बॉलीवुड कलाकारों और नेताओं को देश के जवानो का सम्मान देना बंद करो | ये देश और तिरंगे का अपमान हैं


आप सभी से हाथ जोड़कर एक रिक्वेस्ट हैं की इस वीडियो को देखने के बाद जितना हो सकें शेयर करें. अगर आप वाकई मानते हो की ऐसा होना चाहिए. आज आवाज़ उठाओगे तो शायद कल ये आवाज़ चिंगारी बने. सड़क से लेकर संसद तक, इस देश की अदालत तक ये आवाज़ जानी चाहिए. क्यूंकि जो अपमान हमारे देश में तिरंगे का होता हैं वो शायद ही कहीं होता हो.

हमारे देश को आज़ादी खैरात में नहीं मिली हैं. लाखों लोगो ने अपनी जान की कुरबानी दी तब जाकर आज हम आज़ादी से घूम रहे हैं. हालांकि इस आज़ादी के लायक हम लोग है ये आज भी एक खोज का विषय हैं. हम राजनीती, जातिवाद, मेरे धर्म तेरा धर्म, बॉलीवुड कई मामलो पर लड़ते हैं. लेकिन देश के प्रति एक छोटी सी जिम्मेदारी आती हैं तो पीछे हट जाते हैं.

हमारा देश गुलाम रहा क्यूंकि मुग़ल काल से लेकर ब्रिटिश हुकूमत तक हमारे देश में मेरे जफ़र और जयचंदों की कोई कमी नहीं थीं. आज भी हमारे देश में निजी स्वार्थ और कुछ पैसो के लिए ईमान बेचनेवाले कई मेरे जफर और जयचंद मिल जायेंगे.

सरहद पर हमें सुरक्षित रखने के लिए ना जाने कितने ही जवान हंसते हंसते अपने जान कुर्बान कर गए. उन लोगो ने कभी नहीं सोचा की हमारी मौत के बाद हमारे परिवार का क्या होगा ? लेकिन हमें और आपको ये चिंता हैं? इसलिए हम स्वार्थी हैं. लेकिन ठीक है फिर भी देश के प्रति जो लोग छोटी मोती जिम्मेदारिया निभा रहे हैं वो कबीले तारीफ हैं. ज़रूरी नहीं हर इंसान सरहद पर बंदूक लेकर ही लड़े.

सरहद पर जब एक सिपाही शहीद होता हैं तब अंतिम संस्कार की प्रक्रिया के पहले उस सिपाही को राजकीय सम्मान दिया जाता हैं. उसके पार्थिव शरीर पर वो तिरंगा लपेटा जाता हैं जो शान के साथ इस खुले आसमान में लहराता हैं.

भारतीय झंडा संहिता के अनुसार राष्ट्रीय ध्वज को सिर्फ सैनिकों या राजकीय सम्मान के वक्त शव को लपेटने के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके लिए अलावा कभी भी झंडे को लपेटा नहीं जाता है.

अंतिम संस्कार के दौरान मिलिट्री बैंड की ओर से ‘शोक संगीत’ बजाया जाता है और इसके बाद बंदूकों की सलामी दी जाती है. बंदूकों की सलामी का भी एक एक खास तरीका होता है और जिसमें बंदूक खास तरीके से बंदूक झुकाई और उठाई जाती है.

अब ये राजकीय सम्मान दिया किसे जाता हैं. ये भी जान लीजिये जो व्यक्ति राजनीती, साहित्य, सिनेमा, कला, खेल, विज्ञान, समाजसेवा, जैसे कई क्षेत्रों में दी जाती हैं जिसने अपने अपने क्षेत्र में इस देश के लिए बड़ा काम किया हो.

लेकिन इसमें दो चीज़ो में बहुत बड़ी प्रॉब्लम हैं. एक राजनीती और दूसरा बॉलीवुड. इस क्षेत्र में ये राजकीय सम्मान नहीं दिया जाना चाहिए. राजनीती में इसलिए नहीं देना चाहिए क्यूंकि राजनीती में कोई भी इंसान साफ़ नहीं होता. अपने जीवन में भ्रस्टाचार से लेकर, घोटाला, देशद्रोह, ना जाने कितने ही लोगो की हत्या, हत्या के लिए उकसाना जैसे काम किये हो.

अब आते हैं बॉलीवुड पर. पिछले कई सालो में आपने देखा होगा की बॉलीवुड में कई सितारे मरे और उन्हें भी इसी तरह का राजकीय सम्मान दिया गया था. अब बहुत से लोगो को नहीं पता होगा की बॉलीवुड के सितारों ने कौन सा ऐसा काम कर दिया था जिसके चलते इन्हे राजकीय सम्मान दिया गया.

तो बात ऐसी हैं की जिन बॉलीवुड के सितारों को पद्म विभूषण, पद्म भूषण तथा पद्म श्री दिया गया हो उनकी मौत के बाद उन्हें राजकीय सम्मान दिया जाता हैं या फिर राज्य सरकार यह निर्णय लेती हैं की जिस इंसान की मौत हुयी हैं उसका कद कितना बड़ा था.

इस बात का फ़ैसला आम तौर पर राज्य का मुख्यमंत्री अपनी कैबिनेट के वरिष्ठ साथियों से चर्चा करने के बाद करता है.

एक बार फ़ैसला हो जाने पर राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को जानकारी दी जाती है जिनमें डिप्टी कमिश्नर, पुलिस कमिश्नर, पुलिस निरीक्षक शामिल हैं. इन सभी पर राजकीय सम्मान की तैयारियों का ज़िम्मा होता है.

अब आपने देखा होगा की शशि कपूर, श्रीदेवी और दिलीप कुमार को राजकीय सम्मान दिया गया. लेकिन वही पर राजेश खन्ना, विनोद खन्ना, शम्मी कपूर जैसे दिग्गज कलाकारों को राजकीय सम्मान नहीं दिया गया था. पिछले 06 सालों में अलग अलग क्षेत्र से ४३ लोगो को राजकीय सम्मान दिया गया.

यानी राज्य का मुख्यमंत्री ये निर्णय लेता हैं की मरने वाले शक्श का कद कितना बड़ा था. उसे राजकीय सम्मान दिया जाना चाहिए या नहीं ? अब आप सोचिये एक बॉलीवुड सेलिब्रिटी जिसके फिल्मे अंडरवर्ल्ड के पैसे पर बनती हैं. जिसमे वो देश विरोधी बातें दिखाता हैं. किसी भी धर्म या जाती को अपमानित करता हैं. ड्रग्स का सेवन करने से लेकर उसका धंदा तक करता हैं. पैसे लेकर देश विरोधी में ट्वीट्स लिखता हैं. क्या ऐसे बॉलीवुड सितारे को उसकी मौत के बाद राजकीय सम्मान देना सही हैं.

ऐसे कई परकार हैं जो दो धर्म के लोगो को आपस में लड़ाते हैं. समाज में गंदगी फैलाते हैं. क्या उन्हें राजकीय सम्मान देना तिरंगे का अपमान नहीं हैं?

अगर राजकीय सम्मान देना ही हैं तो बेशक दो चाहे वो किसी भी क्षेत्र से हो लेकिन उसका किरदार साफ़ होना चाहिए. वरना ऐसे लोगो को कल को सम्मान मिलेगा जिसे पदम् पुरस्कार मिला हो लेकिन वो उस लायक नहीं तो ये भारत देश के तिरंगे का अपमान हैं. हालांकि जब से मोदी सर्कार बनी हैं तब से इस देश में जो सही हक़दार हैं उन्हें ही पदम् पुरस्कार मिल रहे हैं.

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