शिल्पा शेट्टी फाउंडेशन भी निशाने पर | फाउंडेशन के नाम पर ये होता बॉलीवुड में


बहुत से ऐसे एनजीओ हैं जो ईमानदारी से काम करते हैं. बाढ़, भूकंप, भुखमरी, बीमारी, अनाथ बच्चो की पढ़ाई लिखाई सब कुछ का भार संभालते हैं. लेकिन आपने कई ऐसे एनजीओ देखे होंगे जो पॉलिटिशंस की पहचान से कुछ दिन में खुल जाते हैं और फिर शुरू होता पैसे की काली कमाई का कारोबार.

इस तरह के एनजीओ अपने ही लोगो को राशन बांटते हैं, गरीब इंसान के गेटउप में सड़क किनारे बैठकर रात में कंबल देते हैं तसवीरें निकलते हैं. फंडस जमा करने के नाम पर गली मोहल्ले में क्रिकेट का मैच करा देते हैं. जान पहचान के डॉक्टर्स से ब्लड डोनेशन कैंप लगाना ये सब कॉमन चीज़े हैं.

बॉलीवुड में बहुत से ऐसे सेलिब्रिटीज हैं जो खुद की एनजीओ चलाते हैं. ऐसा नहीं हैं की ये लोग उस एनजीओ के नाम पर किसी की मदद नहीं करते, किसी का इलाज नहीं कराते, या समाज को जागरूक करने के लिए कुछ कदम नहीं उठाते. सब करते हैं. लेकिन उतना ही जितना दिखा सकें की उन्होंने समाज के लिए कुछ किया हैं.

इस तरह से इन एनजीओ में लोग डोनेशन देते हैं. दस लोगो को डोनेशन दिया तो बता देंगे हज़ार लोगो को सहायता पहुंचाई. दो लोगो का ओपरेशन का खर्च उठाया तो दिखा देंगे इतने सालो में हज़ारो लोगो का इलाज करवाया. कौन देखने जाता हैं. ऊपर से लेकर सब मिले होते. सब मिल बांटकर खाते हैं.

एक सरकारी ऑफिस में काम कराने जाओ. वहा केबिन के बाहर बैठा चपरासी किसी कंपनी के CEO से कम वैल्यू नहीं रखता. उसकी अकड़ देख लो वो आपसे सीधे मुँह बात ही नहीं करेगा. इशारे में समझा देगा. समझ गए तो कुछ पैसे में आपका काम हो जाता है. भ्रस्टाचार इस देश से कभी खत्म नहीं होगा चाहे कितना भी डिजिटल इंडिया कर लो. चोर चोरी करने के नए तरीके सीख लेता हैं.

अब शिल्पा शेट्टी फाउंडेशन पर भी जांच हो सकती हैं. अगर शिल्पा शेट्टी फाउंडेशन के वेबसाइट पर जाओगे तो बड़ी बड़ी बातें लिखी हैं की गरीब बच्चो की पढ़ाई, समाज में जागरूकता लेकिन गैलरी में जाओगे तो सिर्फ क्रिकेट मैच ही दिखेगा. एन्जो जो काम करते हैं उसकी तस्वीर वेबसाइट और सोशल मीडिया पर अपलोड करते हैं. लेकिन शिल्पा शेट्टी फाउंडेशन की वेबसाइट और सोशल मीडिया पेजेज पर ऐसा कुछ नहीं हैं.

इतनी बड़ी सेलिब्रिटी लेकिन फेसबुक पेज मैनेज नहीं होता सिर्फ 2500 लाइक्स हैं और कभी कभार कोई पोस्ट होती हैं. क्रिकेट के नाम पर स्पोंसर्स से पैसे जमा कर लो करोडो में लेकिन ये मदद सही जगह पहुंची ये किसे पता. 80G का लाइसेंस हैं और टैक्स का भी टेंशन नहीं.

मोदी सरकार आने के बाद से करोड़ एनजीओ पर जांच की गयी जिसमे कुछ भी मैंटेन नहीं किया गया था. जो सिर्फ पैसे कमाने के लिए बने थे. कुछ एनजीओ से देशविरोधी और आतंकवाद के लिए भी इस्तेमाल किया जाता था उन सभी एनजीओ को बंद कर दिया गया.

अब ईमानदारी से बॉलीवुड के जितने भी एनजीओ हैं उनकी जांच की जानी चाहिए ताकि सही चीज़ सामने आ सकें. क्यंकि बॉलीवुड में हर कोई एनजीओ खोलकर उसके नाम पर साइड बिजनेस कर रहा हैं. काले धन को सफ़ेद करने में लगा हैं.

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