मोदी जी क्या ये है आपका मास्टर स्ट्रोक ? अब आपको CAA, 370 भी वापस लेना होगा ?


शेर जब पीछे हटता है तो वो बड़ा हमला करने के लिए पीछे हटता हैं. ये मोदी जी का मास्टरस्ट्रोक था. मोदी जी जो करते हैं उसके पीछे बहुत बड़ी सोच होती हैं. आखिर किसानो की जीत हुयी. मोदी जी हार गए. अब तो CAA और 370 भी वापस लेना होगा.

ऐसी तमाम बातें सोशल मीडिया पर चल रही हैं. लेकिन मोदी जी ने जो कहा उसे ध्यान से सुनिए. “:जो किया था किसानों के लिये किया था…जो कर रहा हूँ देश के लिए कर रहा हूँ”

लेकिन सवाल ये हैं की देश के लिए कर रहे थे तो किसान भी तो इसी देश के हैं. क्या किसान बिल जो किसानो के हित के लिए था. क्या केंद्र सरकार को ये डर था की किसान आंदोलन की आड़ में देशविरोधी चीज़े कुछ ज़्यादा हो रही थीं. खालिस्तानी और विदेशी ताकतें कुछ बड़ा करने की कोशिश कर रही थीं.

किसान बिल गलत था तो सिर्फ पंजाब और हरियाणा के किसान ही इसका विरोध क्यों कर रहे थे ? और अगर सही था तो बाकी राज्यों के किसान ..’किसान आंदोलन’ के खिलाफ खड़े क्यों नहीं हुए. सवाल ये भी उठा रहा हैं की क्या मोदी सरकार पांच राज्यों में होने वाले चुनाव से डर गयी? तो क्या जब कश्मीर में चुनाव आएंगे तो धारा 370 भी हटा देंगे !

अगर चुनाव से डरकर मोदी जी ने ये फैसला बदला हैं तो फिर 2019. के लोकसभा चुनाव में जब इतना बड़ा आतंकी हमला पुलवामा में भारतीय सेना पर होता है तब मोदी जी क्यों नहीं डरे…फिर तो जो विपक्ष पाकिस्तान के सुर में सुर मिला रहा था मोदी जी को उनसे भी डरना था. क्यूंकि पाकिस्तान के आतंकवादियों पर हमला करना भी विपक्ष के हिसाब से मानवता पर हमले करने जैसा था !

बड़ी बात ये हैं की देश की सुरक्षा ज़रूरी हैं. आप कानून तभी बना सकते हो जब आप सत्ता की कुर्सी पर बैठे रहो. वरना विपक्ष में बैठकर नेता सिर्फ मार खाते हैं. ताकत के बिना इंसान कुछ भी नहीं. आप इस बात से बिलकुल भी इंकार नहीं कर सकते हैं की चुनाव जीतना ज़रूरी हैं….चुनाव जीतना बेहद ज़रूरी हैं वरना जिन राज्यों में बीजेपी की सरकार नहीं हैं वहा क्या हालत हैं इस बात को आप अच्छी तरह से समझ सकते है.

खैर मोदी जी ने क्या सोचकर ये फैसला किया वो उनसे बेहतर कोई नहीं जानता होगा क्यूंकि प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठा इंसान. जिसकी बात पूरी दुनिया सुनती हैं. जिसके लीडरशिप को हर कोई नमस्कार करता हैं …उस व्यक्ति ने अगर ये फैसला लिया हैं तो इसमें ना उसकी हार हैं ना देश की हार हैं. नयी बात नौ दिन होती हैं और पुरानी बात पांच दिन.

जिस कांग्रेस की सरकार में 1984. में सिख धर्म के लोगो का कत्ले आम किया गया था अगर उसकी सरकार पंजाब में बन सकती हैं. तो राजनीती में सब संभव हैं. क्या कभी किसी ने सोचा था की शिवसेना -बीजेपी अलग हो जाएगी ? नहीं ना ? कल को ये दोनों पार्टीया मिल भी गयी तो भी संदेह मत करना !

