VIDEO : EROS NOW ने उड़ाया नवरात्री का मज़ाक. बायकाट का बदला लेता बॉलीवुड


बॉलीवुड, विज्ञापन कंपनीया, स्टैंड उप कॉमेडियंस, कुछ पॉलिटिशंस इन सभी ने एक मंत्र सीख लिया हैं की खुद को वायरल करना हैं. फ्री की प्रमोशन करवानी हैं. मीडिया और सोशल मीडिया की नज़र में बने रखना हैं तो सिर्फ एक छोटा सा काम करना हैं. और वो ये हैं की हिन्दू धर्म पर कुछ भी आपत्तिजनक चीज़ बना दो, दिखा दो या बोल दो. कुछ ही देर में वो चीज़ वायरल हो जाएगी. जमकर प्रमोशन होगा. बवाल होगा. टीवी न्यूज़ में डिबेट होगी.

और अंत में एक छोटा सा काम करना हैं की अगर आप बड़ी कंपनी हो तो एक ऑफिसियल प्रेस नोट जारी कर देना. की हम भारतीय संस्कृति और हिन्दू धर्म का सम्मान करते हैं. ये गलती अनजाने में हो गयी हैं. अगर इससे आप की भावना आहत हुयी हैं तो हम इसके लिए माफ़ी मांगते हैं. बस बात खत्म. अगर कोई स्टैंड उप कॉमेडियन हैं तो फिर ट्विटर पर जाकर सॉरी लिख देगा और बात वही समाप्त.

अगर देखा जाये तो आज के समय में हिन्दू धर्म मज़ाक का विषय बन गया हैं. प्रमोशन का बहुत ही आसान तरीका बन गया हैं. रक्षाबंधन आते ही PETA जैसे लोग जानवरो पर जुल्म ना करने की बात करते हैं जबकि रक्षाबंधन का जानवर से कोई लेना देना नहीं हैं. वही PETA बकरीद पर जहां लाखो बकरो को काट दिया जाता हैं वहा हैप्पी बकरीद लिख कर छोड़ देता हैं.

करवा चौथ को औरतों पर ज़ुल्म बताया जाता हैं. साल भर सिगरेट पीने वाले लोग दिवाली पर अस्थमा और प्रदुषण पर ज्ञान देते नज़र आ जाते हैं. अभी दिवाली को कुछ दिन बचे हैं देख लेना प्रियंका चोपड़ा को अस्थमा की शिकयात होने में कुछ ही दिन बाकी हैं.

होली पर पानी बचाओं का ज्ञान दिया जाता हैं. मकरसंक्रांति पर पतंग मत उड़ाओ वरना पंछीयो की मौत हो जायेगी. लेकिन नार्मल डेज में इन्ही पंछियों को पिंजरे में बंद करके रखना एक अच्छा सन्देश देने जैसा माना जाता हैं.

हिन्दू धर्म का ऐसा कोई भी त्यौहार नहीं हैं हैं जब हिन्दू धर्म को टारगेट नहीं किया जाता हैं और ये सब जान भूझकर किया जाता हैं. इन्हे पता हैं इस बात से किसी कोई फर्क नहीं पड़नेवाला हैं. ये चीज़ मैं बार बार कहता हूँ की हर धर्म की अपनी आस्था हैं आप उसे बदल नहीं सकते और उसके साथ खिलवाड़ भी नहीं किया जाना चाहिए. होता क्या हैं की एक धर्म का मज़ाक बनता हैं और दूसरा धर्म उसके मज़े लेता हैं. जब तक की उसके अपने धर्म का मज़ाक नहीं बन जाता.

इस बात में मुझे बताने की अब ज़रूरत नहीं हैं की एरोस नाउ जो घिनोना काम किया हैं वो कितने भी माफ़ी मांग लें यकीन ये काम उस कंपनी ने जानभूझकर किया हैं. नवरात्री जैसे पवित्र नौ दिन की माँ दुर्गा के त्यौहार और करोडो लोगो की आस्था का मज़ाक बनाया हैं. कब तक और कितनी बार आप किन किन चीज़ों का बायकाट करते रहोगे अब तो ये हर रोज़ की बात हो गयी हैं. ये हालत तब हैं जब सत्ता बीजेपी हैं जिस दिन कोई और होगा उस दिन आप सोच लो की हिन्दू धर्म का क्या से क्या हो जाएगा.

इस तरह की चीज़ें जानभूझकर बनाई जाती हैं ताकि दो धर्म के लोग सोशल मीडिया से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया तक आपस में लड़ते रहे. इन लोगो को कोई फर्क नहीं पड़ता हैं की हिन्दू मरता हैं या मुस्लिम. हमने जो काम किया हैं बस इस बात से हमारा निजी फायदा होना चाहिए.

देखिये कोई भी धर्मं इतना कमज़ोर नहीं होता हैं की आप उसकी आस्था का मज़ाक बनाओगे तो वो धर्म बदनाम हो जायेगा. लेकिन एक बात का फर्क ज़रूर पड़ता हैं की इस तरह के काम करके कुछ ना कुछ नुक्सान तो ज़रूर होता हैं. अगर केंद्र में बैठी सरकार भी हिन्दू धर्म के बार बार मज़ाक बनाने पर कुछ नहीं कर सकती हैं. तो इस पर क्या ही बोले अब. कोई तो कानून लाओ की दुबारा कोई ऐसा करने की हिम्मत ही ना करें.

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