बॉलीवुड पर मोदी सरकार का अब तक सबसे बड़ा हमला टूट जाएगी कमर | फिल्म बनाना मुश्किल बरबाद हो जाएगा बॉलीवुड


सुशांत सिंह राजपूत की मौत कितना बड़ा बदलाव लेकर आएगी ये किसी ने सोचा भी नहीं था. मोदी सरकार दिखाने का काम नहीं करती. पहले रूल्स बनाती हैं बाद में लागू कर देती हैं. फिर उस पर तुम अपना लाख सर फोड़ लो वो बदलने से रही. कई समय से हम देख रहे हैं की बॉलीवुड अपनी मनमर्जियां करता रहा हैं.

फिल्मो में सेक्स, ड्रग्स, जातिवाद, धर्मविरोधी चीज़े, देशविरोधी चीज़े और ना जाने क्या क्या चीज़े करती रही हैं. लेकिन अब सिनेमेटोग्राफ (अमेंडमेंट) एक्ट 2021 से बॉलीवुड समेत पूरे भारत के फिल्म उद्योग में खलबली है। फिल्म इंडसट्री इस सेंसरशिप के खिलाफ हैं. लगभग 1400 लोगो ने इसके खिलाफ आवाज़ उठाई हैं.

तो चलिए जाने ली हैं की ये हैं किया और कैसे काम करेगा.

इस अमेंडमेंट का मतलब है कि किसी फिल्म को एक बार सेंसर सर्टिफिकेट मिल जाए, फिर भी प्रोड्यूसर की टेंशन खत्म नहीं होगी। फिल्म पर दोबारा सेंसर और उसके आगे प्रतिबंध का खतरा हमेशा बना रहेगा।

मामला सिर्फ फिल्म मेकर्स का नहीं है। फिल्म देखने वालों के लिए भी है। फिल्म सर्टिफिकेशन के नए नियमों के मुताबिक फिल्म सेंसरशिप की तीन नई कैटेगरी और होंगी। 7+, 13+ और 16+ कैटेगरी। यानी इन एज ग्रुप्स के देखने लायक फिल्में। अगर सिनेमाघर में किसी को बच्चों की उम्र को लेकर शक हुआ तो आपको उनकी उम्र का सर्टिफिकेट भी दिखाना पड़ सकता है।

सरकार सिनेमेटोग्राफ एक्ट 1952 में बदलाव कर रही है। इस बिल को सिनेमेटोग्राफ (अमेंडमेंट) एक्ट 2021 कहा जा रहा है। नए प्रावधान के अनुसार किसी फिल्म को सेंसर सर्टिफिकेट मिल जाए, इसके बाद भी अगर सरकार को कोई शिकायत मिले तो फिल्म को पुन: समीक्षा के लिए उसे सेंसर बोर्ड के चेयरमैन को वापस भेजा जाएगा।

यानी फिल्म रिलीज़ के बाद अगर एक इंसान को भी फिल्म के किसी डायलॉग या सीन से शिकायत हैं तो वो सरकार को इसकी शिकायत कर सकती हैं. यानी फिम अगर देश के खिलाफ हैं. किसी धर्म के खिलाफ हैं. बच्चों को गलत तरीके से दिखाया गया. सेक्स को लेकर कुछ भी दिखाया गया.

विदेशी चीज़ो को लेकर खतरा, सार्वजनिक शांति, शिष्टता, नैतिकता का उल्लंघन, किसी की बदनामी हो रही है, अदालत का अपमान हो रहा है या किसी को भड़काने या उकसाने का काम हो रहा है, तो ऐसे में सरकार बोर्ड से उस फिल्म पर फिर विचार करने को कह सकती है।

मान लीजिये फिल्म रिलीज़ होती हैं और उसके दो तीन महीने के बाद किसी ने सरकार से शिकयत कर दी तो फिल्ममेकर्स के लिए मामला गड़बड़ हो जाएगा. हो सकता हैं की उस फिल्म के ऊपर आजीवन प्रतिबन्ध लगा दिया जाएं.

ऐसा होता है तो फिल्म के डिस्ट्रीब्यूटर, उसके सैटेलाइट राइट्स, ओटीटी राइट्स लेने वाले और प्रोड्यूसर, सब को करोड़ों का नुकसान भी हो सकता है। यानी फिल्ममेकर्स को पूरी लगाम अब सरकार के हाथों में होगी. यानी फिल्म बनाने के लिए अब सिर्फ क्रिएटिविटी नहीं चलेगी. सोचना होगा की कहीं ये सीन प्रॉब्लम तो नहीं कर सकती हैं.

बॉलीवुड का ये कहना हैं हम बापू के तीन बन्दर नहीं बन सकते हैं. हम इसके खिलाफ जायेंगे. अभिव्यक्ति की आज़ादी के खिलाफ हैं. मतलब अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर तुम कुछ भी दिखाओ किसी की भी भावना को ठेस पहुचाओ वो चलेगा लेकिन तुम्हारे ऊपर नकेल कसी तो रोना आ रहा हैं.

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