राज वही करता हैं जो राजा हैं. वरना दो वक्त को रोटी नसीब ना हो और नाम राजा रख लो ये अपने आप में हास्यापद हो जाता है. बस इतना समझ लो ..मोदी की राजनीती समझना आसान नहीं हैं. और राजनीती में सब कुछ संभव हैं. अगर किसी को लग रहा हैं की कृषि बिल मोदी जी ने वापस ले लिया तो उनकी हार हैं. जो उन्हें पसंद करते थे वो अब नापसंद करने लग जायेंगे तो आप गलत हैं.

जो मोदी जी के साथ खड़े हैं वो आगे भी खड़े रहेंगे. हो सकता हैं जो खड़े नहीं थे वो भी साथ आकर खड़े हो जायेंगे. शतरंज में वही खिलाड़ी विजयी होता हैं जो दस कदम आगे की सोचता हैं और ऐसा होगा तो ये करना होगा ! वैसा होगा तो ये नहीं करना होगा. शतरंज की हर चाल को अपने दिमाग में बैठा लेता हैं.

विपक्ष के मुद्दे छीनकर उन्ही मुद्दों से मात देना ये काम सिर्फ मोदी जी ही कर सकते हैं. हम और आप चार दिन चर्चा करेंगे. लेकिन कृषि बिल लाने से पहले मोदी जी ने इसके बारे में कई साल तक सोचा होगा. अध्ययन किया होगा. क्या होगा क्या नहीं होगा हर चीज़ पर गहनता से सोच विचार किया होगा.

जब सिख समुदाय के कुछ लोग 1984 भूलकर पंजाब में कांग्रेस को सत्ता दे सकते हैं. मोदी तुझसे बैर नहीं वसुंधरा तेरी खैर नहीं बोलकर राजस्थान के लोग कांग्रेस को जीत दिला सकते हैं. जब लोग साल 2008 के आतंकी हमले को भूल सकते हैं तो कुछ भी सम्भव हैं.

अगर आप मोदी जी के बाकी कार्यो और निर्णय को भुला सकते हैं तो आप जैसा मूर्ख भी कोई नहीं हैं. ये वही बात हो जाएगी की एक इंसान सौ अच्छे काम करे लेकिन एक काम गलत हो जाये तो वो इंसान गलत हैं तो आप जैसा मूर्ख कोई नहीं.

बल्कि आप सोचिये की कृषि बिल का विरोध सिर्फ पंजाब और हरियाणा के कुछ किसान ही कर रहे थे हर कोई नहीं. यानी कृषि बिल में कोई समस्या नहीं थी. समस्या बीच के दलालो की थीं. और इस बिल से जिन किसानो को फायदा मिल रहा था वो किसान इन दलालो का और विपक्ष का साथ देंगे ये सोचना विपक्ष की बहुत बड़ी भूल होगी. बल्कि बाकी राज्यों के किसान विपक्ष से नाराज़ ही होंगे.

जब तक आप इस आर्टिकल को पढ़कर अपनी राय व्यक्त करेंगे. तब तक ये बात पुरानी हो जाएगी. मीडिया में एक दो दिन मारपीट चलती रहेगी. फिर सब अपने काम में लग जायेंगे. सवाल ये है की विपक्ष का मुद्दा अब क्या होगा ? कल अगर राकेश टिकट कोई बीजेपी ने टिकट दे दिया तो क्या होगा ? तब ये विपक्ष आरोप भी नहीं लगा पायेगा की राकेश टिकैत बीजेपी का ही आदमी था.

सवाल ये भी हैं की जो लोग मोदी जी को सपोर्ट करते हैं उन्हें अंधभक्त कहा जाता हैं लेकिन आज़ादी के बाद से लेकर अब तक जो लोग एक विशेष पार्टी को सपोर्ट करते हैं. एक परिवार को छोड़कर कोई दूसरा पार्टी का अध्यक्ष बनता ही नहीं हैं उन सपोर्टर्स को आप क्या कहेंगे ? क्या उनकी चमचागिरी के लिए लिए उन्हें कोई सम्मान नहीं दिया जाना चाहिए ?

हम मोदी जी के साथ थे. है …और आगे भी रहेंगे. हमारे लिए देश हमेशा ही पहले था और रहेगा. गलतीया इंसान से होती हैं लेकिन कृषि बिल मोदी जी ने वापस ले लिया इसे आप मोदी जी की गलती कहोगे तो गलती मोदी जी की नहीं आपकी है. जय हिन्द जय भारत

– मुकेश दुबे


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