क्या फ़र्ज़ी है NCB की रेड कांग्रेस ने दिया सबूत कहा शाहरुख़ को फंसाया जा रहा


बीजेपी बॉलीवुड और महाराष्ट्र सरकार को बदनाम करने की कोशिश कर रही हैं. एनसीपी के नेता नवाब मालिक उन्होंने पूरी एनसीबी की टीम पर सवाल खड़ा कर दिया हैं. बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान मामले में किसी भी प्रकार का ड्रग्स मिला ही नहीं है। इस बात को रखते हुए नवाब मालिक ने दो सबूत दिए हैं जो वाकई एनसीबी पर सवाल खड़े करते हैं.

आर्यन खान की अरेस्ट के बाद एक बिना बाल वाले इंसान की तस्वीर वायरल हुयी थीं जिसका नाम केपी गोसावी बताया जा रहा हैं. नवाब मालिक का कहना हैं की ये शक्श एक प्राइवेट डिटेक्टिव हैं.

फिर वो शक्श जो अरबाज़ मर्चेंट को दौड़ते हुए एनसीबी के ऑफिस ले जा रहा था मनीष भानूशाली. ये कोई और नहीं बल्कि बीजेपी का नेता हैं.जिसकी तस्वीर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के साथ भी है. ऐसे में एनसीबी को यह बताना चाहिए कि आखिर उनका और भानुशाली का क्या संबंध है?

उनका ये कहना हैं की जो तस्वीर आर्यन खान की केपी गोसावी के साथ हैं वो जोनल डायरेक्टर ऑफिस की है.आखिर केपी गोसावी का जोनल डायरेक्टर के साथ क्या संबंध है? एनसीपी को इस बात का उत्तर देना चाहिए. आखिर दो निजी व्यक्तियों ने यह कार्रवाई कैसे की? उन्हें किसने यह अधिकार दिया?

21 सितंबर को मनीष भानुशाली दिल्ली में कुछ मंत्रियों के घर पर थे और उसके बाद 22 तारीख को गांधीनगर में। 21 और 22 तारीख को ही गुजरात के बंदरगाह पर भारी मात्रा में ड्रग्स बरामद किया गया था। ऐसे में वह 28 तारीख तक गुजरात में क्या कर रहा थे और किन-किन मंत्रियों से मिले। इसका उत्तर एनसीबी को देना चाहिए।

लेकिन इस पर मनीष भानुशाली का ये कहना हैं की ‘नवाब मलिक ने मुझ पर गलत आरोप लगाए हैं। बीजेपी की इन गिरफ्तारियों से कोई लेना देना नहीं है। मुझे 1 अक्टूबर को जानकारी मिली थी कि एक ड्रग्स पार्टी होनी है और इसकी जानकारी मैंने एनसीबी को दी। क्योंकि मेरे पास इसकी जानकारी थी इसलिए मैं एनसीबी अधिकारियों के साथ जहाज पर था।

भानुशाली ने आगे कहा, ‘भाजपा में मुझे कोई आधिकारिक पद प्राप्त नहीं है। मैंने देश का एक जागरुक नागरिक होने के नाते यह जानकारी दी। मुझे पता चला है कि पिछले महीने ड्रग्स मामले में नवाब मलिका का एक रिश्तेदार पकड़ा गया था।

भानुशाली ने आगे कहा कि मैं मलिक के खिलाफ मानहानि का केस करूंगा। उन्होंने मेरी जिंदगी को खतरे में डाल दिया है। मैं प्रशासन से मुझे सुरक्षा मुहैया कराने का अनुरोध करूंगा.

अब देखिये इसमें दो बातें हैं. अगर राजनीतिक हिसाब से देखे तो मनीष भानुशाली का वहा होना वाकई गड़बड़ वाली बात हैं. कोई भी राजनीतिक पार्टी का सदस्य भले उसे कोई पद प्राप्त हो या ना हो अगर किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़ा हैं तो उसे वहा नहीं होना चाहिए. भले ही उसने रेड की जानकारी दी हैं. वो एक ऑफिसियल रेड थीं तो वहा मनीष का होना वाकई राजनीतिक सवाल खड़ा करता हैं.

दूसरी बात अगर मनीष एक साधारण बीजेपी नेता हैं तो उन्हें कैसा पता चला की किस दिन कहा ड्रग पार्टी होने वाली हैं. यानी अंदर की खबर एक साधारण से नेता को कैसे पता चली.

