सरहद पर गोली खाये कोई और नाम रखा जाये विद्या बालन फायरिंग रेंज | ये सही बात नहीं हैं


कभी कभी कुछ खबरें बहुत दुःख दे जाती हैं. इतना दुःख और साथ में इतना गुस्सा जिस पर आप बोलने के सिवाय कुछ ना कर सको तो और भी अधिक गुस्सा आता हैं. एक तरफ बायकाट बॉलीवुड चल रहा हैं. दूसरी तरफ बॉलीवुड को ऐसा सम्मान मिलना जिसका वो बिलकुल भी हक़दार नहीं हैं. न्यूज़ को ध्यान से देखना बहुत ज़्यादा नहीं थोड़े आंकड़े पेश करूँगा फिर मुद्दे पर आऊंगा.

भारतीय सेना का पूरा देश सम्मान करता हैं. करना भी चाहिए क्यूंकि अपनी जान की परवाह किये बिने अपने देश की रक्षा के लिए शहीद हो जाते हैं. और उन्ही शहीदों पर अक्सर राजनीती होती हैं. सर्जिकल स्ट्राइक जब होता हैं तब भारतीय सेना से हमारे देश के बहुत सारे बेवक़ूफ़ नेता सबूत मांगते हैं. वो पाकिस्तान की बोली बोलते हैं.

साल 2015 तक आज़ादी के बाद से कूल 22500 जवान अपने देश की रक्षा करते हुए सरहद पर शहीद हो गए. ये सभी उन युद्ध में शहीद हुए जो कभी चाइना के साथ 1965 में लड़ा गया तो कभी पाकिस्तान के साथ 1971 और 1999 कारगिल युद्ध के दौरान लड़ा गया. बाकी हम न्यूज़ में सुनते रहते हैं की आज एक सिपाही शहीद हो गए. चार सैफई शहीद हो गया. हमें ये आंकड़ा बहुत छोटा लगता हैं. लेकिन पुलवामा जैसी घटना होती हैं तो पूरा देश जाग उठाता हैं.

भारतीय सेना के सभी शहीद जवानो को उनके पराक्रम के लिए कुछ ना कुछ सम्मान मिलते रहता हैं लेकिन हर किसी को नहीं मिलता. उस वक्त वॉर मेमोरियल बनाकर प्रधानमंत्री मोदी जी ने भारतीय सेना के शहीद जवानो को जो सम्मान दिया उसे देखकर बहुत गर्व होता हैं.

अब एक न्यूज़ ऐसी दिखी जिसे देखने के बाद तनबदन में आग सी लग गयी बहुत गुस्सा आया. न्यूज़ ये थीं की भारतीय सेना ने विद्या बालन को एक बहुत बड़ा सम्मान दिया हैं. भारतीय सेना ने गुलमर्ग में एक सैन्य फायरिंग रेंज को ‘विद्या बालन फायरिंग रेंज’ नाम दिया है. बात ऐसी हैं की विद्या बालन ने कश्मीर में भारतीय सेना द्वारा आयोजित ‘गुलमर्ग विंटर फेस्टिवल’ में भाग लिया था उसका हिस्सा बनी थीं.

विद्या बालन को अगर कश्मीर टूरिज्म का ब्रांड एम्बेसडर बना देते तो प्रॉब्लम नहीं थीं लेकिन ‘विद्या बालन फायरिंग रेंज’. कोई पूछे कहा जाना हैं तो जवाब मिलेगा ‘विद्या बालन फायरिंग रेंज’ जाना हैं. भारतीय सेना की तरफ से ये गलती हुयी हैं.

अगर नाम देना ही था तो भारतीय सेना के किसी शहीद सिपाही का देते. शहीद अब्दुल हमीद जी के नाम पर, कैप्टेन सौरभ कालिया के नाम पर, 44 राष्ट्रीय रायफल्स के शहीद औरंगज़ेब का नाम पर रख लेते. अगर यहाँ उन जवानों के नाम गिनवाने जाऊ तो बहुत लम्बी लिस्ट हैं लेकिन भारतीय सेना ने क्या सोचकर विदा बालन का नाम रखा पता नहीं.

अगर विदया बालन के अंदर भी थोड़ी सी शर्म होती तो वो अपना नाम वहा लगवाने से मना कर देती. लेकिन अब बोलने जैसा कुछ नहीं रहा.

What's Your Reaction?

hate hate
0
hate
confused confused
0
confused
fail fail
0
fail
fun fun
0
fun
geeky geeky
0
geeky
love love
0
love
lol lol
0
lol
omg omg
0
omg
win win
0
win

You may also like

More From: News

DON'T MISS