एक सुपरहीरो DOG की कहानी, जो रेलवे स्टेशन पर 10 साल तक करता रहा मालिक का इंतजार


इस वीडियो को एन्ड तक ज़रूर देखना यकीन मानिये आप निराश नहीं होंगे. और हो सके तो इस वीडियो को लोगो के साथ शेयर भी करें.

आपने कई इमोशनल कहानीया सुनी होगी और कई फिल्मे देखी होगी जिसे देखने के बाद अप्पकी आँखों से आंसू तक निकल आये होंगे. लेकिन एक ऐसी फिल्म जिसे हो सकता हैं की आप में से कई लोगो ने देखा होगा और जिन लोगो ने नहीं देखा होगा उन्हें ज़रूर देखना चाहिए. प्यार, वफ़ादारी, इंतज़ार, समर्पण सब कुछ है इस फिल्म में. एक मालिक और उसके कुत्ते के बीच की अनोखी कहानी. हचिको.

हचिको ये कोई काल्पनिक कहानी नहीं हैं बल्कि सच्ची घटना पर आधारित हैं. जापान में इसे नेशनल हीरो का दर्जा मिला हैं. हचीको को टोक्यो यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एजाबुरो यूनो ने पाल रखा था. दोनों के बीच इतना प्यार था की हचको हर रोज़ सुबह अपने मालिक को रेलवे स्टेशन छोड़ने के लिए जाता था जब वो पढ़ाने के लिए यूनिवर्सिटी जाते थे. और शाम को जब प्रोफेशन लौटते तो वो उसी रेलवे स्टेशन के बाहर उनका इंतज़ार करता.

लेकिन 21 मई 1925 को उस रोज़ प्रोफेशर जब घर से निकले तो हचिको भी स्टेशन तक साथ गया लेकिन यूनिवर्सिटी में पढ़ा रहे प्रोफेशन को ब्रेन हेमरेज का शिकार हो जाते हैं और उनकी मौत हो जाती हैं. ये बात हचिको को पता नहीं थी वो तो अपने मालिक के लौटने का इंतज़ार कर रहा था उसी स्टेशन पर.

प्रोफेसर के घर का नौकर शाम को हचिको को लेने स्टेशन जाता हैं. हालांकि फिल्म में दिखाया गया हैं की प्रोफेसर का दामाद हचिको को लेने जाता हैं. खैर, हचिको को अभी भी इंतज़ार था की उसका मालिक स्टेशन से बाहर निकलेगा. वो हर रोज़ सुबह शाम रेलवे स्टेशन चला जाता इस इंतज़ार में की उसका मालिक शायद अब स्टेशन से बाहर निकल आये लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

दस साल तक हचिको ने अपने मालिक का इंतज़ार किया. जापान के एक बड़े अख़बार ने जब हचिको की कहानी पब्लिश की तो हचिको को देखने के लिए हर रोज़ उस स्टेशन पर भीड़ लग जाती. हर कोई उसके साथ तस्वीर लेने के लिए और उसे कुछ न कुछ खिलाने के लिए वह पहुंच जाता. जापान ने उसे ‘चुकेन हचीको’ के नाम से बुलाने लगे, जिसका मतलब होता है वफादार कुत्ता।

1934 में शिबुआ ट्रेन स्टेशन पर हचीको का स्टैचू लगा दिया गया और उसकी ओपनिंग एक ग्रैंड सेरेमनी में की गई, जिसमें खुद हचीको भी मेन गेस्ट था।

8 मार्च 1935 में इसी स्टेशन के पास सड़क पर हचीको ने दुनिया को अलविदा कर दिया। टोक्यो के यूनो में नेशनल साइंस म्यूजियम में उसकी फोटोज लगाई गई हैं।

इसके अलावा टोक्यो में ही हचीको और उसके ओनर का एक और मॉन्युमेंट है। दोनों का आयोमा सीमेंट्री में एक मकबरा भी है।

यहां के यंग लोगों के बीच हचीको का ब्रॉन्ज स्टैचू बहुत पॉपुलर है। यहां पहुंचने वाले लोग उसके साथ फोटोज खिंचवाते हैं।

इस तरह की रियल लाइफ स्टोरी पर बनी फिल्मे हर किसी को देखनी चाहिए ताकि जिनके भीतर वफ़ादारी ना हो वो कुछ वफ़ादारी सीख सकें. खासकर कुछ बॉलीवुड सित्तरों को तो बिलकुल देखनी चाहिए क्यूंकि उनके भीतर देश के प्रति वफ़ादारी बिलकुल खत्म हो चुकी हैं.

इस फिल्म को जब आप देखोगे तो फिल्म के अंत तक आप बहुत ही ज़्यदा इमोशनल हो जाओगे. नब्बे मिनट की फिल्म आपको बहुत कुछ सिखने के लिए मजबूर करती हैं.

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