बॉलीवुड करे तो सही आम इंसान करे तो गलत | सबके लिए अलग नियम | पूरा बॉलीवुड एक्टिव हो जाता


किसी भी तरह का क्राइम अच्छा या बुरा नहीं होता. क्राइम सिर्फ क्राइम ही होता हैं. लेकिन बॉलीवुड के हिसाब से एक होता हैं अच्छा क्राइम और एक होता है बुरा क्राइम. इनके लिए कानून भी अलग अलग तरह से काम करता हैं. इसे ही शास्त्रों में भेदभाव बताया गया हैं.

केरल में जब एक हथिनी को मार दिया जाता हैं तब बॉलीवुड के आंसू रूक नहीं रहे थे क्यूंकि ये क्राइम एक आम इंसान ने किया था जो की क्रिमिनल ही था. लेकिन सलमान खान पर जब काले हिरन का शिकार करने का मामला आता हैं तब पूरा बॉलीवुड खामोश हो जाता हैं. क्यों ? क्यूंकि वो सलमान खान हैं भाई. वो जेल गया तो निर्माताओं के करोडो रूपये डूब सकते हैं.

एक आम इंसान अगर उसने किसी का बलात्कार किया तो पूरा बॉलीवुड हैशटैग चलता हैं. वैसे बॉलीवुड रेप के हर मामले में ऐसा नहीं करता. जिस मामले में राजनीती होती हैं उसमे करता हैं. इन्हे किसी को इन्साफ दिलाने की कोई चाहत नहीं होती बस अपना अपना एजेंडा चलना होता हैं. जैसे जम्मू कठुआ वाला मामला जिसमे करीना खान, स्वरा भास्कर, विशाल डडलानी, ऋचा चड्ढा, सोनम कपूर, फरहान अख्तर, अनुराग कश्यप, जैसे निम्न कोटि के बॉलीवुड नचनीया.

लेकिन कुछ दिन पहले भूषण कुमार पर एक लड़की ने रेप का आरोप लगाया तो सबकी बोलती बंद हैं. क्यों? क्यूंकि बॉलीवुड की आधी से अधिक फिल्मे तो वही प्रोडूस करता हैं. उसके खिलाफ बोलना मतलब करियर समाप्त करने जैसा हैं. वैसे भी बड़े आदमी पर सिर्फ आरोप लगते हैं वो साबित कभी नहीं होते.

राज कुंद्रा का मामला देख लो. एक तो गलती की हैं पूरा इंटरनेशनल रॉकेट चला रहा था. लेकिन शिल्पा का कहना हैं की उनका पति बेगुनाह हैं. वो अश्लील फिल्म नहीं इरोटिक फिल्म बना रहा था. उस हिसाब से तो जॉनी सीन्स और मिया खलीफा को कह सकते हैं की वो अश्लील फिल्म नहीं कर रहे वो तो एक्टिंग कर रहे हैं.

हम ये भी कह सकते हैं की इस तरह के लोग समाज को एक नयी दिशा देने का काम कर रहे. क्या प्रॉब्लम हो गयी अगर भारत में अश्लील फिल्म इंडसट्री बन रही. देश की तर्रकी ही तो हो रही. एकता कपूर को उनके समाजहित कार्यों के लिए पदमश्री मिला ही हैं. कल को राज कुंद्रा जी को भी मिल जायेगा.

हैरानी की बात ये हैं की जो काम राज कुंद्रा कर रहा था वही काम उल्लू ऐप और ऑल्ट बालाजी की एकता कपूर भी कर रही हैं लेकिन सभी के लिए नियम और कानून अलग अलग क्यों हैं? एकता कपूर तो इंडियन आर्मी तक को बदनाम कर देती हैं लेकिन कोई हाथ तक नहीं लगा पाता.

हमारे देश में सब चलता हैं. आप खुले आम जुवा नहीं खेल सकते सट्टा नहीं लगा सकते. लेकिन ड्रीम 11 पर लीगल तरीके से जुवा खेल सकते हैं और सट्टा भी लगा सकते हैं. पहले बात पदमश्री पदमविभूषण ये जितने भी सम्मान हैं इसे बॉलीवुड को क्यों दिया जाता. जबकि दुनिया भर के गलत काम ये लोग करते हैं. बॉलीवुड का हाल तो ऐसा हैं की एक हाथ से पाप करो दूसरे से NGO खोलकर गरीबो की मदद करो. इंसाफ बराबर.

गाडी चलाते वक्त रूल्स तोडा तो फाइन लग जाती. किसी को आपकी गाडी से थोड़ा नुक्सान हुआ तो जेल की सजा लेकिन बॉलीवुड या कोई पैसे वाला इंसान अपनी गाडी से कुचलकर दस लोगो को जान से मार दें और वह से भाग जाएं. तो कोई बात नहीं. उसका वकील भी बेगैरत बनकर थोड़े से पैसे लेकर उसे बचने आ जाता.

जो बॉलीवुड ड्रग्स जैसा नशा करता हैं वो विज्ञापन में करोडो लेकर नशा मुक्ति अभियान का हिस्सा बन जाता हैं. जो बॉलीवुड रेप जैसी चीज़ो को बढ़ावा देता हैं वही उस पर ज्ञान भी देता हैं.

हमारी मेंटालिटी क्या हैं ? कोई फिल्म में अच्छी एक्टिंग करता हैं और थोड़े से डोनेशन करता हैं तो उसके सारे पाप माफ़ हो जाते हैं. हम किसे अपना आइडल बना रहे ये हमें ही नहीं पता. लेकिन ये पता करने की ज़रूरत हैं.

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