मुन्नवर राणा बुढ़ापे में सठियाया | वाल्मीकि समाज का अपमान किया | रामायण लिखनेवाला आतंकी था


कुछ लोग साठ की उम्र पार करते ही साथिया जाते हैं. लेकिन कुछ ऐसे भी जो साठ की उम्र पार करते हैं उनकी सोच आतंकवादियों जैसी हो जाती हैं. कुछ ऐसा ही हाल मुन्नवर राणा का हैं. पहले शेरो शायरी करते थे. अब बकचोदी करते हैं. बुढ़ापे में इस इंसान की भाषा एकदम सड़कछाप टपोरियों जैसी हो गयी हैं.

मीडिया ने जब इससे पुछा तालिबान पर पुछा तब इसका हिन्दू विरोधी चेहरा सामने आ गया. ये कई बार हिन्दुओ को गली दे चुका हैं. अपमान भरे शब्द कर चुका हैं. मुझे तो लगता हैं स्वरा भास्कर इसकी दूर की बेटी तो नहीं.

इस बुढऊ का ये कहना हैं की ‘तालिबान आतंकी हैं पर उतने ही आतंकी हैं जितने रामायण लिखने वाले वाल्‍मीकी।’ जब इससे पुछा गया कि तालिबानी आतंकी हैं या नहीं? तब इसने कहा,” अगर वाल्‍मीकी रामायण ‘लिख देता है’ तो वह देवता ‘हो जाता है’, उससे पहले वह डाकू होता है। इसको क्‍या कीजिएगा। आदमी का किरदार, उसका कैरेक्‍टर बदलता रहता है। ‘

जब टीवी चैनल के एंकर ने इस पर आपत्ति जताई कि कम से कम भगवान वाल्‍मीकि के साथ वह तालिबान की तुलना न करें तो मुनव्‍वर राना बोले, ‘आपके मजहब (हिंदू धर्म) में तो किसी को भी भगवान कह दिया जाता है। लेकिन, वो एक लेखक थे। ये ठीक है कि उन्‍होंने एक बड़ा काम किया। उन्‍होंने रामायण लिखी। हालांकि, यहां मुकाबला करने की बात नहीं है।’

इस बेवक़ूफ़ का ये कहना हैं की “तालिबान को आतंकवादी या आतंकी नहीं कह सकते, उन्हें अग्रेसिव कहा जा सकता है। तालिबान ने अपने मुल्क को आजाद करा लिया तो क्या दिक्कत है। अपनी जमीन पर कब्जा तो किसी भी तरह से किया जा सकता है।”

इस बुड्ढे बेवक़ूफ़ को ये समझ नहीं आता की तू जिसकी साइड ले रहा हैं वो तालिबान वहा क्या कर रहा हैं. औरतो को मार रहा हैं. बेच रहा हैं उनकी इज्जत के साथ खेल रहा हैं. लोग जहाज से गिर रहे हैं. अपने बचो को लोग अमेरिकी सोल्डिएर्स को दे रहे ताकि उनकी जान बच सकें. और ये बुद्धा घर में अपनी टूटी चारपाई पर बैठकर अपना पिछवाड़ा खुजाते हुए ये कहता हैं की तालिबान अच्छे लोग हैं. अरे इतने ही अच्छे है तो यहाँ इंडिया में क्यों बैठा वहा क्यों नहीं चला जाता.

ऐसे लोग किसी भी सम्मान के हक़दार नहीं हैं. इनके लिए सिर्फ और सिर्फ गालीया ही बेहतर जवाब हैं. और इस तरह के लोगो का जो साठ देते उनसे बड़ा बेवक़ूफ़ कोई नहीं हैं. ये वही लोग हैं जब इंडिया में मोब लॉन्चिंग होती हैं तब इन्हे दर्द होता हैं राजनीती करते हैं लेकिन इन जैसे लोगो को अफगानिस्तान में जो हो रहा वो ठीक लगता हैं.

अफगानिस्तान में जिनकी मौत हो रही हैं और जो मरनेवाले हैं क्या वो हिन्दू हैं ? नहीं ना ? सभी मुस्लिम हैं लेकिन फिर भी हमारे देश के कुछ लोगो तालिबान के साथ खड़े हैं. इनकी मानसिकता पर क्या कहे और क्या बोले. मै सभी मुस्लिम लोगो की बात नहीं कर रहा बहुत से ऐसे मुस्लिम भाई है जो इस तरह की गलत चीज़ो का विरोध भी कर रहे हैं. जो करना भी चाहिए. क्यूंकि हर चीज़ को आप धर्म से जोड़कर देखोगे. गलत को सही कहोगे तो लोग सवाल करेंगे ही.

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