क्या सुशांत मामला भी ऐसे ही खत्म कर दिया जायेगा ? इशारा तो कुछ ऐसा ही हैं.


सात साल पहले दिल्ली के होटल में कांग्रेस के एक दिग्गज नेता शशि थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर की मौत हो जाती हैं. खबर ये आती हैं की सुनंदा पुष्कर ने आत्महत्या कर ली हैं. सारा इलज़ाम गया कांग्रेस नेता शशि थरूर के ऊपर. एम्स की रिपोर्ट में भी जो जांच पड़ताल की गयी उसमे ये बात सामने आयी की उन्हें ज़हर दिया गया हैं.

ये ऑटोप्सी रिपोर्ट थीं जो एम्स के डॉक्टर सुधीर गुप्ता की देखरेख में बनी थीं. उस रिपोर्ट में ये कहा गया था की सुनंदा पुष्कर की मौत प्राकृतिक कारणों से नहीं बल्कि जहर के कारण हुई थी. जिसे इंजेक्शन के जरिए डाला गया.

हालांकि, डॉक्टरों ने बाद में ये भी स्पष्ट किया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कभी भी ये बात नहीं कहीं गयी कि ये एक ‘हत्या’ थी, और जांच एजेंसियों को ये पता लगाना चाहिए था कि जहर का तरीका क्या था और किस पदार्थ का इस्तेमाल किया गया था.

डॉक्टर गुप्ता ने आगे कहा, ‘सुनंदा पुष्कर मौत मामला, चाहे हत्या हो या आत्महत्या या दुर्घटना, ये हमेशा जांच एजेंसी को निर्धारित करना है. फोरेंसिक मेडिसिन विशेषज्ञ संभावित कारणों का पता लगाने के लिए हैं, जो जांचकर्ताओं की मदद कर सकते हैं.’

अब शशि थरूर तो बच गए. बेगुनाह साबित हो गए. जिस डॉक्टर सुधीर गुप्ता ने सुनंदा पुष्कर की रिपोर्ट में पहले कहा की उसे ज़हर दिया गया हैं उसी एम्स ने शशि थरूर को क्लीन चीट भी दे दी. अब इसी डॉक्टर सुधीर गुप्ता ने पहली कहा था की सुशांत की मौत साधारण नहीं हैं. हत्या का मामला हो सकता हैं और बाद में उसी सुधीर गुप्ता ने कह दिया की सुशांत की मौत आत्महत्या हैं ये मामला हत्या का नहीं हैं.

अगर आपके पास पैसा है. नाम हैं. ताकत हैं. तो हमारे देश में कानून की कोई इज्जत नहीं हैं. कानून की आँखों पर जो पट्टी बंधी होती हैं वो इसलिए ही बंधी हैं की यहाँ बैठे लोग कितने वाहियात हैं और मै इन चीज़ो को देख नहीं सकती. पैसे से कानून, पुलिस, जज, डॉक्टर, वकील, गवाह, सबूत हर चीज़ खरीदी जा सकती हैं.

सुशांत केस में भी यही हो रहा हैं. फिर बाद में बॉलीवुड वाले एक फिल्म बना देंगे. नो वन किल्ड जेसिका जैसा. नो वन किल्ड सुशांत एंड नो वन किल्ड सुनंदा पुष्कर. और फिर करोडो कमा लेना. दो चार अवार्ड्स भी अपने ऑफिस में सजा कर रख लेना. जितना हम सोचते हैं दुनिया उससे कहीं ज़्यादा निर्दयी लोगो से भरी हैं.

वैसे भी हमारे देश में कानून सिर्फ आम इंसान के लिए होता हैं. चाहे गलत ड्राइविंग के लिए हो, चाहे हेलमेट ना लगाओ तब, ट्रैन में बिना टिकट चढ़ जाओ तब. लेकिन हमारे देश के नेता कानून से बड़े हैं. कानून के हाथ लंबे सिर्फ आम इंसान के लिए होते. नेताओ के अपराध के समय कानून के हाथ काटकर दो बिलोंग छोटा कर दिया जाता हैं.

जिया खान, सुशांत सिंह राजपूत, दिव्या भारती, सुनंदा पुष्कर, काला हिरन, हिट एंड रन केस में मारे गए लोग, उसकी जांच में अहम गवाह वो पुलिस वाला इन्साफ किसी को नहीं मिलता. मिलती है तो सिर्फ तारिख.

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