रहे पंडित को मारा. भारतीयों को मारा. दूल्हे को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया. उसके माँ बाप ने लेटर दिखाया तो डीएम ने लेटर को फाड़कर उनके मुँह पर फेंक दिया. क्या एक डीएम को ये शोभा देता हैं.

इस वक्त कई डॉक्टर अठारह अठारह घंटे की ड्यूटी कर फ़्रस्टेट हो चुके हैं. ऐसे में एक नर्स ने डॉक्टर को तमाचा तक जड़ दिया. काम का इतना प्रेसर. वही दूसरी तरफ हमारे देश के अमीर लोग दोगुना पैसा देकर देश छोड़कर भाग रहे हैं. जिसमे कई बॉलीवुड सेलिब्रिटी और उनका परिवार तक शामिल हैं.

अब कई लोगो को लग रहा होगा की इस वीडियो से मैं डराने का काम कर रहा हूँ. लेकिन्स सच्चाई से कहा भाग सकते हैं. इंडिया इस वक्त रेड जोन में हैं. लेकिन इसके जिम्मेदार सिर्फ नेता हैं ऐसा भी नहीं हैं. अगर वो रैलीया कर रहे हैं तो आम जनता ने भी मास्क लगाना छोड़ दिया था. सोशल डिस्टन्सिंग करना बंद कर दिया था. दुकानों से सामान खरीद कर लाने के बाद उसे सेनेटाइज़ करना बंद कर दिया था.

आप हिंदू को दोष दो या मुस्लिम को, कुंभ को या फिर रमजान को. इस मौत के तांडव के जिम्मेदार हम सभी हैं. जिन अस्पतालों को मरीजों का इंतज़ार रहता था. आज वही अस्पताल फुल हैं. जगह तक नहीं हैं. ना अस्पतालों की कमी हैं ना डॉक्टरों की लेकिन जब मरीज़ लाखो की संख्या में होंगे तो कुछ नहीं किया जा सकता हैं.

कुछ लोग सिर्फ राम मंदिर को कोष रहे हैं. हर बात उनकी मंदिर पर ही आकर रूक जाती हैं. स्टेचू ऑफ यूनिटी को दोष दे रहे हैं. की तीन हज़ार करोड़ में बनी है. अरे जितने में बनी हैं उतना कमाई भी कर चुकी हैं. टूरिज्म नाम की भी चीज़ होती हैं. जो हर देश में हैं. ताजमहल, कुतुबमीनार पर फक्र करते हो लेकिन मंदिर को दोष देते हो. जबकि अयोध्या में मस्जिद भी बन रही हैं. पंजाब में दो हज़ार करोड़ लगाकर चर्च बन रहा हैं. अगर दोष देना हैं तो सभी को दो.

एक आम इंसान के तौर पर हम खुद भी गलत हैं. भ्रस्टाचार में डूबे हैं. अगर नेता तुम्हे रैली में बुला रहे हैं तो तुम जाते क्यों हो ? तुम्हे जब खुद की चिंता नहीं हैं तो सरकारों को दोष देकर क्या फायदा. अभी कल ही राजस्थान में एक मुस्लिम धर्म गुरु गाज़ी फकीर की मौत हो गयी. उस धर्म गुरु के लड़के ने और मरने से पहले उस धर्मगुरु ने या कहा था की मेरी मौत के बाद भीड़ मत लगाना. कोई भी मत आना. लेकिन क्या हुआ. दस हज़ार की भीड़ उनके अंतिम मौके पर पहुंच गयी तो गलती किसकी ?

प्रॉब्लम ये हैं की हर कोई अपनी गलती दूसरे पर डाल देता हैं. हमारे देश के नेता एक दूसरे पर. जबकि रैलीया हर पार्टी कर रही हैं. अगर ऑक्सीजन की कमी हैं तो क्या सब कुछ केंद्र सरकार ही देखे. फिर तुम किस काम के मुख्यमंत्री हो. वोट पाने के लिए और पैसे वसूलने के लिए.

हिंदू मुस्लिम पर दोष देता हैं. मुस्लिम हिंदू पर दोष दे रहा हैं. दोनों मिलकर एक दूसरे की विरोधी पार्टियों को दोष दे रहे हैं. लेकिन अपनी अपनी जिम्मेदारी कोई नहीं निभाना चाहता हैं. अपनी गलती तक कोई नहीं मानता. अभी भी लोग बिना मास्क के घूम रहे हैं लेकिन उनसे पूछो कोरोना का दर्द जिनके घर मौते हो रही हैं.

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