दिलीप कुमार के निधन पर मीडिया का बेतुका सवाल जलाया जायेगा या दफनाया जायेगा ?


ट्रेजेडी किंग के नाम से मशहूर दिलीप कुमार साब की 98 वर्ष की उम्र में मौत हो गयी. कई सालो से बीमार थे. बिस्तर पर थे. कई बार खबर सुनते की हॉस्पिटल गए और ठीक होकर घर लौट आये लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ. उनकी पत्नी सायरा बानो उनका काफी ध्यान रखा करती थीं. सायरा बानो उम्र में दिलीप कुमार जी से 22 साल छोटी हैं.

दिलीप कुमार जी का जन्म पेशावर में हुआ था जो अब पाकिस्तान का हिस्सा हैं. उनका असली नाम मोहम्मद युसूफ खान था लेकिन परदे पर उन्होंने अपना नाम दिलीप कुमार ही रखा. पहली फिल्म 1944 की ज्वार भाटा थीं और आखिरी फिल्म साल 1998 की किला थीं. अपनी फ़िल्मी लाइफ में उन्होंने कई अवार्ड्स जीते भारत में सबसे ज़्यादा अवार्ड जीतने के मामले में उनका नाम गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज हैं.

१९८० में उन्हें शेरिफ ऑफ़ मुंबई का सम्मान भी दिया गया. पदम् भूषण, पद्म विभूषण और दादा साहेब फाल्के अवार्ड से भी उन्हें सम्मानित किया गया. पाकिस्तान का सर्वोच्य सम्मान ‘निशान ए इम्तियाज’भी दिया गया. इस अवार्ड को स्वीकार किये जाने पर शिवसेना ने इसका विरोध किया था.

क्यूंकि ‘निशान ए इम्तियाज सिर्फ पाकिस्तान के नागरिक को दिया जाता हैं जिसने पकिस्तान के लिए बेहतर काम किया हो. अब यहाँ पर शिवसेना ने ये सवाल खड़ा कर दिया की दिलीप कुमार देशभक्त नहीं हैं. बाद में पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी बाजपयी से राय लेने पर की उन्हें क्या करना चाहिए. पाकिस्तान जाकर ये सम्मान लेना चाहिए या नहीं.

तब अटल जी के कहने पर वो पाकिस्तान गए और इस सम्मान को लिया. लेकिन कारगिल युद्ध के दौरान कई भारतीय जवान शहीद हुए तो दिलीप कुमार के घर के बार शिवसेना ने प्रदर्शन किया की पाकिस्तान का वो सम्मान लौटा दो. दिलीप कुमार फिर अटल जी से मिले तब अटल जी ने कहा फिल्म स्टार दिलीप कुमार की देशभक्ति और देश के प्रति उनके समर्पण को लेकर कोई शक नहीं है।’

दरअसल दिलीप कुमार पर एक समय पाकिस्तान का जासूस होने का इलज़ाम लग चुका था. 60 के दशक में लगा था जब दिलीप कुमार के यहां कोलकाता पुलिस ने छापा मारा. दिलीप कुमार के घर पर कार्रवाई का आधार ये था कि कोलकाता पुलिस ने एक पाकिस्तानी जासूस को गिरफ्तार किया था, जिसके पास से एक डायरी मिली थी जिसमें दिलीप कुमार का नाम था. इस मामले को लेकर काफी बवाल मचा तथा दिलीप कुमार की इमेज पर भी सवाल खड़े हुए.

बाद में मामला इस तरह रफा दफा कर दिया गया था वो पाकिस्तानी जासूस दिलीप कुमार का प्रशंसक था. इसको लेकर यह भी आरोप लगाया जाता है कि कुछ लोगों के दवाब में ये थ्योरी गढ़ी गई थी कि पकड़ा गया जासूस दिलीप कुमार का प्रशंसक था. ये अभी आरोप लगता है कि दिलीप कुमार उर्फ़ यूसुफ़ खान के घर से रेडियो ट्रांसमीटर बरामद किया गया था, जिससे वह फिल्म इंडस्ट्री में मुसलमान जासूसों का एक ग्रुप चलाते हैं तथा उसके लीडर हैं.

