क्या सच में बॉलीवुड में कोरोना हैं या मामला कुछ और हैं ?


पिछले साल जब कोरोना की शुरुवात हुयी थीं तब होली के मौके पर एक खबर आई की कनिका कपूर कोरोना पॉजिटिव पाई गयी हैं. उस वक्त हर कोई कनिका कपूर को कोसने लगा. बॉलीवुड से भी बहुत से लोग ऐसे थे जो कनिका पर हमला करने लगे. चार महीने का संपूर्ण लॉक डाउन और इस लॉक डाउन के चलते कई लोग बर्बाद हो गए.

लॉक डाउन खुला तो किसी को समझ नहीं आ रहा था की ज़िंदगी को कैसे और कहा से समेटा जाएं. जैसे तूफ़ान के बाद सब तहस नहस हो जाता हैं वैसे लॉक डाउन के बाद भी था. फिर भी लोगो ने खुद को संभालना और समेटना शुरू किया. फिर कोरोना की वैक्सीन भी बनकर आ गयी. लगा अब जल्दी ही कोरोना से छुटकारा मिल जाएगा.

लेकिन ऐसा नहीं हो रहा हैं. हर रोज़ लाखों की संख्या में लोग कोरोना का शिकार बन रहे हैं. अब सवाल ये हैं की इसका जिम्मेदार कौन हैं? क्या लॉक डाउन इस समस्या का समाधान हैं? अगर लॉक डाउन, वैक्सीन, सेनेटाइजर, मास्क, दो गज की दुरी इतना सब होने के बाद भी कोरोना बढ़ रहा हैं तो क्यों बढ़ रहा हैं. इसका समाधान क्या हैं ?

सबसे बड़ी बात कोरोना के लिए सिर्फ आम इंसान को ही निशाना बनाया जा रहा हैं की उनकी गलतियों के चलते कोरोना फ़ैल रहा हैं. जबकि इसके सबसे बड़े जिम्मेदार तो हमारे देश की राजनीतिक पार्टीया ही हैं. अब सोचिये सोशल डिस्टन्सिंग की बात की जाती हैं लेकिन पश्चिम बंगाल, असम, केरल और तमिलनाडु ने क्या हो रहा हैं. लाखों की संख्या में भीड़ जमा की जा रही हैं. क्या राजनीतिक पार्टियों की भीड़ में कोरोना दम तोड़ देता हैं ?

हैरानी की बात ये भी हैं की जब लॉक डाउन खुला तो कोरोना के केस धीरे धीरे कम होते जा रहे थे. लेकिन जब लोगो को वैक्सीन लगना शुरू हुआ तो उसके बाद कोरोना का केस और भी बढ़ता जा रहा हैं. तो फिर वैक्सीन का मतलब क्या हैं? वैज्ञानिक बोलते हैं की कोरोना की वैक्सीन लगा लो लेकिन इसकी कोई गारंटी नहीं हैं की तुम्हे कोरोना नहीं होगा. तो फिर लोग वैक्सीन लगा ही क्यों रहे हैं? सिर्फ सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के लिए की देखो वैक्सीन लगवा ली हैं.

जिन जिन पोलिटिकल पार्टीज के लोगो ने कहा था वैक्सीन नहीं लगवाएंगे. कुछ ने ये भी कहा था की ये हराम हैं. लेकिन सबसे पहले उन्ही लोगो ने वैक्सीन लगवाई. एक वैक्सीन की कीमत 250 रूपये हैं. जिस तरह से कोरोना का केस बढ़ रहा हैं उस हिसाब से आनेवाले समय में देख लेना घर घर जाकर कोरोना का इंजेक्शन लगाया जायेगा.

और अचानक से बॉलीवुड में इतने केस क्यों बढ़ने लगे ? क्या बॉलीवुड के बहाने डराने का काम किया जा रहा हैं ? कोरोना साउथ इंडियन एक्टर्स को क्यों नहीं हो रहा हैं ? शूटिंग तो वो भी का रहे हैं. तीन चीज़े हमारे देश के लिए इस वक्त सबसे बड़ा खतरा हैं. राजनीतिक पार्टियां, बॉलीवुड और इस देश की मीडिया. कोरोना की बीमारी हैं इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता हैं. क्यूंकि जान पहचान में कई लोग इसका शिकार हो चुके हैं . लेकिन इन तीन चीज़ों के ऊपर तो बिलकुल भी भरोसा नहीं किया जा सकता हैं.

इतने सारे बॉलीवुड के कलाकार कोरोना का शिकार हो रहे हैं. लेकिन मौत किसी की नहीं हो रही हैं. सब के सब खुद से ही घर पर ठीक हो रहे हैं. कोरोना की बीमारी ओल्ड आगे वालों के लिए सबसे ज़्यादा खतरा हैं लेकिन अमिताभ बच्चन को कुछ नहीं होता. जबकि अमिताभ बच्चन को दुनिया भर की बीमारी हैं.

आमिर खान, अमिताभ बच्चन, ऐश्वर्या राय, अक्षय कुमार, भूमि पेडनेकर, विक्की कौशल, रणबीर कपूर, आलिया भट्ट, संजय लीला भंसाली, गोविंदा, आदित्य नारायण,सचिन तेंदुलकर, परेश रावल,कार्तिक आर्यन ऐसे तमाम बड़े नाम जो कोरोना वायरस का शिकार हो चुके हैं. अब आप सोचीये इतने बड़े बड़े लोगो को हो रहा हैं तो इनकी टीम में हर वक्त चालीस पचास लोग रहते हैं वो चालीस पचास लोगो किन किन लोगो से मिल रहे हैं और कहा तक बीमारी जा रही हैं इसका अंदाज़ा नहीं.

एजाज खान जिसे एनसीबी ने कुछ दिन पहले अरेस्ट किया था भी कोरोना का शिकार बन गया हैं. यानी एनसीबी की टीम भी अब कोरोना का शिकार बन जाएगी. अब एक बात और याद रखना कुछ दिन बाद बॉलीवुड से ड्रग्स वाला मामला भी खत्म हो जाएगा. ठीक वैसे ही जैसे सुशांत वाला मामला ख़त्म हो गया. एक केस को ख़त्म करना हैं दूसरा केस सामने लेकर आओ. और दर का बिजनेस सबसे बड़ा बिजनेस हैं. अगर कोरोना को लेकर हमारे देश की सरकारें चाहे वो केंद्र की हो या राज्य की इतनी गंभीर होती तो रैलियों में इतनी भीड़ नहीं जुटाई जाती.

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