मेरी जेल यात्रा | जीवन में एक बार जेल ज़रूर जाओ | मच्छरों से करनी पड़ती हैं बात | हल्का फुल्का रोस्ट


राज कुंद्रा इस वक्त जेल में हैं. और मुझे भी अपनी एक जेल यात्रा याद आ गयी. भाई ज़िंदगी में हर तरह के इंसान से मिला हूँ. हर काम किये. दारु सिगरेट और मुन्नी बाई के कोठे पर छोड़कर. ये काम ना किया और ना कभी करना.

हर इंसान को अपनी ज़िंदगी में एक बार जेल यात्रा ज़रूर करनी चाहिए. ऐसा करने से दो चीज़े होती हैं. एक तो आप ज़िंदगी में गलती से भी कोई गलती नहीं करोगे. दूसरा आपको जेल की हसीन ज़िंदगी का एक सुखद अनुभव प्राप्त होगा. अब आप बोलोगे भाई ये तुम्हे कैसे पता ?

तो बात ऐसी हैं की दुर्भाग्यवश मुझे भी इस यात्रा का अनुभव हैं. ये उन दिनों की बात हैं जब मै कॉलेज में था. यानी इस घटना को लगभग 17 साल बीत चुके हैं. तो एक छोटी सी गलती हो गयी थीं. रेलवे के नियमो का उलंघन जिसके बारे में मुझे पता तो था लेकिन किसी और की गलती के चलते मुझे रेलवे ट्रैक कोर्स करना पड़ा था.

अब ट्रैक क्रॉस करके जैसे ही प्लेटफार्म के ऊपर चढ़नेवाले थे इतने में एक कला कोट पहने इंसान ने अपना हाथ दिया और कहा “आओ बेटा ऊपर चढ़ जाओ.’ प्लेटफार्म पर आते हैं मैंने कहा “थैंक यू अंकल’

उसने का थैंक यू को रखो साइड में और निकालो पांच सौ रूपये. मैंने कहा अंकल मदद करने के पांच सौ रूपये. मै नहीं देता. मैंने बोला था मेरी मदद करो.

काला कोट पहने इंसान ने कहा बेटा मुझे आपकी ज़िंदगी की चिंता है इसलिए मैंने मदद की और अब पांच सौ रूपये आपको देने है और मै आपको उसकी पर्ची भी दूंगा. मैंने सोचा मेरे माँ बाप मेरी पूरी जिम्मेदारी उठा रहे ऊपर से मेरे ऊपर पैसे खर्च करते और ये इंसान मदद के लिए पैसे मांग रहा.

मुझे लगा कुछ तो खोल हैं. कहीं ना कहीं ये इंसान हमें लूटने की कोशिश कर रहा हैं. अब ये सब कुछ 15-20 सेकंड के बीच की बात हैं. मैंने कहा अंकल मैं पुलिस में शिकायत कर दूंगा. उसने कहा बेटा शौक से कीजिये. लेकिन पैसे तो देने होंगे यूंकि तुमने रेलवे के नियमो का उलंघन किया हैं. ये मेरा रोज़ का काम हैं.

अब समझ में आ गया था की भाई ये है कौन ? मैंने कहा इतने पैसे तो नहीं हैं. उसने कहा कोई बात नहीं बेटा. चलो जेल यात्रा पर चलते हैं.

भाई साब उसके बाद उसने मुझे रेलवे पुलिस के हवाले कर दिया. पुलिस ने कहा रेलवे पुलिस आपकी सेवा में सदैव ततपर हैं. और ले जाकर एक छोटे से जगह पर बंद कर दिया. लेकिन वहा का नज़ारा देखकर दिल खुश हो गया. सारा डर ही निकल गया.

क्यूंकि ऐसा करनेवाले हम अकेले नहीं थे. हमारे जैसे पचास लोग और थे. हालाँकि जगह छोटी थीं लेकिन अपने को कौन सा वहा पूरी ज़िंदगी निकालनी थीं. वो रेलवे पुलिस थीं कोई एस्टेट एजेंट नहीं जो फ्लैट दिखाने वहां ले गया था.

