बॉलीवुड में तलाक के बाद का ड्रामा | बॉलीवुड की तलाक संस्कृति ने बरबाद किया देश


ऋतिक रोशन ने जब अपने बचपन के प्यार सुजैन खान से तलाक लिया तो कहने लगे कि हम आपसी सहमति से तलाक ले रहे हैं। हम अच्छे दोस्त थे और अच्छे दोस्त रहेंगे।

फरहान अख्तर ने भी अपनी पत्नी से तलाक लेते समय कहा था कि हम अच्छे दोस्त हैं, हम एक दूसरे पर विश्वास करते हैं। आपसी बातचीत के बाद हम तलाक ले रहे हैं।

अर्जुन रामपाल ने अपनी बीवी से डिवोर्स लेते समय भी ऐसे ही कुछ दोस्ती और अंडरस्टैंडिंग की बातें कहीं थी। आपसी संबंधों में हमेशा एक दूसरे को स्पेस देने, आजाद ख्याली और स्वतंत्रता देने की बात की थी।

पंकज कपूर, शैफ अली खान, करिश्मा कपूर, जुनैद खान सभी ने अपने साथी से दोस्ती के बड़े-बड़े दावे किये। कबीर बेदी ने तो तीन शादियां और तीनों शादी में साथी के साथ दोस्ती के बेहतरीन रिश्तों के दावे किये, फिलहाल चौथी से निभा रहे हैं, देखते हैं, कब तक निभाते हैं ?

कबीर बेदी की बेटी पूजा बेदी तो अखबारों में अच्छे संबंध कैसे कायम रखें, बनाये रखें, आदि विषयों पर आर्टिकल लिखती रहती हैं। अखबार के माध्यम से अपने पाठकों के झगड़े सुलझाती रहती हैं। जोड़ियां बनाती रहती हैं। बताया जाता है कि खुद अपनी जिंदगी में 06 अफेयर और तीन शादियां कर चुकी हैं। पता नहीं ये इतना ज्ञान और हिम्मत लाती कहां से हैं ?

अपने बचपन के प्यार रीना दत्त को तलाक देने के बाद अब अमीर खान और किरण राव भी तलाक की दहलीज पर खड़े हो गए हैं। दोनों ने प्रेस नोट जारी कर कहा है कि हम आपसी सहमति से तलाक ले रहे हैं। हम एक दूसरे को बेहतरीन ढंग से समझते हैं, हम अच्छे दोस्त थे, अच्छे दोस्त रहेंगे और साथ में काम करते रहेंगे।

यार, मेरी तो यह समझ में नहीं आता कि जब ये लोग एक दूसरे को बेहतर ढंग से समझते हैं, एक दूसरे के बेहतरीन दोस्त होते हैं, एक दूसरे के ख़यालात की इज्जत करते हैं, कभी कोई रोक-टोक नहीं करते, आपस में विश्वास करते हैं, उनको स्पेस देते हैं, तो फिर ये तलाक की नौबत कैसे आ जाती है ? ये लोग तलाक क्यों और कैसे ले लेते है?

इन सभी के चलते ही भारत में रिश्तों को महत्व देने वाले लोग अब बात बात पर तलाक ले लेते हैं. सब्जी में नमक कम हैं चल भाई तलाक लेते हैं. पति ने बाहर नहीं घुमाया चल भाई तलाक ले लेते हैं. मेरे मायके वालो की बुराई करता हैं जा तुझे तलाक देती हूँ. तेरी फटी हुयी बासमारु चड्डिया मैं नहीं धो सकती. इससे बेहतर मैं तलाक ले लूँ.

बॉलीवुड वाले तलाक लेते हैं. इनको पैसे की कमी नहीं. मीडिया में प्रेस रिलीज़ दी की आज मौसम सुहाना हैं हम तलाक का एलान करते हैं. बस तलाक हो गया. प्रॉब्लम मिडिल क्लास वालो के साथ हैं.

जैसे ही तलाक की बात शुरू होती हैं. पहले तो दोनों को समझया जाता हैं जब नहीं मानते तो दोनों की फॅमिली वाले बालभर उन्हें कूटते हैं. फिर भी बात नहीं बनती तो दोनों के परिवार वाले आपस में लड़ते हैं. मेरी बेटी की शादी में मैंने इत्तो पैसे खर्च कर दीयों हैं. पहले वो निकाल. एक तो सारे चोर बाराती लेकर आये थे किसी ने चमचा चुरा लिया. किसी ने थाली चुरा लिया. इत्ते कमीने बाराती थीं मेरी चड्डी का नाडा तक निकल ले गए.

इधर से लड़के वाले बोलते हैं. चम्मच तो चुरायेंगे ही ना ..आमरस में ना आम का पता ना रस का पता. ऐसा लग रहा था तालाब का पानी मिलाकर अंधेरे में पीला दिया था. बनारसी पान बोलकर पीपल का पत्ता खिला दिया था. खाने के बाद भारतीयों के हगने के व्यवस्था तक नहीं थीं. अँधेरी रात में खेतो में जाना पड़ा. अंधेरे में किधर किधर क्या क्या घुसा हैं उसके दर्द के निशान आज तक हैं. उसका हर्जाना निकालो पहले फिर तलाक देंगे.

तो कहने के मतलब ये है भाई की बॉलीवुड वाले तलाक बड़ी आसानी से ले सकते हैं. क्यूंकि उनके भीतर ना भावना होती हैं ना प्यार. हनीमून वाला प्रोग्राम शादी के बाद, शादी के दौरान और तलाक के बाद किसी के साथ भी सिचुएशन के हिसाब से चलता हैं. लेकिन इनकी देखा देखी आज इंडिया में हर बन्दा छोटी छोटी बात पर तलाक ले लेता हैं.

शादी ना हो गयी कोल्ड्रिंक की बोतल हो गयी हैं. फ्रीज़ से निकाला , खोला और गटागट पी गए. रिस्तों की कोई अहमियत ही नहीं रह गयी.

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