हिंदू धर्म से बॉलीवुड को इतनी नफरत क्यों हैं.


आज़ादी के बाद से लेकर अब तक हिंदू धर्म के खिलाफ ऐसी कई फिल्में बनाई गयी जिसे हम सभी ने देखा और पसंद भी किया. लेकिन समझ अब जाकर आ रही हैं और वो इसलिए की सोशल मीडिया के आने के बाद से जो जागरूकता हिंदू धर्म में आई हैं वो आनेवाले दौर के लिए बेहद अच्छी हैं. अक्सर पुरानी फिल्मो में आपने देखा होगा की एक ब्रह्मण को एक कपटी और ढोंगी के तौर पर दिखाया जाता रहा हैं. ब्रह्मण पूजा पाठ के नाम पर गरीबों को बेवक़ूफ़ बनाते हैं इस तरह की बात दिखाई जाती थीं.

छोटे जाति के लोग पर बड़े जाति वाले किस तरह से अत्याचार करते थे बस उसे ही दिखाया गया था. जबकि हमारे समाज का जो वास्तविक ताना बाना था जिसमें ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र इन सभी को इनके काम के हिसाब से दिखाया गया था ना की ऊंच नीच और जातिगत व्यवस्था के भेदभाव को दिखाने की कोशिश की गयी थीं.

ये जो वर्ण व्यवस्था थीं ये ब्रिटिश हुकूमत के दौरान नहीं थीं जितनी आज़ादी के सत्तर सालों में सिर्फ राजनीतिक मंशा को पूरी करने के लिए विभाजित कर दी गयी. और ये विभाजन इसलिए था की हिंदू मत बंट जाएँ और हिंदू टूटकर बिखर जाएं. आज आपने देखा होगा की विपक्ष दलित का मुद्दा उठाता रहा हैं लेकिन इन सत्तर सालों में विपक्ष ने दलितों को ऊपर उठाने की जगह सिर्फ नीचे ही धकेलने का काम किया हैं.

आप भारत के किसी भी शहर में चले जाओ. मान लो एक चाय की दूकान हैं. जिसे एक छोटे जाति का इंसान चला रहा हैं जिसे गाँव देहात में आप दलित वर्ग की केटेगरी में डाल देते हो लेकिन उसी की दूकान पर चाय पीने के लिए हर जाती और धर्म के लोग आते हैं. वहा तो लोग ये नहीं पूछते हैं की ये किस जाति वाले की दूकान हैं. लेकिन यही चीज़ गाँव देहात में लोगो को आपस में बांटकर रख देती हैं.

हिंदू धर्म को आपस में बांटने के लिए हमारी बॉलीवुड ने बहुत बड़ा काम किया हैं. आपने अमिताभ बच्च्चन की फिल्म दीवार देखी होगी जहां ये दिखाया गया की अमिताभ बच्चन पूरी ज़िंदगी मंदिर की सीढ़ियां नहीं चढ़ते हैं उन्हें नास्तिक दिखाया गया हैं . लेकिन बिल्ला नंबर 786 से उन्हें बहुत प्रेम हैं. जब तक वो बिल्ला उनके पास होता हैं उनकी लाइफ में सब कुछ अच्छा चल रहा होता हैं. यहाँ तक की गोलियां भी उनका सीना छलनी नहीं कर पाती हैं. लेकिन जैसे ही वो 786 नंबर का बिल्ला उनसे दूर होता हैं उनकी मौत हो जाती हैं वो भी कहाँ मंदिर में. और इस फिल्म को लिखा था सलीम खान और जावेद अख्तर ने.

सलमान खान की बजरंगी भाईजान देख लो. फिल्म का पूरा नाम ही गलत हैं. बजरंग बलि को भाईजान बता दिया. यही चीज़ आप अगर किसी और धर्म के साथ करके देखो फिर रिजल्ट क्या आएगा वो आप समझ ही सकते हो. पूरा का पूरा शहर जला दिया जायेगा और देखा जाये तो दूसरे धर्म के लोग इस मामले में ये ठीक करते हैं तभी तो बॉलीवुड उनके खिलाफ इस तरह की फिल्म नहीं बना सकता हैं लेकिन यही काम अगर हिंदू धर्म के लोग कर दें तो देश में असहिष्णता फ़ैल जाएगी.

