सरदार का ग्रैंडसन रिव्यु | अर्जुन कपूर की फिल्मों राष्ट्रीय आपदा घोषीत करो


एक महीने पहले अर्जुन कपूर की फिल्म सरदार का ग्रैंडसन का ट्रेलर आया था जो मुझे दो दिन पहले पता चला. मैंने सोचा इस बंदे की की फिल्म का ट्रेलर क्या देखना. मेरे मन से भी आवाज़ आयी हटा सावन की घटा. नहीं देखना कैसी एक्टिंग की हैं. कैसा ट्रेलर हैं. और जैसी उम्मीद थीं रिजल्ट भी वैसा ही आया.

और दो दिन के बाद मैंने ट्रेलर देखने का महापाप कर लिया. ये मेरी ज़िंदगी की सबसे बड़ी गलतियों में से एक हैं. पिछली गलती क्या की थीं वो मुझे याद नहीं. बहुत बादाम खाये लेकिन यादाश्त कमज़ोर ही रही वो तो सोशल मीडिया पर जब गालीया खाने लगी तो थोड़ी बहुत यादास्त ठीक हैं. इतना याद रहता हैं की किस वीडियो पर किसने क्या गाली दी हैं.

और जहा तक मेरा सोचना हैं अर्जुन कपूर की फिल्मों को ग्लोबल पांडेमिक घोषित कर देना चाहिए. वैसे इस महामारी से बचने का इलाज भी लोगो ने खोज लिया हैं. जहा अर्जुन कपूर की फिल्म रिलीज़ होती हैं उसे सब्सक्राइब मत करो. टीवी पर आये तो टीवी फोड़ दो. कोई लिंक शेयर करे तो उसके हाथ पैर तोड़ कर सिग्नल पर बैठा दो. की यही तेरी सजा हैं पूरी ज़िन्दगी भीख मांग.

वैसे अर्जुन कपूर को फिल्म मिलना इस बात को दिखाता हैं की आप अर्जुन कपूर हो तो आपको फिल्म मिल सकती हैं. लेकिन आपके भीतर लाख टैलेंट हो लेकिन स्टारकिड्स नहीं हो तो साइड रोल पाने के लिए भी प्रधानमंत्री से सिफारिश लेटर लाना होगा.

ट्रेलर में कई सारे एक्टर दिख रहे हैं नीना गुप्ता को छोड़ दो तो सभी की एक्टिंग एक जैसी ही हैं. ना रिएक्शन न एक्शन ओनली साइड इफेक्ट्स.

अब अर्जुन कपूर कोई आयरन मैन तो है नहीं जिसके लिए स्पेशल इफेक्ट्स का इस्तेमाल होगा. एक बार अर्जुन कपूर को लेकर पानीपत में स्पेशल इफेक्ट्स का इस्तेमाल किया किया था लेकिन वहा भी अर्जुन कपूर से ज़्यादा अच्छी एक्टिंग तो घोड़ो ने की हैं. तागड़क तागड़क तागड़क भाते हुए. युद्ध के मैदान में गोबर गिरते हुए जिसपर पैर पड़ते ही दुश्मन गिर पड़ता था. और गिरने के बाद जैसे ही कहता था हे माँ माताजी. वैसे ही तलवार सीना के आरपार.

फिल्म में रकुल प्रीत से ज़्यादा जवान तो नब्बे साल की नीना गुप्ता लग रही हैं. एकदम टनाटन. जिनकी जान अटकी हैं अपने लाहौर वाले घर पर. जो कहती हैं की मुझे आखिर बार पाकिस्तान जाकर अपने घर की दीवारे देखनी हैं. बताओ बुढ़ापे में खुद की दीवारें गिर गयी हैं लेकिन पाकिस्तान जाकर अपने घर की दीवार देखनी हैं.

अब इनको कौन बताये वो पाकिस्तान हैं अब तक दो चार बम फोड़कर घर गिरा दिया होगा. जमीन समतल हो गयी होगी. और वहा कब्रिस्तान का बोर्ड भी लग गया होगा.

खैर अर्जुन कपूर का कहना हैं की दादी लाहौर नहीं जा सकती हैं तो क्या हुआ? बताओ कोई बात हो जाएगा. नहीं ना. हम एक काम करेंगे पूरा घर ही लाहौर से पंजाब उठा लाएंगे.

अब बताईये जैसे ही नीना गुप्ता के लाहौर वाले घर का सीन दिखाई पड़ता हैं. मुझे उस सीन को देखकर बड़ा गर्व महसूस हुआ की यार जितने एक्सप्रेसशन अर्जुन कपूर के पास नहीं हैं उससे कहीं ज़्यादा एक्सप्रेशन तो इस घर के पास हैं. गज़ब की एक्टिंग की हैं भाई लाहौर से पंजाब तक चला आया होगा.

एक तो पता नहीं हर बात हर कहानी में बॉलीवुड पाकिस्तान क्यों पहुंच जाता हैं. बजरंगी भाईजान में सलमान खान पाकिस्तान जाते हैं. वहा की पुलिस मार मारकर कुत्ता बनाकर बॉर्डर पर छोड़ देती हैं. ग़दर में सनी देओल हैंड पंप उखाड़ लाते हैं और सरदार का ग्रैंडसन में अर्जुन कपूर पूरा घर ही उखाड़ लाया. मज़ाक बना रखा हैं भाई. मतलब लॉजिक नाम की एक चीज़ हुआ करती थीं उसे बॉलीवुड वालो ने बेच खाया हैं.

एक तो कहानी पूरी पंजाब पर बनाते हैं और ढगं से इन्हे पंजाबी तक बोलने नहीं आती. हर बात में बैकग्राउंड में ढोलक और ओये बल्ले बल्ले बल्ले डाल देना से पंजाब वाली फीलिंग नहीं आती भाई.

अर्जुन कपूर की पूरे फिल्म में शायद यही खासियत रही होगी. अर्जुन कपूर दुःख में, गुस्से में, प्यार में, कॉमेडी में हर बार एक ही एक्सप्रेशन. फिर भी डायरेक्टर यही बात बोलता हैं वाह क्या एक्टिंग की हैं. ऑस्कर तो पक्का हैं. और ऑस्कर नहीं मिला तो क्या हुआ. बाबा इलायची विमल मसाला वाला फिल्मफेयर दिला देंगे. ऐ मुन्ना चिंता नहीं करना. अपना सब जुगाड़ हैं.

और यकीन मानिये बॉलीवुड को इस फिल्म का आईडिया भी चोरी से आया हैं.बस थोड़ा बहुत मिर्च मसाला लगाकर बना दिया हैं. इन लोगो ने एनीमेशन फिल्म UP की कहानी को चुरा लिया हैं. उस फिल्म में इमोशन था और ये फिल्म इमोशन लेस थीं.

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