विदेशी मेहमानो के सामने अमिताभ से आइटम डांस करवाते थे राजीव गाँधी | राहुल की फीस नहीं भरी तो ख़राब हुआ रिश्ता स्कूल


अमिताभ बच्चन और कांग्रेस एक समय दोनों का रिश्ता बहुत अच्छा था. बॉम्बे तो गोवा फिल्म पहले राजीव गाँधी को ऑफर हुयी थीं तब राजीव गाँधी ने कहा था मैं अभनय नहीं कर सकता हैं आप मेरे दोस्त अमित को ये रोल दे दो. तब जाकर अमिताभ को ये फिल्म मिली थीं. इसके बाद कांग्रेस से जीतकर अमिताभ सांसद तक बने.

इंदिरा गाँधी की मौत के बाद खून का बदला खून जैसा नारा लगाने का इलज़ाम भी अमिताभ बच्चन पर लग चूका हैं. कांग्रेस से अमिताभ के रिश्ते ख़राब होने की कई बाते सामने आती हैं लेकिन अब एक वरिष्ठ पत्रकार संतोष भारतीय जिन्होंने एक किताब लिखी हैं जिसका नाम हैं वी पी सिंह, चंद्रशेखर, सोनिया गांधी और मैं.

इस पुस्तक में संतोष भारतीय का कहना हैं की राहुल गाँधी जब लंदन में पढ़ाई कर रहे थे तब सोनिया गाँधी ने अमिताभ बच्चन से राहुल गाँधी की फीस भरने के लिए कहा था जिसे अमिताभ नज़रअन्दाज़ कर रहे थे जिसके चलते सोनिया गाँधी ने अमिताभ से रिश्ता खत्म कर दिया.

लेखक के मुताबिक, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद सोनिया गांधी अपने पुत्र राहुल की पढ़ाई को लेकर बहुत चिंतित थीं, जो उन दिनों लंदन में पढ़ाई कर रहे थे और उन्होंने अपनी इस चिंता से अमिताभ बच्चन को अवगत कराया। किताब के मुताबिक़, सोनिया गांधी को सुनने के बाद अमिताभ बच्चन ने कहा, ‘पैसे तो ललित सूरी और सतीश शर्मा ने गड़बड़ कर दिए… कुछ है ही नहीं लेकिन मैं कुछ करूंगा।’

सूरी और शर्मा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे और उन्हें राजीव गांधी का बेहद करीबी माना जाता था। पुस्तक में दावा किया गया है कि जब राजीव गांधी जीवित थे तब सूरी, शर्मा और बच्चन ने मिलकर चावल का व्यापार आरंभ किया था। भारतीय अपनी किताब में लिखते हैं, ‘यहां से बासमती चावल जाता था वहां पर वह ‘जादू’ से परमल में बदल जाता था। चूंकि भारत सरकार ने इसकी अनुमति दी थी तो स्वाभाविक था कि कुछ और लोग भी इसमें भागीदार थे लेकिन उनके नाम कभी सामने नहीं आए।’

लेखक ने पुस्तक में आगे दावा किया कि अमिताभ बच्चन ने सोनिया गांधी की चिंता के मद्देनजर दो दिनों बाद उनके पास एक हजार डॉलर (वर्तमान में लगभग 74,500 रुपये) का चेक भिजवाया था, लेकिन उन्होंने इसे वापस लौटा दिया था। पुस्तक के मुताबिक, ‘सोनिया गांधी इस घटना को कभी भूल नहीं पाईं और उन्होंने इसे अपना अपमान मान अमिताभ बच्चन को हमेशा के लिए अपनी जिंदगी से निकाल दिया’

लेखक ने दावा किया कि सोनिया गांधी को शायद वह घटना याद हो गई, जब अमिताभ बच्चन ने संजय गांधी से 20 लाख रुपये मांगे थे लेकिन उनके पास उन्हें देने को इतने पैसे नहीं थे। वह पुस्तक में दावा करते हैं कि इसी घटना के बाद से अमिताभ बच्चन ने संजय गांधी से दूरी बनानी आरंभ कर दी थी। उनकी मां (तेजी बच्चन) अवश्य कभी-कभी इंदिराजी से मिलने जाती रहीं। राजनीतिक जानकार बताते हैं कि तेजी बच्चन और इंदिरा गांधी के बीच बेहद अच्छे संबंध थे और इसी वजह से दोनों परिवार एक-दूसरे के बेहद करीब आते गए।

पुस्तक में बताया गया है कि अमिताभ बच्चन और राजीव गांधी एक दूसरे के बेहद करीबी थे और जब भी कोई विदेशी राष्ट्राध्यक्ष या महत्वपूर्ण मेहमान भारत आता था तो वह बच्चन को अवश्य बुलाते थे। भारतीय के मुताबिक़ राजीव विदेशी मेहमानों के सामने अमिताभ का परिचय सांसद के नाते कम और अभिनेता के नाते ज़्यादा कराते थे। लेखक ने दावा किया है कि जब भी रूसी राष्ट्रपति जैसे कोई महत्वपूर्ण अतिथि आते थे तो राजीव अमिताभ बच्चन से कहते कि मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है गाने पर नाच करके दिखाओ। भारतीय ने किताब में कहा है कि बच्चन को जैसा भी लगता रहा हो, पर उन्हें यह करना पड़ता था।

किताब के मुताबिक दोनों के रिश्तों में दरार आनी तब शुरू हुई, जब विश्वनाथ प्रताप सिंह प्रधानमंत्री बने। एक घटना का उल्लेख करते हुए पुस्तक में दावा किया गया है कि यह तल्खी इतनी बढ़ गई कि एक बार तो राजीव गांधी ने उन्हें सांप तक कह दिया था। भारतीय के शब्दों में राजीव तब विपक्ष के नेता थे और अमिताभ उनसे मिलने आए थे। जब अमिताभ चले गए तो राजीव ने कहा ‘ही इज अ स्नेक’ , मतलब वह सांप है।

मतलब अमिताभ बच्चन की ज़िंदगी की असली सच्चाई लिखी जाये तो अमिताभ बच्चन की एक्टिंग को छोड़ दो तो इंसान के रूप में वो सही नहीं हैं. बात चाहे कादर खान से लेकर बाकी लोगो तक की हो. रही बात राहुल गाँधी की तो मतलब एक हज़ार डॉलर फीस के चलते रिश्ता ख़राब होना. और आज उसी कांग्रेस के नाम दुनिया भर का घोटाला हैं वो भी अरबो रूपये का.

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