तीसरी बात जो केपी गोसावी हैं वो भी एनसीबी टीम का हिस्सा नहीं हैं तो उसे भी वहा नहीं होना चाहिए. लेकिन ये भी कह सकते हैं की जैसा बताया जा रहा है की वो एक प्राइवेट डिटेक्टिव हैं तो हो सकता हैं की इस ड्रग पार्टी की जानकारी उसने ही दी हो और इस तरह के डिटेक्टिव का किसी भी पुलिस, सीबीआई, एनसीबी से जुड़ना आम बात हैं तो वो उस टीम का हिस्सा हो सकता हैं.

पांचवी बात नवाब मालिक ने जो कही हैं की रेड फर्जी थीं. तो इस बात से मेरा इंकार है. क्यूंकि रेड फर्जी नहीं थी. क्रूज पर जो पार्टी हो रही थीं उसकी वीडियो अरेस्ट किये गए लोगो के मोबाइल से बरामद की गयी हैं. और अगर रेड फर्जी हैं तो आर्यन शिप पर कैसा पहुंचा. इतनी रात वो वहा क्या कर रहा था. ये बात उसने अपने पापा शाहरुख़ खान और वकील मानशिंदे को क्यों नहीं बताई. तो रेड फर्जी नहीं हैं.

वैसे एनसीबी ने कह दिया हैं की जो नवाब मालिक ने कहा हैं हम कोर्ट में बताएँगे. और ये रेड फर्जी नहीं हैं. एनसीबी जो भी करती हैं कानूनी दायरे में रहकर करती हैं. वे बॉलीवुड सेलब्रिटीज के पीछे नहीं पड़े हुए हैं.

उन्होंने कहा मैं कोई पोस्टर बॉय नहीं हूं, मैं और हम सभी गवर्नमेंट सर्वेंट हैं और जो हमारा काम है वो कर रहे हैं. एनसीबी एक प्रोफेशनल ऑर्गनाइजेशन है, जो भी NDPS रूल का उल्लंघन कर रहा है हम उन पर एक्शन ले रहे हैं और लेते रहेंगे.

पहली बात ये भी ये हैं की अगर इसमें आर्यन खान नहीं होता तो इतना बवाल नहीं होता. और एनसीबी की टीम को तो ये पता नहीं ना की जहा वो रेड डालने जा रहे हैं वहा शारुख खान का लड़का आर्यन भी होगा. ऐसा तो है नहीं की बीच सड़क से आर्यन खान को उठा लिया गया.

अब नवाब मालिक कहते हैं की बॉलीवुड और महाराष्ट्र सरकार को बदनाम किया जा रहा हैं. पहली बात जब आप राजनीतिक पार्टी से हो तो बॉलीवुड को आपको सपोर्ट नहीं करना चाहिए. क्या राज कुंद्रा जो काम कर रहा था वो फर्जी था. ऐसा तो है नहीं. इतने सारे जो केस आ रहे बॉलीवुड से क्या वो सब नकली है. बिलकुल नहीं.

एक बात और महाराष्ट्र सरकार की बदनामी तब क्यों नहीं होती जब उनकी सरकार का मंत्री अनिल देशमुख क्या और किस जुर्म के आरोप लगे हैं. परमबीर सिंह पर जो आरोप लगते हैं फिर वो फरार हो जाते हैं. सिर्फ न्यूज़ दिखाने के चलते अर्नब गोस्वामी को जिस तरह से अरेस्ट किया गया. और जो अरेस्ट करनेवाला था वो कौन था आज जेल की सजा काट रहा हैं.

मनसुख हिरेन की हत्या की जाती हैं. क्या ये सब महाराष्ट्र की बदनामी नहीं करता. कंगना ने पंगा लिया तो ऑफिस तोड़ दिया गया वो भी सिर्फ एक घंटे की नोटिस में. अगर कंगना का ऑफिस गलत तरीके से बनाया गया था वो उसे बनते समय क्यों नहीं रोका गया और हर चीज़ की एक प्रक्रिया होती हैं ऐसा नहीं होता की नोटिस चिपकाए ही एक घंटे में किसी का महल गिरा दो.

शाहरुख़ सलमान कांग्रेस के करीबी हैं इसलिए कांग्रेस को बुरा लग रहा हैं. सुशांत की मौत के बाद जिस घर को सील करना चाहिए था वह तो खुले आम कोई भी आना जाना लगा रखा था. इस बात पर ध्यान क्यों नहीं जाता. तो रेड फर्जी नहीं थी ये बात तय हैं. केपी गोसावी हो सकता हैं प्राइवेट डिटेक्टिव के तौर पर एनसीबी से जुड़ा हो और उसने मनीष को भी बुलाया हो. हां इतना ज़रूर कहूंगा की एक राजनीतिकपार्टी के मेंबर का वह होना सही नहीं . लेकिन रेड फर्जी नहीं हैं


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