आमिर खान की पिके देख लो पूरी फिल्म हिंदू धर्म के खिलाफ थीं. भगवान शिव के रूप में एक किरदार को वाशरूम में दिखाया जाता हैं. फिर उसे आम जनता के बीच दौड़ाया जाता हैं. भगवान् शिव का मज़ाक उड़ाया जाता हैं. शिवलिंग पर दूध चढाने को फालतू की बर्बादी की तरह दिखाया जाता हैं. एक सीन में आमिर खान ये डायलॉग कहता हैं की जो डरता हैं वो मंदिर जाता हैं जबकि खुद आमिर खान रियल लाइफ में मक्का मदीना की यात्रा पर जाते हैं. जान भी चाहिए उसमे गलत नहीं हैं लेकिन अपनी फिल्म में हिन्दू धर्म से इतनी नफरत क्यों फैला रहे हों. अनुष्का शर्मा जो एक हिंदू लड़की के किरदार में थीं उन्हें एक पाकिस्तानी मुस्लिम लड़के से प्रेम करते दिखाया जाता हैं. यानी पाकिस्तान के लोग अच्छे हैं और भारत में जो हिंदू धर्म के बाबा है वो सब के सब गलत हैं वो प्यार और मोहब्बत के खिलाफ हैं.

आप परेश रावल की ओह माय गॉड देख लीजिये पूरी फिल्म हिंदू धर्म के खिलाफ हैं. आप पाताललोक वेब सीरीज देख लीजिये जहां पर एक साधु को मंदिर में बीफ खाते हुए दिखाया जाता हैं. पाताललोक वेब सीरीज अनुष्का शर्मा प्रोडक्शन के तहत बनी थीं जिसमें हिंदू और सिख धर्म को गलत तरीके से दिखाया गया हैं.

आप रेड लेबल का विज्ञापन देख लो जहां एक मुस्लिम लेडी के घर में एक हिंदू चाय पीने के लिए हिचकिचाता हैं लेकिन चाय की खुशबू इतनी अच्छी थीं की वो सारे बंधन तोड़कर चाय पीने चला जाता हैं. इस विज्ञापन में ये दिखाने की कोशिश की गयी की हिन्दू धर्म के लोग मुस्लिम धर्म से नफरत करते हैं लेकिन चाय बढ़िया बनी हैं इसलिए हिन्दू सब कुछ भूलकर चाय पीने चला जाता हैं.

अभी तनिष्क ने एक विज्ञापन बना दिया जो सीधे सीध लव जिहाद को प्रमोट करता हैं. जब हिंदू धर्म ने इसका विरोध किया तो चेतन भगत जैसे एक घटिया लेखक ने ये कह दिया की जो ज्वेलरी खरीद नहीं सकते वो लोग ही इसका विरोध कर रहे हैं. तो भैया दिवाली के समय और शादी के टाइम पे तुम्हारे पिताश्री ज्वेलरी खरीदने आते हैं. तनिष्क का शेयर इसके बाद स्टॉक मार्किट में बहुत बुरी तरह गिर पड़ा. और अभी दिवाली का टाइम तो बाकी ही हैं.

नवरात्री में एरोस नाउ ने जिस तरह से नवरात्री को गलत ढंग से अपने विज्ञापन में पेश किया की वो कहीं से भी सही नहीं हैं.

बॉलीवुड में जो फिल्में पिछले ७० साल में बनी हैं उसमें 74 प्रतिशत फिल्मों में सिख धर्म यानी सरदार भाईयों को एक मज़ाक के तौर पर दिखाया गया हैं. ५८ % प्रतिशत फिल्मों में जो राजनेता गलत काम करते हैं भर्स्ट हैं. खून कत्ल करते हैं उनके नाम हिंदू ब्रह्मण से शुरू होते हैं.

६२ प्रतिशत के वो हिंदू जो वैश्य की केटेगरी में आते हैं बिजनेस करते हैं उन्हें लालची, कंजूस की तरह दिखाया गया हैं.

लेकिन ८४ प्रतिशत मुसलामानों को बॉलीवुड की फिल्म में ईमानदार, धर्म पर आस्था रखनेवाला, नेक दिल इंसान दिखाया गया हैं. अगर मुस्लिम को किसी फिल्म में विलेन दिखाया गया हैं तो उन्हें एक अच्छे किरदार में दिखाया गया उनका गुणगान किया गया हैं. जैसे की शाहरुख़ खान की रईस को देख लो. श्रद्धा कपूर की हसीना पार्कर देख लो. अजय देवगन की हाजी मस्तान के जीवन पर आधारित फिल्म वन्स अपॉन ऐ टाइम इन मुंबई को देख लो. वास्तव फिल्म में परेश रावल जो अंडरवर्ल्ड से जुड़े हैं लेकिन एक नेक दिल मुस्लिम इंसान हैं जो अंडरवर्ल्ड के लोगो की मंडावली कराते हैं.