अब यहाँ से शुरू होती हैं जान पहचान बढ़ाना. मेल मिलाप करना. भाईचारा. क्या हिन्दू क्या मुस्लिम और क्या सीख ईसाई हर जाती और धर्म रेलवे पटरी क्रॉस करने के चक्कर में वहां कैद थीं. ऐसा लग रहा था आज़ादी की लड़ाई में क्रांतिकारियों को जेल भरो आंदोलन के तहत बंद किया गया था.

एक बन्दे से मैंने पुछा. तुम कैसे आये. वो बोला यार एक नंबर लगी थीं. हम प्लेटफार्म नंबर वन पर थे और प्लेटफार्म नंबर दो पर मूत्रालय था. बड़ी ज़ोर की लगी थीं लेकिन मज़िल तक पहुंच नहीं सके. आधे मंज़िल से ही उठा लिए गए. अभी तक लगी हैं लेकिन करने नहीं देते. कहते है तुम्हारी यही सजा हैं की तुम पूरे दिन नहीं मुतोगे.

दूसरे से पुछा कैसे आये तो कहता है अपना काम करना भाई. जस्ती होशियारी मत दिखा. जेल में बंद हैं बाप की शादी में नहीं आयेला हैं. जितना पगार नहीं उतना पैसा मांगता ये लोग. बाप का राज़ है क्या ? मैंने कहा भाई ये आदमी सही नहीं हैं. कुछ और पुछा तो यही मेरा अंतिम संस्कार कर देगा.

अब एक बूट पॉलिशवाला लड़का था उसकी तरफ देखकर मैं कुछ पूछू उसके पहले ही उसने कह दिया. टेंशन नहीं लेने का..ये लोग का रोज़ का नौटंकी हैं. आपन हफ्ते में दो दिन महीने में आठ दस बार इधर आता.अभी ये लोग बोला तुम मंथली पास बना लो. तुम सुधरेगा नहीं. तुमको यही नहीं पता की ये जेल है या तुम्हारी ससुराल.

उसने आगे कहा,”देख भाई अपुन का आगे पीछू कोई नहीं …बाहर रहेगा तो लोगो का जूता चमकाएगा. पैसे कमाएंगे. अंदर डाला दो दो वक्त की रोटी मुफ्त में यहीच लोग देगा. खाने का पीने का मस्त में सो जाने का.

उसकी बात सुन ऐसा लगा ये है असली मोटिवेशनल स्पीकर. आज से पढ़ाई लिखाई बंद. आज से अपुन भी बूट पोलिश करेगा. लेकिन फिर याद आया … पिताजी पूरे मोहल्ले में दौड़ा दौड़कर मारेंगे.

अब आगे ऐसा हुआ की दो घंटे बाद पुलिस का बड़ा वाला डब्बा आया यानी की पुलिस की बड़ी वाली वैन. अब एक हवलदार आया और बोला ये चलो रे वैन में बैठो जल्दी.

भाई साब जिस गति से उसने अपना डंडा ज़मीन पर पटका उसके डर से बाजूवाले का पेशाब निकल गया. एक एक करके पचास साथ लोगो को उस वैन में डाला गया. जब वैन ने चलना शुरू किया तब हर कोई कन्फ्यूज्ड था एक दूसरे को चेहरे को देख रहा था. की आखिर हो क्या रहा हैं. हमें कहा ले जा रहे हैं.

वो पूरा सीन ऐसा लग रहा था जैसे अमिताभ बच्चन की डॉन फिल्म चल रही हो. जिसमे अमिताभ बच्चन, बाकी गुंडे और रोहित शेट्टी के पापा पुलिस वैन में बंद थे और दूसरे जेल में शिफ्ट किये जा रहे थे.

