उत्तरप्रदेश में बनेगा नया बॉलीवुड, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बड़ा ऐलान


पूरे देश में इस वक्त सिर्फ एक ही बात चल रही हैं की बॉलीवुड में जो गंदगी हैं. ड्रग्स माफिया, बॉलीवुड माफिया, नेपोटिस्म ये पूरी तरह से साफ़ होनी चाहिए. दूसरे राज्यों से जो कलाकार आते हैं जिनके साथ इतना भेदभाव होता हैं वो ख़त्म होना चाहिए. लेकिन क्या सोशल मीडिया पर सिर्फ ये बोल देने से की भेदभाव ख़त्म होना चाहिए तो क्या ये ख़त्म हो जायेगा ? नहीं . उसके लिए एक कदम उठाने की ज़रूरत हैं जो फिलहाल उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने उठा लिया हैं. उन्होंने ये कहा हैं की इस देश में हम नोएडा में भारत की सबसे बड़ी फिल्म सिटी बनाने जा रहे हैं. अब इस बात से क्या क्या चीज़े होनेवाली हैं वो बता देता हूँ.

सबसे पहली बात इस देश में जो नामचीन फिल्मसिटी हैं वो कुछ इस तरह से हैं. मुंबई फिल्मसिटी, रामोजी फिल्मसिटी हैदराबाद, इंनोविएटिव फिल्म सिटी बेंगलुरु, नॉएडा फिल्म सिटी जो लगभग १०० अकड़ में फ़ैली हैं. MGR फिल्मसिटी चेन्नई.

देखिये ये सब तो फिल्मसिटी हैं. जो बहुत ही ज़्यदा बड़ी हैं और यहां पर हर प्रकार की सुविधा फिल्म बनानेवालों को मिल जाती हैं. लेकिन इसके अलावा भी मुंबई कई तरह के स्टूइडोस हैं जैसे कमालिस्तान, मेहबूब स्टूडियो, ND स्टूडियो, राजकमल कलामंदिर, RK स्टूडियोज तो इस तरह से कूल मिलाकर भारत में हर राज्य में कई तरह के फिल्म स्टूडियोज मौजूद हैं.

इन सभी में मुंबई में अगर आप देखेंगे तो यहाँ पर फिल्म बनानेवाले और काम करनेवाले आसानी से मिल जाते हैं. अँधेरी, लोखंडवाला में कई तरह के छोटे मोठे प्रोडक्शन हाउस भी हैं. कई बड़े और नामी कलाकार यहाँ रहते भी हैं. अब हम में से कई लोग हैं जो टीवी सीरियल और फिल्मे तो देख लेते हैं. निर्माता, निर्देशक, कलाकार इन सभी के नाम भी जान लेते हैं. लेकिन उन लोगो के बारे में हम कभी नहीं जान पाते हैं. जो परदे के पीछे रहकर सबसे बड़ा काम करते हैं.

जैसे की लाइट मैन, कारपेंटर, सेट डिज़ाइनर, स्पॉट बॉय, पेंटर, असिस्टेंट,इलेक्ट्रीशियन, मोल्डर इस तरह के मज़दूर लोग जिनके लिए फिल्म स्टूडियोज सेटिंग्स एंड अलायड मज़दूर यूनियन हैं. जिसमे ४६००० से भी ज़्यदा मज़दूर हैं यानी के इन सभी को बॉलीवुड में काम करके रोजगार मिल रहा हैं.देखिये इस तरह की कूल मिलाकर कई तरह की यूनियन हैं जिसमे सिनेमेटोग्राफर, स्क्रीन राइटर, साउंड इंजीनियर,स्टंट अस्सोसिऐशन,डांसर्स अस्सोसिएशन्स, कास्टिंग एंड मेक उप एसोसिएशन,डबिंग आर्टिस्ट एसोसिएशन,म्यूजिशियन एसोसिएशन,महिला कलाकार संघ,वीडियो एडिटर्स एसोसिएशन और इन सभी की मदर बॉडी हैं फेडरेशन ऑफ़ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉईज़ जिसे मिलाकर कूल ५ लाख से भी ज़्यदा मेंबर हैं.

यानी कोई भी अपनी मैन मर्जी के हिसाब से नहीं चल सकता हैं. ये जितने भी एसोसिएशन हैं अगर इसमें से किसी से भी एक्स्ट्रा टाइम पर शूट कराने से लेकर अगर उनकी पेमेंट समय पर नहीं मिलती हैं तो फिल्म स्टूडियोज सेटिंग एंड अलायड मजदूर यूनियन और फेडरेशन उन लोगो पर करवाई कर सकती हैं.

इन सभी बातो को बताने का मतलब ये हैं की मायानगरी बॉलीवुड से लाखो लोग जुड़े हैं जो काम भी कर रहे हैं और अपनी जीविका भी चला रहे हैं. लेकिन इसके बावजूद बॉलीवुड में नेपोटिस्म से लेकर बॉलीवुड माफिया जैसी बातें सामने आती हैं. अब सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद से सोशल मीडिया पर आवाज़ उठी की बॉलीवुड को ख़त्म कर देना चाहिए. बर्बाद कर देना चाहिए. तो बॉलीवुड सिर्फ सलमान खान, करण जोहर,एकता कपूर, संजय लीला भंसाली और टी सीरीज तक ही सीमित नहीं हैं. बॉलीवुड को ख़त्म करना मतलब लाखो लोगो के पेट पर लात मारने जैसा होगा जो इतना आसान काम नहीं हैं.

