मानव का विकास गंगा जल की पवित्रता जैसा होना चाहिए: चंद्रभूषण सिंह


चंद्रभूषण सिंह 

जल जैसा गंगा रूपी जीवन मनुष्य के जीवन की कल्पना है। जल और मन एक जैसे होते है। जिस प्रकार गंगा को सब से पवित्र और अलग मना गया है। उसी प्रकार मनुष्य के जीवन का आधार जल जैसा हो जाये तो फिर मनुष्य गंगा जैसा जीवन जी सकता है। गंगोत्री से निकला जल गंगासागर तक पहुंचने पर ही अपने को सही निर्वाण दे पाता है। उसी प्रकार मनुष्य का जल रूपी जीवन जन्म से मरण तक गंगा के स्वरूप का ही अवतरण है। वही जल और मनुष्य का जीवन जैसे जैसे आगे बढ़ता है। अपने किरदार को अलग अलग रूपो में परिवर्तित करता है। लेकिन जल का मूलस्वरूप नही बदलता उसी प्रकार जैसे जैसे मनुष्य का जीवन उम्र बढ़ती रहती है। उस का मूल स्वरूप नही बदलता है। वो गंगोत्री से निकल कर जब मंदाकिनी जब अलखनंदा से मिलती है। है तो दोनों के स्वरूप से गंगा का जन्म होता है,यही मनुष्य मानव के जन्म का आधार है। इसी।प्रकार मनुष्य के जन्म में दो स्वरूपों के मिलन पर एक गंगाजल का जन्म होता है। यही प्रकृति की संरचना का आधार आरंभ होता है। यहाँ पर जल के दोनों स्वरूपों की कल्पना,मनुष्य के जन्म की कल्पना के समान है। फिर वही जब गंगाजल बनता है और उस की यात्रा शुरू होती है तो ।हरिद्वार तक गंगा का स्वरूप देखने लायक है।वहाँ युवा ,शक्तिशाली जल जो कितने ही सभ्यतो को जीवन देता है। फिर आगे बढ़ता है। फिर अपनी अगली अवस्था की ओर बढ़ते बढ़ते गंगाजल गंगा सागर तक पवित्र गंगा जल ही रहता है।

अब हम मनुष्य जो कि गंगाजल बना था।वो हरिद्वार आते आते और फिर वहां से आगे बढ़ते बढ़ते कितनी तरह के नालों और नालियों के दूषित प्रदूषित तत्त्वों को अपने साथ मिलता है। लेकिन मनुष्य अपनी सभ्यता में कहाँ तक जा सकता है। पता नही। लेकिन वही गंगाजल हरिद्वार से निकली यात्रा को ले कर कानपुर फिर प्रयागराज तक उसे कितनी ही तरह के चीज़ों को अपने में मिलना पड़ता है।लेकिन उस जल का मूल स्वरूप नही बदलता । वो प्रयागराज में त्रिवेणी के मिलन में और पवित्र हो कर बनारस के घाटों पर पवित्रता का बोध कराता है। उसी प्रकार आप का जीवन अपनी युवा अवस्था से बाहर निकल आया,मतलब वो जीवन कानपुर के गंदे नाली नालों को अपने मे मिलता है।लेकिन अपने मूल स्वरूप को नही बदलने देता तो उस को आगे संगम इंतज़ार कर रहा है।संगम भी मनुष्य के जीवन में मिलने वाली और नदियों के जल के मिलन का है। और संगम के बाद जीवन का आधार शिव की नगरी काशी तै करती है। अब आप को गंगा सागर तक तो जाना है अब आप का स्वरूप क्या होगा ये आप को जल के जीवन से सीखना होगा। इसलिए गंगोत्री से निकाला जल जब गंगाजल बनाता है। इसी प्रकार मनुष्य की सभ्यता का विकास एक ही तरह है।जिस प्रकार जल अपने स्वरूप में हर तरह के जीवन को समाहित कर लेता है। और दूसरे के तत्व में उसी रूप में समाहित कर लेते है जैसा मनुष्य चाहता है। लेकिन जल का स्वरूप जितना विशाल होगा। जल का रूप उतना ही अपने मूल तत्व में रहता है। जिस प्रकार जल में कोई चीज़ डालने पर उस का स्वरूप नही बदलता।लेकिन जल को कही और मिलाना या डालना है तो उस को माप और तौल कर डाला जाता है।

आप अपने जल जैसे जीवन मे किसी को समाहित कर सकते है। और वो आप के अनुसार चल सकता है। लेकिन जहाँ पर आप की उपयोगिता का विचार आये वहाँ ये देखिये की वस्तु में आप की क्या अहमियत है। जल का स्वरूप नही बदलेगा। वो अपनी जगह बना ही लेगा।मनुष्य को जल की तरह निर्मल,स्वच्छ, ऊर्जा,और पवित्र होना चाहिए। जल में कितनी ही तरह की गंदगी आ कर मिले।जल अपने को उस से अलग कर अपने गंगा स्वरूप में आगे की यात्रा पर निकल पड़ता है। इसी प्रकार मनुष्य को अपने जीवन का आदर्श उस गंगा जल के समान मनना चाहिए। उस गंगा जल की प्रकृति और संरचना के आधार पर जीवन जीना चाहिए। कि उसे एक दिन महासागर रूपी मोक्ष सत्य मृत्यु में मिल जाना है। यही गंगोत्री से गंगासागर की यात्रा जल और मनुष्य की एक समान है। बस दोनो में अंतर यही है।जल का तरल स्वरूप है।और मनुष्य का स्वरूप पाँच तत्व का है। लेकिन दोनों की यात्रा का अंत एक ही है।इसलिए मनुष्य के गंगाजल जैसा विचार को लेकर आगे चलते रहना चाहिए, और अपने मूल स्वरूप को नही बदलना चाहिये, उस मे तरह तरह के लोग,संगति कुसंगति आती जाती रहेंगी।लेकिन उस को मूल तत्व गंगाजल नही खत्म होना चाहिए। और अंत यही है कि एक दिन गंगा सागर तक सभी को जाना है। आप गंगोत्री से चल कर अपनी यात्रा हरिद्वार, कानपुर, प्रयागराज, काशी,पटना,या फिर गंगा सागर तक ले जा पाते है। यही जल और जीवन की यात्रा हमे जीवन की कल्पना और जल की कल्पना के धरातल मानवीय रूप को देख पाते ही। गंगा अपने कई रूपो को हमे दिखती है। लेकिन उस से उस का मूलरूप नही बदलता, और वो उसे उसी रूप में ले जाती है। जल जैसा जीवन गंगाजल जैसा मनुष्य अपना विकास स्वयं करता है। जल जीवन का असली आधार है।

चंद्रभूषण सिंह।लेखक, निर्देशक,अभिनेता।

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