इतने में मेरे मुँह से निकल गया “या कहीं ये लोग हमारा एनकाउंटर करने तो नहीं जा रहे हैं. भाई साब उसके बाद लोगो की ऐसी फटी ऐसी फटी की रोना धोना शुरू हो गया. ड्राइवर सीट की बगल में बैठा हवलदार ज़ोर से चिल्लाया. आज के बाद तुम लोग पूरी ज़िंदगी पटरी क्रॉस नहीं करोगे.

अब पक्का यकीन हो गया की लग गए बेटा मुकेश. ये लोग एनकाउंटर ही करने जा रहे हैं. पूरी ज़िंदगी पटरी क्रॉस नहीं करने का क्या मतलब ? यही ना की अब इस दुनिया में हमारे दिन पूरे हो गए हैं. एक्सपायरी डेट आ चुकी हैं.

अब कुछ देर के बाद पुलिस वैन अचानक से जज हॉस्पिटल में रूकती हैं. और हवलदार आकर कहता हैं चलो बे निकालो सब के सब. किसी की हिम्मत नहीं हो रही थीं उसने फिर से डंडा दरवाजे पर पटका उसके बाद लोग ऐसे निकले उस वैन से जैसे भूकंप आ गया हो.

हालाँकि उस वक्त ये क्लियर हो गया की एनकाउंटर करने तो नहीं जा रहे भाई. लेकिन अपनी जेब से मैंने रुमाल निकला और चेहरे पर रख लिया की कोई पहचान ना लें. खामखाह इज्जत का फालूदा हो जायेगा. हॉस्पिटल हमें इसलिए ले गए ताकि किसी हाल में अगर किसी की डेथ हो गयी तो भाई पुलिस जिम्मेदार नहीं हैं.

इसके बाद वापस हमें डिब्बे में डाला गया. इस बार हमें बड़े कालकोठरी में बंद किया गया. जहा नाम के लिए एक छोटा सा बल्ब जल रहा था. उस बल्ब को देख भी तरस आ गया की तू जल ही क्यों रहा है. तू मरे तो नए बल्ब लगे और कैदियों की ज़िंदगी में थोड़ा उजाला हो.

अच्छा लॉक आप में डालने से पहले हमारे हाथ की घडी, गले का धागा, हाथ का कलावा, अंगूठी, कंघी, सिक्के, पर्स यहाँ तक की मेरा चश्मा भी निकल कर रखवा लिया गया. इसलिए ताकि कोई खुद को या दूसरे कैदी को नुकसान ना पंहुचा सकें. यही गलत हुआ चश्मा निकलना मतलब भाई सीधे सीधे तौर पर हैंडीकैप बना दिया.

आँखों से धुंधला दिख रहा. एक कैदी तो मुझे वीरा ज़ारा का पाकिस्तान की जेल में बंद शाहरुख़ खान लग रहा था. खैर इसके पहले मैंने जान पहचान के कुछ नेताओ को फ़ोन घुमाया था ताकि वो छुड़ा सके. लेकिन सबके सब धोखेबाज़. सब ने भरोसा देकर पीठ में खंज़र मार दिया.

फाइनली जो मेरा कजिन था उसने रोटी रोते पीसीओ से अपने भाई को फ़ोन किया. भाई बोला मै आता हूँ एक घंटे में. और ये बात घर में सबको बता दिया. इधर घर में अलग रोना धोना मचा था. ऐसे रो रहे थे मानो किसी का मर्डर कर दिया हो और आजीवन कालकोठरी में बंद रहना होगा.

अब आगे सुनिए. दो कैदी थे. राजस्थान से थे.मैंने उनसे बात करनी शुरू की. वही जान पहचान और मानवता जो बचपन से मेरे दिल में थीं. मैंने पुछा और कैसे आये. बोला भाई…हम बेगुनाह हैं. मैंने कहा EXACTLY यही मैंने भी कहा था जिसके बाद हम गिरफ्तर कर लिए गए. यानी खुद को बेगुनाह कहोगे तो धार लिए जाओगे.

