सूर्यवंशी में मुस्लिम को क्यों दिखाया नेगेटिव? पत्रकार को रोहित शेट्टी ने दिखा दी औकात


बॉलीवुड में कई ऐसी फिल्में बनी हैं जिसमे हिन्दू धर्म के किसी किरदार को फिल्म में विलेन बनाया जाता हैं. तब हमारे देश के पत्रकारों को और राजनीती से जुड़े विपक्ष को कोई प्रॉब्लम नहीं होती हैं. इनके लिए सब ठीक रहता हैं. लेकिन सूर्यवंशी में विलेन जो की एक पाकिस्तानी आतंकवादी हैं और मुस्लिम किरदार में हैं तो हमारे देश के कई पत्रकारों को बुरा लग गया.

गुड मुस्लिम बेड मुस्लिम की बात होने लग गयी. इंटरव्यू के दौरान जब इस पत्रकार ने फिल्म में ‘अच्छे मुस्लिम’ और ‘बुरे मुस्लिम’ के सीन को लेकर आपत्ति जताई तो रोहित शेट्टी ने उस पत्रकार को उसकी सही जगह बता दी.

रोहित शेट्टी ने भी जवाब देना शुरू किया की उनकी पिछली तीन फिल्मो में विलेन हिन्दू थे तब किसी को कोई प्रॉब्लम क्यों नहीं हुयी. फिल्म लिखते समय किसी जाति या धर्म के एक्टर को विलेन बनाने पर कोई विचार नहीं किया जाता.

रोहित ने कहा सिंघम में जयकांत शिकरे हिंदू हैं. सिंघम रिटर्न्स और सिम्बा में हिंदू विलेन थे. सिंबा में ध्रुवा रानाडे एक मराठी हैं। जब इन फिल्मों में तीनों विलेन ही हिंदू थे तब समस्या क्यों नहीं थी?

अब अब एक पाकिस्तानी आतंकवादी को फिल्म में दिखा रहे तो उसकी कास्ट क्या होगी ? हम कास्ट की बात नहीं कर रहे हैं. लेकिन कुछ लोगो को इसमें प्रॉब्लम हो रही हैं. एक बुरे और अच्छे इंसान को कास्ट से क्यों जोड़ा जा रहा है? हम मेकर्स होकर ऐसा नहीं सोचते तो आप क्यों सोच रहे.

रोहित ने कहा की मै अपनी ऑडियंस को जानता हूँ और वो इस बात का ध्यान रखते हैं कि उनकी भावनाएं आहत ना हों. कंट्रोवर्सी किसी भी चीज पर हो सकती है, मैं सिर्फ अपनी टारगेट ऑडियंस को कंफर्टेबल महसूस कराने पर फोकस करता हूं.

वैसे इन पत्रकारों को तब प्रॉब्लम नहीं होती जब हिन्दू धर्म पर खुले आम टारगेट किया जाता हैं. अब तो कांग्रेस के लोग मुगलो को महान बताने के साथ दयालु और अच्छे दिल वाला बड़े दिलवाला तक बता रहे हैं. पूरा बचपन ख़राब हो गया सिर्फ अकबर, बाबर, औरंगज़ेब का चुतियापा पढ़ने में. कब पैदा हुआ कब मारा. अच्छा हुआ मर गया जितना जीता दुनिया को उतना परेशान करता.


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