बाद में इस बात का कुछ पता नहीं चल सका. मामला रफा दफा हो गया. लेकिन जब निशान ए इम्तियाज़ पाकिस्तान से मिला तो लोगो ने कहा की ये पाकिस्तान की सेवा करने एक लिए ही मिला हैं. लेकिन तमाम दबाव के बावजूद दिलीप कुमार ने पाकिस्तानी सर्वोच्च नागरिक सम्मान वापस नहीं किया था.

अब उनकी मौत पर पत्रकार अशोक चौहान ने ट्वीट किया “दिलीप कुमार नाम से प्रसिद्ध अभीनेता मोहम्मद यूसुफ़ खान नहीं रहें।” फिर एक और ट्वीट किया जिसमे लिखा “जिस दिलीप कुमार नाम से प्रसिद्धी, पैसा और प्रतिष्ठा पायीं उस नाम के अनुसार जलाया जायेगा या यूसुफ़ खान नाम से दफ़नाया जायेगा? अब इस चीज़ को लेकर कई लोग हिन्दू मुस्लिम वाले एंगल को लेकर भीड हैं सोशल मीडिया पर.

दिलीप कुमार ने अंगेजी हुकूमत के खिलाफ एक बयान दिया था जिसके चलते उन्हें जेल में डाल दिया गया था. उनका कहना था “भारत की लड़ाई एकदम सही है.अग्रेंजी शासक गलत हैं. बस फिर क्या था. अंग्रेजों के विरोध में भाषण देने की वजह से दिलीप कुमार को येरवाड़ा जेल भेज दिया गया था.”

वैसे तो दिलीप कुमार और सायरा बानो के प्यार के बहुत चर्चे हैं लेकिन शादी के 16 साल बाद उन्होंने एक ऐसा कदम उठाया, जिससे सायरा बानो का दिल टूट गया था. दरअसल, दिलीप कुमार सायरा बानो को अपनी जान से भी ज्यादा चाहते थे, लेकिन उन्होंने गुपचुप तरीके से पाकिस्तानी ब्यूटी असमा रहमान से शादी कर ली थी.

ट्रेजेड़ी किंग हमेशा इन खबरों को नकारते आए. हालांकि, काफी सालों बाद दिलीप कुमार ने अपनी दूसरी शादी पर चुप्पी तोड़ी थी और शादी को अपनी बड़ी भूल करार दिया था. ऑनलाइन मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिलीप कुमार ने असमा से हैदराबाद में शादी की थी. शादी करने के बाद दिलीप कुमार उन्हें अपने पाली हिल वाले बंगले पर ले आए थे. कई दिनों तक असमा वहां रहीं, लेकिन तब तक ही जब तक सायरा बानो को इसकी भनक नहीं थी.

बात दरअसल ऐसी थीं की सायरा बनो शूटिंग पर काम के दौरान बेहोश हो गयी थीं उनका ब्लड प्रेशर बढ़ गया और आठवे महीने में उनका मिस कैरेज हो गया वो माँ नहीं बन सकी. इस बात का दिलीप कुमार को बहुत धक्का लगा. मीडिया में ऐसी कहानी हैं की दूसरी शादी भी उन्होंने इसी वजह से की थीं ताकि एक औलाद हो सकें.

लता मंगेशकर जी उन्हें राखी बाँधा करती थीं उनकी मौ टपर ट्वीट में उन्होंने लिखा “यूसुफ़ भाई आज अपनी छोटीसी बहन को छोड़के चले गए.. यूसुफ़ भाई क्या गए, एक युग का अंत हो गया. मुझे कुछ सूझ नहीं रहा. मैं बहुत दुखी हूँ, नि:शब्द हूँ.कई बातें कई यादें हमें देके चले गए.

खैर इन निशान ऐ इम्तियाज़ और जासूसी वाली बात छोड़ दिए जाये तो उनके ऊपर कोई इलज़ाम नहीं हैं. दिलीप कुमार ने कभी देशविरोधी बयान नहीं दिया जैसा की आजकल के अभिनेता करते हैं. उनकी ज़्यादातर फिल्मे भी देशहित को लेकर थीं. फिल्म क्रांति और नया दौर में उनका अभिनय बेहतरीन था. वैसे फ़िल्मी दुनिया के एक युग का अंत हो गया.

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