वही हिंदू धर्म के किरदार को विलेन की तरह दिखाया जाता हैं. बेवज़ह उनके माथे पर लाल टिका लगाया जाता हैं. वास्तव का रघु, सरकार का अमिताभ बच्चन, कारन अर्जुन में अमरीश पूरी. दबंग २ में प्रकाश राज, मर्जावा में रितेश देशमुख, मदर इंडिया में सुखी लाला को एक ब्रह्मण के कपटी किरदार में. ऐसी बहुत सारी फिल्में हैं जिसमें लाल टिका लगाकर हिंदू धर्म को बदनाम किया गया.

एक और रिसर्च की गयी थीं जिसमें 94 प्रतिशत स्कूली बच्चे ये मानते हैं की बॉलीवुड अपनी फिल्मों में जो दिखाता हैं वो सब सच हैं. यहाँ तक की एक शब्द हिंदू टेरर को बार बार इस्तेमाल किया जाता हैं. सेक्रेड गेम्स में तो हिंदू धर्म की पूरी की पूरी धज्जिया ही उड़ा दी गयी हैं.

जो लोग ये सोचते हैं की भारत मुस्लिम धर्म के खिलाफ हैं तो वो लो गए भी जान ले की एक मुस्लिम देश अफगानिस्तान में जो मुस्लिमों के हाथों ही बर्बाद कर दिया गया वहा का पार्लियामेंट एक हिंदू देश बनवाता हैं.

बॉलीवुड सिर्फ यही तक नहीं रुकता हैं. हिंदू रिलिजन को बदनाम करने के लिए वो उन सड़क छाप कॉमेडियंस को भी बढ़ावा देता हैं उनके साथ खड़ा रहता हैं ताकि वो अपनी सड़ी हुयी कॉमेडी के ज़रिये हिंदू धर्म का मज़ाक बना सकें. आज की तारीख में हिंदू धर्म बहुत ही सॉफ्ट टारगेट हैं पहले बदनाम करो फिर माफ़ी मांग लो और बात वही खत्म.

इतने सालो से बॉलीवुड लगातार हमें गलत चीज़े परोसता रहा हैं और आज जब अर्नब गोस्वामी ने इस नशेड़ी और देशद्रोही बॉलीवुड पर शिकंजा कैसा तो इनकी औकात सामने आ गयी. ये एकदम से बिलबिला उठे हैं. इनकी ब्रांड वैल्यू एकदम से खत्म हो गयी हैं. देखो हमें मुस्लिम धर्म और उनसे कोई शिकायत नहीं हैं हमारे भी कई दोस्त उसी धर्म से आते हैं. लेकिन तुम बार बार लगातार एक ही धर्म को टारगेट करते रहोगे तो समझ लो बॉलीवुड वालों तुम्हे और भी बुरे दिन देखना बाकी हैं.

लोग बोलते हैं की हिंदू धर्म के खिलाफ कुछ दिखा दिया तो कौन सा पहाड़ टूट पड़ा. तो उन्हें एकबात याद दिला दूँ की मणिरत्नम की एक फिल्म आई थीं बॉम्बे जिसमें एक मुस्लिम लड़की को हिंदू लड़के के साथ प्यार करते और फिर शादी करते दिखाया गया था. इस फिल्म को लेकर मणि रत्नम को काफी धमकियां दी गयी. फिल्म के निर्माता के घर पर हमला भी किया गया.

हिंदू धर्म के विभाजन के लिए खुद हिंदू भी जिम्मेदार हैं. कभी राजनीती के लिए तो कभी एंटरटेनमेंट के लिए. एक आखिरी बात ज़रूर कहूंगा की हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई किसी भी धर्म के खिलाफ ऐसी कोई फिल्म नहीं बनाई जानी चाहिए जो उनकी भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर सकें. अगर कोई ऐसा करता है तो उन फिल्म बनाने वालो पर कड़ी से कड़ी करवाई होनी चाहिए ना की दो चार बाते बोलकर छोड़ देना चाहिए.

देखिये बॉलीवुड चलता हैं अंडरवर्ल्ड और पाकिस्तान से. तो जो चीज़े भारत के खिलाफ हो. भारत में आग लगा दें. भारत का नाम दुनिया में बदनाम कर दें तो ऐसी चीज़ें बनाने के लिए अंडरवर्ल्ड और पाकिस्तान हमेशा ही ये काम करते रहेंगे.

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