फिर उसने कहा यार एप्पल काटने वाला चाक़ू था वो मिल गया हमारे पास तो हमें गिरफ्तार कर लिया. मैंने कहा बहुत गलत किया. उसने कहा यार घर पर भी बात नहीं करने देते. मैंने कहा घरवालों का नंबर दो. मैंने तुम्हे छुड़ाऊंगा.

यहाँ खुद के जेल से छूटने की कोई आस नहीं और उसका वकील बन बैठा. माचिस की एक जाली तीली से मैंने ज़मीन पर नंबर लिखा और याद कर लिया. अब ये सब दूर बैठा एक हवलदार देख रहा था. उसने मुझे कहा इधर आओ.

मैं उठा और उसके पास गया. हवलदार ने कहा क्या बात कर रहा था उससे. मैंने कहा साब वो बोल रहा हैं की एप्पल काटने वाला चौकी मिला तो उसे अरेस्ट कर लिया. अब हवलदार उन दो मारवाड़ी कैदियों को बोला. क्या रे बच्चे को झूट बोलता हैं.

दोनों मारवाड़ी हँसते हुए कहने लगे. अरे साब बच्चा है कहानी सुना रहा था. हवलदार ने कहा दोनों ने मर्डर किया हैं. कोयटा मिला उसके पास से.

मैंने कहा सर फिर हमें ऐसे खूंखार कैदियों के बीच में क्यों रखा. वो बोला रात को अलग कर देंगे रे. अभी शान्ति से बैठ उधर.

थोड़ देर बाद मेरा कजिन आया हमें छुड़ाने के लिए. वो लॉक उप के बाहर हम अंदर. जेल की सलाहों को पकडे. मेरे साथ बंद हुआ मेरा कजिन बोला. भैया मेरा करियर ख़राब तो नहीं होगा. बाहर खड़े भाई ने कहा,”तेरा कौन सा करियर अभी कल ही तो गाँव से आया हैं. करियर बना ही नहीं तो ख़राब कहा से होगा.”

लेकिन मै इन सब का भरपूर मज़ा ले रहा था. खैर पैसे भरे और हम अपने घर. अच्छा हम निकले थे मंदिर दर्शन के लिए. अब मेरा कजिन तो अपने घर चला गया. और मुझे अपने घर जाना था. मैंने दूकान से लिया नारियल, रामदाना, फूल, और मिठाई अपने बजट के अनुसार. उसे लेकर घर पहुंचा.

ऐसे दिखा रहा था जैसे कुछ नहीं हुआ. कितना बड़ा काम करके आया हूँ. घर पहुंचते ही मम्मी बोलो हो गया दर्शन. मैंने कहा हां हो गया. बहुत भीड़ थीं . मम्मी बोली प्रसाद लाया. मैंने कहा हां ये लो.

अब अचानक से मम्मी के चेहरे का पूरा एक्सप्रेशन बदल गया. दरवाजे की पीछे से निकला पैरागन की हवाई चप्पल. उसके बाद भाई साब जो तबियत के धुलाई हुयी. मारते मारते यही बोल रही थीं मर गया होता ट्रैन के नीचे आकर तो क्या करती मैं. जितनी बात उतनी चप्पल और उतना ही खुद भी रो रही थीं. भाई बेटे के साथ कोई दुर्घटना नहीं हुयी ये तो माँ के लिए सबसे बड़ा गिफ्ट हैं.

वो दिन है और आज का दिन हैं कभी रेलवे के नियम नहीं तोड़े. ये होती माँ की मार. आपका पूरा करियर ही बदल देती है.

रात को मम्मी खुद ही दवा लेकर आयी और लगाने लगी. और बोल रही हैं इतना नहीं मारना चाहिए. ज़्यादा मार दिया. बताओ हाथ आपके. चप्पल आपके हाथों में. सारा कंट्रोल भी आपके हाथों में. कितना और कैसे मारना हैं. लोव यू मोम

कहानी अभी ख़त्म नहीं हुयी. जितने पैसे भरे थे अगर उसमे से कुछ वापस चाहिए तो आपको दूसरे दिन अनाड़ी कोर्ट जाना होता. अब उस ज़माने में पैसे की कीमत तो बहुत थीं. ऊपर से पैसे अपने भी नहीं थे. छुड़ानेवाला कजिन था ..पैसे उसके लगे थे. जो उसने कॉलेज में पढ़ते हुए टुएशन पढ़कर कमाए थे.

