83 फ्लॉप तो क्या ? प्यार तो मिल रहा है ना ? पैसे मायने नहीं रखते हैं.


83 फ्लॉप 83 फ्लॉप ऐसा बोल बोलकर मैंने कई वीडियोस बना लिए हैं. अब सोचता हूँ की बंद कर दूँ 83 फ्लॉप पर वीडियो. लेकिन फिर कोई कहीं से निकलकर आता हैं और कहता हैं की फिल्म ये हैं वो हैं तो बनाना पड़ता हैं. अब कबीर खान जो इस फिल्म के डायरेक्टर हैं उन्होंने जो बात कहीं उसे सुनकर हंसी रूक ही नहीं रही हैं.

कबीर खान का कहना हैं की 83 फ्लॉप नहीं हमारे लिए सुपरहिट हैं क्यूंकि जनता का प्यार हमें मिल रहा है. ऐसा प्यार हमें कभी नहीं मिला. ये एक भावना हैं. 83 एक उत्सव हैं इसे सेलिब्रेट करना चाहिए. कमाई मायने नहीं रखती हैं.

सिनेमाघरों के भीतर ऐसा ही माहौल दिखता है जैसा कि क्रिकेट स्टेडियम में देखने को मिलता रहा है। लोग इसका आनंद उठा रहे हैं और खूब तालियां बजा रहे हैं। सीटियां मार रहे हैं। बस ये माहौल लोगों तक ढंग से पहुंच नहीं पा रहा,

बताईयें ये ऐसा उत्सव हैं की कोई इस उत्सव का हिस्सा भी नहीं बन रहा. कबीर खान को ना जाने कहा से सीटी की आवाज़ आ गयी. भाई वो सिटी ऑडियंस नहीं मार रही. सिनेमाघर का वॉचमन मार रहा हैं या फिर बगल वाले स्क्रीन पर पुष्पा और स्पाइडर मन को देख लोग सिटी मार रहे हैं.

अगर कोई ये कहे की कमाई मायने नहीं रखती हैं तो ये बात हज़म नहीं होती हैं. मतलब वो इंसान माया मोह से दूर हैं. और जो माया मोह से दूर हैं उसे फिल्म बनाने की क्या ज़रूरत हैं. एक उदहारण भी दे दिया की कपिल देव ने कहा था की जब हमने 83. का वर्ल्ड कप जीता था तब उत्सक था लेकिन हमारे पास पैसे नहीं थे.

तुम भाई मुगलो को लेकर फिल्म बनाओ उन्हें महान दिखाओ क्यूंकि हमारे देश में कुछ लोग हैं जो मुगलो पर बनी फिल्म देख कर खुश हो जाते हैं.


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