हिंदुस्तान में मुझे डर लगता हैं ! आखिर नसीरुद्दीन शाह ने किस जिन्न को बोतल में बंद करने की बात कहीं ?


पिछले कुछ वर्षों में अचानक से ही बॉलीवुड कलाकारों को भारत में रहने से डर लगने लगा हैं. ! आखिर इसका कारण क्या हैं? आमिर खान और प्रकाश राज तो इतने डर गए हैं की उन्हें रातों की नींद तक नहीं आती हैं. अब एक इंटरव्यू के दौरान अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने भी कह दिया हैं की भारत में उन्हें डर लगता हैं. उन्हें डर लगता हैं की देश में जो माहौल चल रहा हैं कहीं उनके बच्चों को किसी गली में घेर कर न पूछ लिया जाए कि तुम हिंदू हो या मुस्लिम. हिंदू-मुस्लिम मामले पर बोलते हुए नसीरुद्दीन शाह ने कहा कि ये एक जहर की तरह जो जहर की तरह फैल रहा है. इस जिन्न को बोतल में बंद करने की जरूरत है.

अब इस बात को लेकर सोशल मीडिया पर उनकी जमकर खिल्ली उड़ाई जा रही हैं. मध्यप्रदेश के बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय ने कहा की #नसीरुद्दीनशाह को अगर इतना ही डर लग रहा है तो उन्हे #महागठबंधन में चले जाना चाहिए, आजकल सारे डरे हुए वहीं जा रहे हैं. वही बीजेपी के प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा की, ‘जब 1993 मुम्बई बम ब्लास्ट हुए तो #नसीरुद्दीनशाह को डर नहीं लगा. 26/11 का मुम्बई आतंकी हमला हुआ तो #NaseeruddinShah को डर नहीं लगा. यह डर तो आपको 1984 के सिख दंगो के बाद लगना चाहीये था. यह डर आपको जब कश्मीरी पंडित मारे गए तब क्यों नहीं लगा?
कुछ भी कहो ड्रामा अच्छा कर लेते हैं.

आखिर नसीरुद्दीन शाह ने ऐसा क्या कहा जो इतना बवाल खड़ा हो गया हैं. चलिए सुनते हैं ”ये जहर फैल चुका है और दोबारा इस जिन्न को बोतल में बंद करना बड़ा मुश्किल होगा खुली छूट मिल गई है कानून को अपने हाथों में लेने की. कई इलाकों में हम लोग देख रहे हैं कि एक गाय की मौत को ज़्यादा अहमियत दी जाती है, एक पुलिस ऑफिसर की मौत के बनिस्बत. मुझे फिक्र होती है अपनी औलाद के बारे में सोचकर. क्योंकि उनका मजहब ही नहीं है. मजहबी तालीम मुझे मिली थी, रत्ना (रत्ना पाठक शाह-अभिनेत्री और नसीर की पत्नी) को बिलकुल नहीं मिली थी, वो एक लिबरल परिवार से आती हैं. हमने अपने बच्चों को मजहबी तालीम बिलकुल नहीं दी. क्योंकि मेरा ये मानना है कि अच्छाई और बुराई का मजहब से कुछ लेना-देना नहीं है.

अच्छाई और बुराई के बारे में जरूर उनको सिखाया. हमारे जो बिलीफ हैं, दुनिया के बारे में वो हमने उन्हें सिखाए. कुरान-शरीफ की एक-आध आयत याद ज़रूर करवाई क्योंकि मेरा मानना है उससे तलफ्फुज़ सुधरता है. उसके रियाज़ से. जिस तरह हिंदी का तलफ्फुज़ सुधरता है रामायण या महाभारत पढ़के. खुशकिस्मती से मैंने बचपन में अरबी पढ़ी थी इसलिए कुछ आयतें अब भी याद हैं. उसकी वजह से मेरे खयाल से मेरा तलफ्फुज़ है. तो फिक्र मुझे होती है अपने बच्चों के बारे में कि कल को उनको अगर भीड़ ने घेर लिया कि तुम हिंदू हो या मुसलमान, तो उनके पास तो कोई जवाब ही नहीं होगा. इस बात की फिक्र होती है कि हालात जल्दी सुधरते तो मुझे नज़र नहीं आ रहे. इन बातों से मुझे डर नहीं लगता गुस्सा आता है. और मैं चाहता हूं कि राइट थिंकिंग इंसान को गुस्सा आना चाहिए डर नहीं लगना चाहिए हमें. हमारा घर है हमें कौन निकाल सकता है यहां से.”

What's Your Reaction?

hate hate
0
hate
confused confused
0
confused
fail fail
0
fail
fun fun
0
fun
geeky geeky
0
geeky
love love
0
love
lol lol
0
lol
omg omg
0
omg
win win
1
win

You may also like

More From: News

DON'T MISS