लखनऊ गर्ल पर अब जो हो रहा अगर हो गया तो कैब ड्राइवर का बचना मुश्किल होगा.


लखनऊ गर्ल लखनऊ गर्ल लखनऊ गर्ल हफ्ते भर से सिर्फ लखनऊ गर्ल ऐसा लग रहा हैं जैसे मिस लखनऊ का ख़िताब जीतकर आयी हो. क्या किया उसने सबने देखा. क्यों किया ये अभी भी बरमूडा ट्रेंगल के रहस्य जैसा बना हुआ हैं. इसलिए कुछ मनोचिकित्स्क सामने आये हैं. अपने अपने विचार व्यक्त कर रहे हैं.

याद है मैंने पहली वीडियो में कहा था सड़क क्रॉस करते वक्त शायद इस लड़की को लगा हो की ये बाहुबली है और कालकेय की सेना इसे मारने के लिए आ रही हो और उसने कैब ड्राइवर को बंदरिया की तरह उछल कर मारना शुरू कर दिया. भाई ये बात तो मैंने मज़ाक में कही थीं लेकिन यही बात कुछ ऐसी ही मनोचिकित्स्क भी बोल रहे हैं हालाँकि उनका कहना हैं की पहले इस लड़की का दिमाग चेक करना होगा.

अगर वायरिंग कहीं से लूज़ नहीं हैं करंट प्रॉपर मिल रहा है तो ये ठीक हैं वरना इसकी वायरिंग में गड़बड़ है और स्क्रू भी ढीला हैं. हालाँकि ऐसे किसी का मज़ाक नहीं करना चाहिए लेकिन इस लड़की ने जो हरकत की है उस बात से सभी को गुस्सा हैं.

तो मनोचिकित्स्क ये सायकोसिस नाम की बीमारी से पीड़ित हो सकती हैं. इस बीमारी में होता क्या हैं की बीमार इंसान को बार बार अपनी जान का खतरा बना रहता हैं. ऐसे इंसान को लगता हैं की कभी भी कोई उसके ऊपर हमला कर सकता हैं. इससे बचने के लिए वो कई बार नए नए तरीके खोजता हैं. इस काल्पनिक हमले से बचने के लिए वो के बार इस तरह की हरकतों को अंजाम देता हैं.

मनोचिकित्स्क का कहना हैं की सायकोसिस दो तरह की होती हैं एक हलुएसिनसन्स जिसमे पीड़ित इंसान को तरह तरह की आवाज़ सुनाई देती हैं. अक्सर वो खुद से भी बात करते हुए नज़र आते हैं. लेकिन रियलिटी में वो किसी और से बात करते हुए नज़र आते हैं जो उनके लिए रियल होता हैं.

दूसरा प्रकार होता हैं डिलूज़न का जिसमे पीड़ित को भ्रम होता हैं की कोई लगातार उन्हें नुकसान पहुंचने की कोशिश कर रहा हैं. उन्हें अपने आसपास के लोगो पर शक होने लगता हैं की कोई उनसे मिला हुआ और वो लोग उसे नुकसान पहुंचना चाहते हैं. अक्सर ऐसे लोगो को दूसरे देश या दूर कही से कुछ मिलने का भरम हो जाता हैं. मतलब लंदन से किसी ने कहा की तुम्हारी जान को खतरा हैं जो ये लोग सच मान लेते हैं.

ऐसी मानसिकता वाले खुद को बचने के लिए दुसरो पर हमले कर देते हैं यही हरकत वो घर में भी करते हैं लेकिन घर वाले समझ नहीं पाते और डांट देते है जिससे उनकी बीमारी और बढ़ जाती हैं.

इस बीमारी का लक्षण बीस से तीस साल की उम्र के बीच में दिखाई देता है. अगर इस उम्र में बच्चे बड़बड़ाने लगे या आपस में बात करने लगे तो समझ लो मामला गड़बड़ है. पेरेंट्स को तुरंत मनोचिकित्स्क से कांटेक्ट करना चाहिए.

इस बीमारी से सही समय पर इलाज से लोग ठीक हो जाते हैं ये बीमारी भी कुछ एक प्रतिशत लोगो को होती है.

अब प्रियदर्शिनी वाले मामले में अगर उसके माता पिता को पता है की वो बीमार हैं तो उसका इलाज चल रहा होगा और अगर वो बीमार नहीं है और उसने जान भूझकर ऐसा किया हैं तो भाई कल को उसका वकील किसी हॉस्पिटल से पेपर बनवा सकता है की वो वाकई बीमार है उसका इतने साल से इलाज चल रहा हैं.

मतलब आप समझ सकते है एक बार मामला कोर्ट में गया तो सालो साल चलता हैं. इसमें बस दोनों पक्ष के वकील पैसे कमाते हैं केस चाहे जो भी हो. देखो जिस तरह से वो लड़की मीडिया में बात कर रही है उन बातो से यही लगता हैं की वो बीमार है उसे भरम हैं की कोई उसे मार देगा या मार रहा हैं. जैसा उसने कहा की सौ लोग मिलकर मार रहे थे.

या फिर उसके वकील को ये सब पता होगा और सारे कांड देखते हुए उसने प्रियदर्शिनी को इस बीमारी के बारे में सब राटा दिया होगा की ऐसे ऐसे करना हैं. तुम्हे ऐसा बोलना है की लोग तुम्हारा मज़ाक उड़ाए. तुम्हारी बातो पर यकीन नहीं करें. सोशल मीडिया पर मुद्दा उछला हैं और सोशल मीडिया पर ही लोग तुम्हे मानसिक रोगी करार दे देंगे.

हमें ज़्यादा कुछ नहीं करना होगा बस तुम्हे मानसिक रोगी साबित करना हैं वरना तुम बुरा फस्न जाओगी. लेकिन इस लड़की की दूसरी वीडियो जो वायरल हुयी जिसमे वो पड़ोसियों से झगड़ा कर रही हैं की इस एरिया में इंटरनेशनल ड्रोन उड़ते हैं वो तो पुरानी वीडियो हैं. अब देखो इस केस में ईमानदारी से जांच होगी. पड़ोसियों से भी पुछा जाएगा की वो पहले से ऐसी हैं या अभी ऐसी हो गयी.

ये केस लंबा चलेगा और नुकसान सिर्फ कैब ड्राइवर को ही होने वाला हैं. क्यूंकि मामला जब अदालत में जाता हैं तब कुछ और हो जाता हैं.

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