अपने दूसरे बाप को भूल गया अमिताभ बच्चन | ये बोलकर रो पड़े महमूद साब | एक और मतलब भरी कहानी


फ़िल्मी इंडसट्री में भले ही लोग अमिताभ बच्चन को महानायक मानते हो लेकिन सिर्फ एक्टिंग कर लेने से कोई महान नहीं बन जाता. अमिताभ पर मतलबी होने के कई इलज़ाम हैं. बॉम्बे तो गोवा फिल्म में महमूद राजीव गाँधी को लेना चाहते थे. लेकिन राजीव गाँधी ने कहा की नहीं मेरे दोस्त अमिताभ बच्चन को ले लो. मै कलाकार नहीं हूँ. राजनीती से हूँ.

राजीव गाँधी के कहने पर अमिताभ बच्चन को महमूद ने मौका दिया. यहाँ तक की कई फिल्मे दिलाई. महमूद साब ने एक बार अपने इंटरव्यू में कहा था की अमित ने फिल्म इंडसट्री में पचीस साल पूरे किये अल्लाह करे वो और पचीस साल पूरे करें. एक समय ऐसा था जब मैंने उसे काम दिलाया. अपने घर में रखा. अपने बेटे की तरह मानता था.

अमिताभ के दो बाप हैं एक जिसने उसे जन्म दिया और पाला दूसरा मैं जिसने उसे काम दिलाया और पैसे कमाना सिखाया.

महमूद की ज़िंदगी में एक समय ऐसा भी आया जब उनके पास काम नहीं था. लेकिन उस दौर में भी महमूद ने अमिताभ बच्चन से मदद नहीं मांगी. उनका कहना था की अमित के पास काम मांगने जाऊंगा तो अच्छा नहीं लगेगा. मैंने उसे काम दिया अब काम मानूंगा तो अच्छा नहीं लगेगा.

महमूद का कहना था की अमित मेरी बहुत इज्जत करता हैं जहा मेरी आवाज़ सुनेगा खड़ा हो जायेगा. हालांकि अमिताभ कुछ दिन बाद बदल गए. एक बार अमित के पिता हरिवंश राय बच्चन कहीं गिर गए थे तो मैं उनसे मिलने उनके घर पर गया था.

लेकिन इस घटना के एक हफ्ते बाद मेरी ओपन हार्ट सर्जरी हुयी. जहा मेरा ओप्रशन हुआ था अमित अपने पिता को लेकर उसी हॉस्पिटल में आता था. जहा मै एडमिट था. एक ही हॉस्पिटल में अपने सगे बाप से मिलने आता था लेकिन अपने दूसरे बाप से मिलने नहीं आया.

इस बात को बोलते हुए महमूद का गाला भर आया. उनकी आँखे नम हो गयी. उनका कहना था की अमित ने गेट वेल सून का एक कार्ड तक नहीं भेजा. एक फूल तक नहीं भेजा. उसे पता था भाईजान उसी हॉस्पिटल में हैं लेकिन वो मिलने नहीं आया. उस वक्त मुझे लगा असली बाप असली होता हैं और नकली बाप नकली होता हैं.

मै उसका नकली बाप हूँ इसलिए कोई बद्दुआ नहीं दूंगा लेकिन उम्मीद करता हूँ वो किसी और के साथ ऐसा नहीं करेगा. ये कहते हुए महमूद रोने लगे.

ये बात अमिताभ बच्चन ने खुद कहीं थीं की जब वो लगातार फ्लॉप हो रहे थे तब ओम बोरिया बिस्तर बाँध घर जाने की तैयारी कर रहे थे तब महमूद ने उन्हें अपने घर में रखा. बेटे की तरह माना. फिल्मे दिलाई. पैसे कमाना सिखाया. डांस का नाम सुन अमिताभ घबरा जाते थे लेकिन महमूद ने ही उन्हें डांस करना सिखाया.

अमिताभ बच्चन के ऐसे ना जाने कितने किस्से हैं और कितनी ही स्वार्थ भरी कहानीया होंगी जो हमें नहीं पता लेकिन धीरे धीरे सामने आ रही हैं.

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