अब्बा हारमोनियम बजाते थे? वाले हारमोनियम चाचा पाकिस्तानी कॉमेडियन मोईन अख्तर की पूरी कहानी


तो अब्बा हारमोनियम बजाते थे?

नहीं, अब्बा हारमोनियम खाते थे।

ये सिर्फ दो लाइन नहीं हैं बल्कि सोशल मीडिया पर इस लाइन ने आग लगा दी हैं। हर जगह मीम्स की बौछार हो रही हैं। क्या बच्चा क्या जवान और क्या बूढा। सबकी जुबां पर बस एक ही डायलाग।

तो अब्बा हारमोनियम बजाते थे?

नहीं, अब्बा हारमोनियम खाते थे।

लूज़ टॉक के नाम से मशहूर इस पाकिस्तानी शो में दो लोग नज़र आ रहे हैं। एक जो इंटरव्यू ले रहे हैं यानी की अनवर मक़सूर और दुसरे जो इंटरव्यू दे रहे हैं, अरे वही जिनके अब्बा हारमोनियम खाते थे। यानी की मोईन अख्तर। जो हारमोनियम वाले चाचा के नाम से मशहूर हो चुके हैं। जिन्हे हारमोनियम बजाना तो नहीं आता हैं लेकिन कॉन्फिडेंस इतना की इंटरव्यू देने पहुंच गए हैं।

लेकिन आपको जानकर बेहद दुःख होगा की हारमोनियम वाले चाचा अब इस दुनिया में नहीं रहे। २४ दिसम्बर, १९५० में जन्मे मोईन अख्तर २२ अप्रैल,२०११ में हमेशा के लिए दुनिया छोड़ गए। मोईन अख्तर कोई साधारण शक्श नहीं थे । वो पाकिस्तान के बहुत बड़े कॉमेडियन, टेलेविज़न, फिल्म स्टार, होस्ट, लेखक और गायक रह चुके हैं। मनोरंजन की दुनिया में आने का इनका किस्सा भी कोई साधारण नहीं रहा हैं। जब इनके अब्बू को पता चला की मोईन एक्टिंग की दुनिया में कदम रखना चाहते हैं तो उन्होंने मोईन को अपने पास बुलाया और बेल्ट से तबियत भर कुटाई की। मोईन के अब्बू को लगा की शायद उनकी इस मार से मोईन अब एक्टिंग की दुनिया के बारे में सोचेगा भी नहीं लेकिन हुआ इसका ठीक उल्टा। 6 सितम्बर १९६६ को मोईन जब स्टेज पर चढ़े तब उन्होंने इस तरह से लोगो को हंसाया की ऑडियंस उन्हें स्टेज से नीचे उतरने ही नहीं दे रही थीं।

मोईन अख्तर सिर्फ कॉमेडियन भर नहीं थे बल्कि सामाजिक मुद्दे पर कटाक्ष करना और सरकार की नीतियों पर व्यंग कसना भी उन्हें बखूबी आता था। सिर्फ हंसाना ही मोईन अख्तर का मकसद नहीं था बल्कि गरीब बच्चों के लिए फंड्स जमा करना, पैसे देकर दोस्तों की मदद करना और उनकी मदद करने में अपनी गाडी को बेच देने के मामले में भी वो कभी नहीं कतराते थे। उन्होंने ऐसे -ऐसे लोगो की मदद की थीं जिन्हे वो जानते तक नहीं थे।

अनवर मक़सूद के साथ मिलकर उन्होंने लूज़ टॉक के कूल ४०० एपिसोड किये जिसने लोगो को जमकर हंसाया। 1996 में पाकिस्तान की सरकार ने उन्हें प्राइड ऑफ परफॉरमेंस नाम का सम्मान दिया था। 2011 में सितारा ऐ इम्तियाज़ से मोईन अख्तर को नवाज़ा गया। लंदन के मैडम टुसॉड्स में भी उनका पुतला लगाने की बात चली लेकिन परिवार वालों ने धर्म का हवाला देकर पुतला लगाने से इंकार कर दिया क्यूंकि इस्लाम में मूर्तिकारी किसी भी प्रकार की हराम है। अगर मैडम टुसॉड्स में उनका पुतला लग जाता तो वह पाकिस्तान के पहले ऐसे सेलिब्रिटी बन जाते जिनका पुतला वहां लगा होता।

एक शो के दौरान पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ ने मोईन अख्तर के पिता से कहा, की आपका बेटा इस देश के लिए बेहद मूल्यवान धरोहर है।

सच में इंसान के रूप में तो हर कोई जन्म लेता हैं लेकिन इंसान का असली जीवन वही जीता हैं जो लोगो की मदद भी करना जानता हैं और रोटी हुए चेहरों पर अपनी कलाकारी से हंसी के गुब्बारे भी फोड़ना जानता हैं।

तो अब्बा हारमोनियम बजाते थे? नहीं, अब्बा हारमोनियम खाते थे ! वाले हारमोनियम चाचा मोईन अख्तर की पूरी कहानी यहाँ देखें :-

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