पहले बॉलीवुड अब एजुकेशन सिस्टम का हिंदू और देश विरोधी इस्तेमाल


किसी भी देश का विकास उसके एजुकेशन पर आधरित होता हैं. शिक्षा होगी तो विकास होगा वरना घर में बैठकर सिर्फ गोला बारूद बनाया जायेगा. ऐसे कई देश हैं जहा शिक्षा ना के बराबर हैं और वहा छोटे छोटे बच्चों के हाथ में AK-47 और मानव बम बनने की ट्रेनिंग दी जाती हैं.

भारत में शिक्षा का स्तर अच्छा हैं. लेकिन अब इसे बर्बाद किया जा रहा हैं. एक ऐसे तरीके से जो सरकार और सोशल मीडिया की पकड़ में नहीं आता तो वो ज्ञान छोटे छोटे बच्चों में ज़हर की तरह घोल दिया जाता हैं.

एक किताब जो की छठी क्लास की हैं और वेस्ट बंगाल की हैं जिसमे भगवन श्री राम को विदेशी बताया गया हैं. श्री राम भारत पर आक्रमण करने आये थे. राम शब्द की उतपत्ति रोमिंग शब्द से हुयी हैं उसलिए वो राक्षस हैं. इस पुस्तक के जो संपादक हैं वो शिरीन मोहम्मद हैं.

शिरीन मोहम्मद वही संपादक हैं जिसके ऊपर देश की आज़ादी में ब्रिटिश हुकूमत से लोहा लेने वाले खुदीराम बोस को आतंकवादी बताया हैं. मतलब इससे गिरी हुयी और घटिया हरकत कुछ हो ही नहीं सकती हैं.

अब इस बुक को लेकर जब बवाल मचा तो फैक्ट चेक वाले बस इस बात को सुनकर अपना फैक्ट्स वाला मुद्दा साफ़ कर गए की वेस्ट बंगाल के एजुकेशन डिपार्टमेंट ने ये बात कह दी की ऐसी कोई बुक नहीं हैं सिर्फ गलत बात हैं. मतलब पहले गलत चीज़ परोसो और जब वह पकड़ी जाये तब सारे सबूत गायब कर दो.

अंशुल सक्सेना ने भी एक ऐसी ही चीज़ शेयर की हैं जिसमे Ancademy का दोहरा चरित्र नज़र आ रहा हैं. Ancademy के द्वारा एक क्वेश्चन पेपर दिख रहा जिसमे जो सवाल पुछा गया हैं वो बेहद ज़हरीला हैं.

सवाल कुछ इस प्रकार है, “X नाम के एक शहर में मुस्लिम लोगों का एक समूह अपनी रैली निकाल रहा था। वे अपने नारे लगा रहे थे और अपना त्यौहार मना रहे थे। जब वे एक हिन्दू बहुल कॉलोनी की गलियों से गुजर रहे थे, तो क्षेत्र के हिन्दुओं ने उन पर पत्थरबाजी शुरू कर दी और दावा किया कि उन्होंने हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाई है। क्या ये दावा सही है?” इसका जवाब चुनने के लिए 3 विकल्प दिए गए। वो तीनों विकल्प हैं –

हाँ, उन्होंने शब्दों के द्वारा, यानी नारे लगा कर हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाई।
हाँ, उन्होंने दृश्यप्रस्तुति के द्वारा, यानी उस इलाके में रैली निकाल कर हिन्दुओं को धार्मिक भावनाओं को आहत किया।
नहीं, उनका इरादा किसी भी वर्ग के नागरिकों यानी हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने का नहीं था।

वैसे ये पहली बार नहीं है जब Unacademy को लेकर इस तरह का विवाद सामने आया हो। सितम्बर 2020 में UnAcademy कोचिंग सेंटर के एक शिक्षक वरुण अवस्थी को अपने एक वीडियो में छात्रों को ऐके-47 बंदूक उठाने के लिए उकसाते हुए पाया गया था। इससे पहले भी अनअकैडमी के एक शिक्षक ने ब्राह्मण को टारगेट करते हुए एक वीडियो पोस्ट किया था। वहीं एक अन्य शिक्षक ने राम मंदिर आंदोलन का मज़ाक उड़ाया था।

तो क्या Unacademy जैसी संस्थाएं समाज और देश में ज़हर घोलने का काम नहीं कर रही हैं. मतलब इन्हे इतनी फंडिंग मिलती हैं बिजनेस बढ़ाने के लिए. आज घर घर में Unacademy का इस्तेमाल किया जा रहा हैं. बच्चों तक इसकी पहुंच बढ़ गयी हैं. तो क्या एजुकेशन की जगह Unacademy का इस्तेमाल किसी और काम के लिए किया जा रहा हैं.

Unacademy ने माफ़ी तो मांग ली लेकिन इस तरह की चीज़े बार बार हो रही हैं तो सरकार को Unacademy पर एक जांच बैठानी चाहिए ताकि और भी चीज़े पता चल सकें.

What's Your Reaction?

hate hate
0
hate
confused confused
0
confused
fail fail
0
fail
fun fun
0
fun
geeky geeky
0
geeky
love love
0
love
lol lol
0
lol
omg omg
0
omg
win win
0
win

You may also like

More From: Politics

DON'T MISS