बहुत पूजा कर ली अब ऊपर जाकर करना, गुलशन कुमार की मौत के बाद इसलिए डरता है बॉलीवुड


दुनिया में ऐसा कोई इंसान नहीं होगा जिसे अपनी जान की परवाह नहीं होगी. हर कोई चाहता हैं की अगर उसे मौत मिले भी तो इज्जत वाली मौत मिले ना की ऐसी मौत जहा आपको बोलने तक का मौका भी नहीं मिले. बॉलीवुड सितारे रहते तो इंडिया में है लेकिन इनका पूरा रिमोट अंडर वर्ल्ड चलाता हैं. यही वजह हैं की अंडर वर्ल्ड बॉलीवुड में पैसे लगता हैं और अपनी मर्जी से जैसे कंटेंट वो बनवाना चाहे बना लेता हैं.

यही वजह हैं दीपिका पादुकोण JNU में जाकर खड़ी हो जाती हैं. जैसा की एक्स रॉ अफसर  के सूद जी का कहना था की दीपिका ने पांच करोड़ लेकर JNU में खड़े होने का काम किया था. दीपिका को पता है यहाँ उसे गालीया ज़रूर मिलेगी लेकिन उसकी जान बच जाएगी. शायद यही वजह हैं जो सुशांत ने किसी चीज़ के साथ समझौता नहीं किया होगा और उनकी जान चली गयी.

कुछ ऐसी ही चीज़ टीसीरीज के गुलशन कुमार के साथ हुई थीं. गुलशन कुमार अपने पिता के साथ दिल्ली में जूस की दूकान चलाया करते थे. लेकिन इस काम से वो बोर हो चुके थे. उनके पिता ने एक और दूकान खरीदी जहा पर वो फ़िल्मी गांव को कैसेट्स में डालने का काम करते थे. ये काम गुलशन कुमार को पसंद आया.

इसके बाद गुलशन कुमार ने सुपर कैसेट्स इंडस्ट्रीज लिमिटेड कंपनी बनाई जो भारत में सबसे बड़ी संगीत कंपनी बन गई। उन्होंने इसी संगीत कंपनी के तहत टी-सीरीज की स्थापना की। गुलशन ने नोएडा में एक प्रोड्क्शन कंपनी खोली। धीरे-धीरे वे भक्ति गीत और भजन गाने के चलते पॉपुलर होने लगे। गुलशन ने अपने बिजनेस को बढ़ता देख मुंबई शिफ्ट होने की सोची।

मुंबई आने के बाद गुलशन की किस्मत बदल गई। उन्होंने तकरीबन 15 से ज्यादा फिल्में प्रोड्यूस की जिनमें एक फिल्म ‘बेवफा सनम’ को उन्होंने डायरेक्ट भी किया। उनकी पहली प्रोड्यूस की गई फिल्म 1989 में आई ‘लाल दुपट्टा मलमल का’ थी। लेकिन उन्हें असल पहचान साल 1990 में आई फिल्म ‘आशिकी’ से मिली।

लेकिन ये सफलता उनके लिए सिरदर्द बन गयी. अंडर वर्ल्ड से दावूद इब्राहिम के फ़ोन आने लगे और उस वक्त गुलशन कुमार से दस करोड़ रूपये की फिरौती मांगी गयी. लेकिन गुलशन कुमार ने देने से मना कर दिया और कहा की इतने पैसे में तो मैं वैष्णो देवी में ना जाने कितने लोगो को भोजन करा सकूंगा. गुलशन कुमार हर साल वैष्णो देवी कई हज़ार लोगो को भेजते थे उनके यात्रा से लेकर उनके रहने और खाने का इंतेज़ाम किया करते थें.

अंडर वर्ल्ड को ये बात पसंद नहीं आई और 12 अगस्त 1997 को मुंबई के साउथ अंधेरी इलाके में स्थित जीतेश्वर महादेव मंदिर के बाहर गोली मारकर गुलशन की हत्या कर दी गई थी। उस रोज़ गुलशन कुमार का बॉडीगार्ड उनके साथ नहीं था उसकी तबियत ख़राब थीं. ड्राइवर ने बीच में गाडी लाकर बचाने की कोशिश की तो उसके पैर में भी दो गोलिया मारी गयी थीं.

गुलशन कुमार को मारने की सुपारी अबू सालेम ने ली थी जो दावूद का ख़ास था. उसने दो शार्प शूटर की सहायता से इस काम को अंजाम दिया था. जब शूटर्स ने गोली मारी और गुलशन ज़मीन पर गिरे तो शूटर्स उस वक्त बोल रहे थे. बहुत पूजा कर ली अब ऊपर जाकर करना.

गुलशन कुमार की हत्या का आरोप संगीतकार नदीम श्रवण की जोड़ी के नदीम सैफी पर लगा. ये बात सामने आयी की गुलशन कुमार ने नदीम को पीछे छोड़ दिया हैं इसलिए नदीम ने ये सब करवाया हैं. हलांकिकी सबूतों के अभाव में नदीम को छोड़ दिया गया जो की उस वक्त से लेकर अब तक लंदन में ही हैं.

जब गुलशन कुमार की मौत हुई तब तक टी सीरीज बहुत बड़ा ब्रांड बन चुका था. इस कंपनी को गुलशन कुमार के भाई कृष्ण कुमार और बेटे भूषण कुमार ने चलने का काम शुरू किया. और यही वजह हैं जिसके बाद बॉलीवुड अंडर वर्ल्ड से डरने लगा. दुबई में जब बुलावा होता हैं तब इन कलाकारों को वहा जाना होता जिसके लिए इन्हे पैसे भी मिलते हैं.

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