अब सुबह साथ बजे उठा और मैंने कहा घर पर की दोस्त के घर पढ़ाई करने जा रहा हूँ. दोस्त को पहले ही फ़ोन कर बोल दिया की मेरे घर से फ़ोन आया तो कह देना बाथरूम में हूँ इतना बोल देगा तो समझ जायेंगे की बेटा पढ़ने ही गया हैं. घरवाले भी हैरान थे लेकिन सोचे की मार पडी हैं इसलिए थोड़ा रास्ते पर आ गया हैं.

अब हमने यानी तीन लोगो ने पकडे लोकल ट्रेन और पहुंच गए अनाड़ी कोर्ट. जज की एंट्री नहीं हुयी थीं लेकिन वहां बैठे अनुभवी लोगो ने कहा की जज के साथ आर्गुमेंट मत करना वरना चार्जेज बढ़ा देगा.

इतने में वो लोग जिन लोगो ने पैसे नहीं दिए और पूरी रात जेल में बंद थे. उन्हें एक साथ रस्सी में बांधकर अदालत में लाया गया. उनकी हालत में अपना चेहरा दिख रहा था की हम नहीं देते तो हमारा भी यहाँ हाल होता.

जज आया सब खड़े हो गए. सबने गुड मॉर्निंग बोला. जज भी बोला .मस्का मत लगाओ बे नियम तोड़नेवाले अपराधियों. जज ने कहा एक एक कर बुलाओ सबको.

पहले शख्स गया. जज ने कहा बोलो क्या किया तुमने. सर मै तो पेशाब करने गया था मुझे ज़बरदस्ती पकड़ लिया. जज ने हथोड़ा मारा टेबल पर कहा दो हज़ार रूपये. उस आदमी ने कहा सर मेरी बात तो सुनो. जज ने फिर हथोड़ा मारा और कहा दो हज़ार पांच सौ रूपये. ऐसा करते करते उस बन्दे से चार हज़ार रूपये भरवा लिए गए.

यानी गुनाह किया है तो क़बूलो वरना हम हर तरह से खातिरदारी करेंगे. कुछ देर के बाद मेरा नंबर आया. जज ने कहा,”आपने पैसे भरे हैं. आपके ऊपर इलज़ाम है की आपने सेक्शन 147 के तहत रेलवे ट्रैक क्रॉस करने का जुर्म किया हैं. क्या आपको अपना गुनाह स्वीकार हैं.

मैंने भी हाथ जोड़े हुए कह दिया जी सर कबूल हैं. जज ने हथोड़ा मारा और 250 रूपये वापस कर दिए. मैंने भी जज को थैंक यू कहा. बाहर आकर हम सभी ने मसाला डोसा खाया. ट्रेन पकड़ी और घर लौट आये.

मम्मी ने कहा हो गयी पढ़ाई. मैंने कहा हां बहुत बड़ी. यही की ज़िंदगी में कभी को नियम ना तोड़ो. रेलवे क्रासिंग में आपकी जान जा सकती हैं. हर रोज़ कई लोगो को मौत होती हैं. लेकिन इस घटना से ये भी पता चला की जब रेलवे क्रासिंग इतना बड़ा गुनाह हैं की जो बाते मैंने कहीं वो आपके साथ भी हो सकती हैं.

अब सोचो एक सीधा साधा इंसान जब जेल में जाता हैं तो वहां कैसे कैसे लोग मिलते है जो उसकी ज़िंदगी बदल देते हैं. जेल में जाने से इंसान सुधरता नहीं बल्कि और बिगड़ कर बाहर आता हैं. क्यूंकि वो जेल के भीतर अपने हक़ के लिए अपनी जान बचने के लिए लड़ेगा नहीं तो मारा जाएगा.

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