चिंता मत कीजिये ! अभिनंदन को कुछ नहीं होगा, पाकिस्तान को इतने दिन में लौटाना होगा !


जंग कोई नहीं चाहता। ना सरहद के इस तरफ और ना उस तरफ। जंग सिर्फ मातम लेकर आता हैं उन घरों में जिनके घर के चिराग सदा के लिए बुझ जाते हैं। जंग भारत भी नहीं चाहता और भारत में कभी भी किसी देश पर पहला हमला नहीं किया हैं लेकिन जिसने छेड़ा उसे छोड़ा भी नहीं हैं। भारत की लड़ाई पाकिस्तानी अवाम से नहीं हैं बल्कि वहाँ के उन आतंकी संगठनों से हैं जिसे पाकिस्तान कई वर्ष से भारत के खिलाफ इस्तेमाल कर रहा हैं।

भारत के द्वारा की गयी एयर स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान के ३०० आतंकी नरक पंहुचा दिए गए। पाकिस्तान पर दबाव था जिसके चलते आज उसने अपने फ-१६ फाइटर को बहरत की सरहद पर भेजा जिसे भारतीय वायु सेना ने मार गिराया। हालांकि इस प्रक्रिया में भारत का मिग फाइटर भी पाकिस्तान की सरहद में जा गिरा। पाकिस्तान ने पायलट अभिनंदन को गिरफ्तार कर लिया। पाकिस्तान ने कुछ वीडियो ज़ारी किये जिसमे उन्हें पिता जा रहा हैं उनके सर से खून बह रहा हैं। लेकिन शाम होते होते पाकिस्तान ने एक वीडियो और ज़ारी किया जिसमे पायलट अभिनंदन चाय पीते नज़र आ रहे हैं।

वैसे पाकिस्तान हमारे पायलट को ज्यादा दिनों तक अपने कब्जे में नहीं रख सकता है. और इसकी वजह है अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुआ एक समझौता जिसे जेनेवा कन्वेंशन के नाम से जाना जाता है. चलिए जानते हैं आखिर क्या हैं यह जेनेवा कन्वेंशन :

1. संधि का मकसद उन सैनिकों या आम आदमी की रक्षा करना है, जिसे युद्ध के दौरान दुश्मन देश ने पकड़ लिया है.

2. किसी भी देश का सैनिक हो, चाहे स्त्री हो या पुरुष, उसके पकड़े जाने के तुरंत बाद ये संधि लागू होती है.

3. इस संधि के अनुच्छेद 3 के तहत युद्ध के दौरान घायल होने वाले युद्धबंदी का इलाज ठीक तरीके से होना चाहिए.

4. युद्धबंदियों के साथ हिंसा नहीं होना चाहिए.

5. उनके साथ किसी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए. उन्हें ठीक तरीके से खाना-पीना दिया जाएगा. खाना-पीना न देकर युद्धबंदी को परेशान नहीं किया जाएगा.

6. पकड़े गए लोगों को डराया-धमकाया नहीं जा सकता है. उन्हें अपमानित नहीं किया जा सकता है.

7. पकड़े गए लोगों को कानूनी सुविधा देनी होगी.

8.संधि के मुताबिक अगर कोर्ट में मुकदमा चलाना है, तो वकील देना होगा.

9. युद्ध के बाद युद्धबंदियों को वापस लौटाना होगा और जितनी जल्दी संभव हो, लौटाना होगा.

10. पूछताछ के दौरान युद्धबंदियों से सिर्फ उनके नाम, सैन्य पद, नंबर और यूनिट के बारे में पूछा जा सकता है. धर्म, जाति और जन्म के बारे में पूछताछ करने की मनाही है.

11. किसी दूसरे देश के सैनिक या आम आदमी की डेड बॉडी के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जाएगी.

12. पकड़े गए युद्धबंदी को उनके घरवालों से मिलने दिया जाएगा.

13. युद्धबंदियों को ढाल की तरह इस्तेमाल नहीं किया जाएगा.

14. पकड़े गए धर्मगुरुओं को तत्काल छोड़ना होगा.

15. रेड क्रॉस सोसाइटी कभी भी इन युद्धबंदियों से मिल सकेगी.

16. 1977 में जोड़े गए प्रोटोकॉल 1 के तहत इस संधि के तहत युद्धबंदियों को मिलने वाली सुविधाएं आम लोगों, मिलिट्री के लिए काम करने वाले लोगों और पत्रकारों पर भी लागू होंगी.

17. जो लोग युद्ध में शामिल नहीं रहे हैं, अगर वो भी पकड़े जाते हैं तो उनके साथ ऊपर लिखी सारी शर्तें लागू रहेंगी.

18. अगर युद्धबंदी कोई बच्चा है, तो उसका ठीक से खयाल रखा जाएगा. उसकी पढ़ाई-लिखाई जारी रहेगी.

19. बच्चों से काम करवाना, आतंक में उन्हें शामिल करना, उनसे मज़दूरी करवाना या सामूहिक रूप से उन्हें दंडित करने को ये संधि प्रतिबंधित करती है.

20. युद्ध बंदी के दौरान अगर किसी बंदी की मौत हो जाती है, तो पूरे सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार किया जाएगा.

इस संधी को हर देश मानता हैं और पाकिस्तान को भी मानना होगा। इस तरह की घटना कारगिल युद्ध के दौरान भी देखी गयी थीं। जब पायलट नचिकेता पाकिस्तान की हिरासत में आ गए थे जिन्हे सात दिन के बाद वाघा बॉर्डर पर सुरक्षित पंहुचा दिया गया था।

With Inputs From The Lallantop

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