कैंसर होने पर इंसान को मार नहीं दिया जाता हैं बल्कि उसका इलाज किया जाता हैं. जो केंद्र सरकार शुरू भी कर चुकी हैं. अब जब बात उठी हैं की नॉएडा में योगी जी इस देश का सबसे बड़ा फिल्म सिटी बनाने जा रहे हैं तो इसके सामने चुनौतियां किया आनेवाली है.

सरकार के पास बहुत पैसा हैं वो ज़मीन खरीदकर आज के हिसाब से एक मॉडर्न फिल्म सिटी बना सकती हैं. जहां पर हर प्रकार की सुविधा होगी. उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, बिहार, दिल्ली, राजस्थान से जितने भी कलाकर, वो मजदुर होंगे उनके लिए आसान होगा की वो अपने गाँव के करीब रहकर अपना काम कर सकते हैं. मुंबई फिल्मसिटी और बॉलीवुड में जो काम करनेवाले मजदूर हैं वो ज़्यदातर UP और बिहार से आते हैं. जो काम की तलाश में मुंबई आते हैं. रहने के लिए उन्हें एक किराए का मकान देखना होता हैं. रहने और खाने दोनों की चिंता बनी रहती हैं. कितना कमाएंगे और कितना बचाएंगे ये बात उन्हें ही पता होगी. अब ऐसा नहीं हैं की ये जो भी मजदूर हैं वो गोरेगांव के फिल्मसिटी में काम कर रहे हैं तो सब के सब गोरेगांव में ही रहते हैं. ये सभी मुंबई से सटे जैसे की कल्याण, भिवंडी, थाने, वसई, नालासोपारा जैसे जगहों से लोकल ट्रैन के माध्यम से हर रोज़ आना जाना करते हैं.

अब एक जो खबर ये मिली हैं उस हिसाब से नोयडा में जो फिल्मसिटी बनेगी उसकी आसपास एक स्मार्ट सिटी भी बनाई जाएगी जो खास कर के इन फिल्म में काम करनेवालों के लिए ही होगी. जिन्हे कम किराए पर वहा हर प्रकाश की सुविधा मिलेगी. बात अगर प्रोड्कशन हाउस की करे या रिकॉर्डिंग स्टूडियोज इन सभी की तो ये साड़ी सुवधा तो अभी भी नॉएडा में उपलब्ध है और आनेवाले समय में कई और लोग अपने कारोबार को वहा समेट सकते हैं. यानी होगा ये की योगी जी की ये प्लानिंग आनेवाले समय में लाखो लोगो को रोजगार प्रदान कर सकती हैं.

देखिये साउथ की फिल्म इंडसट्री कभी मुंबई आकर अपने फिल्म की शूटिंग नहीं करती हैं. उन्होंने अपनी ही एक अलग इंडसट्री बनाकर राखी हैं. जो फिल्मे साउथ में बनती हैं उसकी क्वालिटी भी अब पहले से काफी अच्छी हो चुकी हैं. इसलिए साउथ के कलाकार बॉलीवुड पर डिपेन्डेन्ट नहीं हैं. तो आनेवाले समय में भी नोयडा में भी कुछ ऐसा ही नज़ारा देखने को मिल सकता हैं.

रहा सवाल बॉलीवुड के बर्बाद होने का तो ऐसा संभव नहीं हैं. अभी मामला गर्म हैं लेकिन दो या तीन साल के बाद शायद सब कुछ ठीक हो जाएगा. लेकिन ये बात भी सही है की जिन बॉलीवुड कलाकारों का आज विरोध हो रहा हैं उनका विरोध आगे भी होता रहेगा. उनके प्रति लोगो की नफरत आगे भी चलती ही रहेगी. ये कभी ख़त्म नहीं होगी. जिस तरह से UP में फिल्म सिटी बनाने की बात चल रही हैं ठीक उसी तरह से बिहार में भी सुशांत सिंह राजपूत के नाम से फिल्मसिटी बनाने की बात चल रही हैं. यानी की ये राज्य अब फिल्म बनाने के मामले में आत्मनिर्भर बनानेवाला हैं.

भारत में हर साल कूल मिलाकर १५०० से लेकर २००० के करीब फिल्मे बनती हैं जिसमे बॉलीवुड से लेकर साउथ की फिल्मे, रीजनल फिल्मे, भी शामिल हैं. बॉलीवुड में कूल मिलाकर २५००-३०० के करीब फिल्मे हर साल बनती हैं तो बाकी फिल्मो के लिए मार्किट बहुत बड़ा हैं. बॉलीवुड की फिल्मे और उनके कलाकार इसलिए सभी के नज़र में आते हैं क्यूंकि इनकी PR कम्पनीया इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक इनकी प्रमोशन करती हैं. लेकिन रीजनल फिल्म के बाते में ऐसा संभव नहीं होता हैं. यहाँ एक तैमूर के पैदा होने पर मीडिया पागल बन जाती हैं. क्या तैमूर इस दुनिया का इकलौता क्यूट बच्चा हैं. नहीं ऐसे क्यूट बची और इन से अच्छी टैलेंटेड बच्चे भारत के हर घर में मिल जायेंगे.

तो कूल मिलाकर ये बात हैं की योगी जी बहुत बड़ा दांव खेला हैं जिसकी सक्सेस होने के चान्सेस पूरा शत प्रतिशत हैं.

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