विकास और प्रदीप भंडारी का जाना अर्नब के लिए कितना नुकसान


सुशांत सिंह राजपूत के मामले से लेकर कंगना रनौत फिर किसान आंदोलन, पालघर जैसा मुद्दा पिछले एक साल में अर्नब गोस्वामी ने ना जाने कितने ही मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी. इन सभी मुद्दों में रिपब्लीक भारत की पूरी टीम ने पूरी ताकत के साथ अपना स्टैंड कायम रखा. लेकिन प्रदीप भंडारी और विकास शर्मा अर्नब गोस्वामी और पूरे रिपब्लीक भारत के लिए और हर मुद्दे पर मजबूती के साथ खड़े रहे.

लेकिन अब अर्नब के लिए कुछ ठीक नहीं चल रहा हैं. अर्नब थोड़े से थके हए नज़र आते हैं. वो कई मुद्दों पर बात तो करते हैं लेकिन पहले जैसी वो बात नज़र नहीं आ रही हैं. इसकी एक नहीं कई वजह हैं. सबसे बड़ी वजह ये हैं की आप किसी भी सरकार के सामने अपनी आवाज़ तो उठा सकते हैं लेकिन सरकार से ज़्यदा देर तक लड़ नहीं सकते हैं. ठीक उसी तरह जैसे पानी में मगरमच्छ से ज़्यदा देर तक कोई मुकाबला नहीं कर सकता हैं.

महाराष्ट्रा सरकार और अर्नब गोस्वामी के बीच जिन जिन मुद्दों को लेकर युद्ध चल रहा था उन सभी मुद्दों में अगर आज के हिसाब से नज़र डाली जाएं तो जीत महाराष्ट्र सरकार की ही हुयी हैं. जेल से छूटने के बाद अर्नब ने भले ही एक ललकार भरी थीं. लेकिन कहीं ना कहीं उन्हें एक लिमिट में रहने के लिए सुप्रीम कोर्ट और महाराष्ट्र सरकार ने कहा हैं.

यही वजह हैं जिसके चलते अर्नब गोस्वामी अब सुशांत का कोई मुद्दा उठा नहीं पा रहे हैं और देखा देखी बाकी न्यूज़ चैनल भी वही कर रहे हैं. वरना एक समय ऐसा था की टीआरपी के चक्कर में सारे न्यूज़ चैनल दिन रात सुशांत केस को कवर कर रहे थे.

कुछ दिन पहले रिपब्लीक भारत के एंकर विकास शर्मा की मौत हो गयी. बात ये सामने निकलकर आई की उन्हें कोरोना हुआ था. ठीक होकर वो लौट भी आये थे लेकिन कोरोना के चलते उन्हें दिल का दौरा भी पड़ा और उनकी मौत हो गयी. लेकिन कुछ न्यूज़ वेबसाइट पर ये खबर आई की उनकी पत्नी के चलते उन्हें दिल का दौरा पड़ा हैं. उनकी पत्नी ने के तरह के केस विकास पर कर दिए थे. जिसके चलते काम ख़त्म होने के बाद भी वो घर नहीं जाया करते थे. अब इनमे कितनी सच्चाई हैं फिलहाल वो तो नहीं पता लेकिन विकास शर्मा इस दुनिया में नहीं हैं ये बात सच हैं.

अब प्रदीप भंडारी उन्होंने भी अर्नब का साथ छोड़ दिया हैं. जिस रिपब्लीक भारत ने प्रदीप को मीडिया जगत में पहचान दिलाई आखिर उसे छोड़ने की नौबत क्यों आ गयी. कुछ लोगो का कहना हैं की प्रदीप अपने न्यूज़ पोर्टल जन की बात को आगे बढ़ाना चाहते हैं. तो कुछ का कहना हैं की मुंबई पुलिस की FIR के चलते वो काफी परेशान हो गयी थे जिसके चलते उन्हें इस्तीफा देना पड़ा.

और ये दूसरी वजह सही भी लग रही हैं जब वो रिपब्लीक भारत का हिस्सा नहीं रहेंगे तो रिपब्लीक भारत पर हुए FIR से ज़्यदा मतलब नहीं रह जाएगा. हालाँकि उन्हें अभी भी मुंबई पुलिस को जवाब देना होगा. लेकिन एक यकीन हैं की शायद वेस्ट बंगाल इलेक्शन के दौरान प्रदीप भंडारी अर्नब के साथ दिखाई पड़ें.

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