ऐसा घटिया काम कोई महानायक नहीं करेगा बुढ़ापे में अमिताभ का घिनौना काम


बॉलीवुड में सिर्फ एक ही धर्म है पैसा. लेकिन पैसे कमाने की चूल अगर बुढ़ापे में भी किसी इंसान के भीतर से खत्म ना हो तो ऐसे इंसान को मन की शान्ति कभी नहीं मिलती. अमिताभ बच्चन महानायक तो मै नहीं कहूंगा. क्यूंकि सिर्फ कुछ हिट फिल्मे कर देने से की महानयक बन जाये ऐसा मै नहीं मानता.

इस हिसाब से तो सनी लीओन, मिया खलीफा भी महानायिका हैं. क्यूंकि इनकी फिल्मे भी सुपरहिट होती हैं. भले ही लोग छुपकर देखते हैं लेकिन है तो महानायक.महानायक अच्छे कर्म से कोई बनता हैं. वो लोगो के लिए एक मिसाल होता हैं की मुझे मेरे महानायक जैसा बनना हैं.

मुझे अरुण गोविल जी जिन्हे हम प्रभु राम के नाम से जानते हैं. जिन्होंने रामायण में राम बनकर उस किरदार को सार्थक कर दिया. उनका एक इंटरव्यू था जो कपिल शर्मा शो में आये थे उन्होंने कहा था की राम का किरदार करने के चलते जब आम जनता मुझे कहीं मिलती तो वो मेरे पैरों पर गिर जाते थे. ऐसा लगता था जैसे प्रभु श्री राम का पूरा रूप मै हूँ. इतनी इज्जत मिलती थीं.

लेकिन एक बार जब किसी फिल्म के शूटिंग के दौरान मुझे किसी बूढ़ी अम्मा ने सिगरेट पीते देखा था तो मुझे बहुत फटकार लगाई थीं क्यूंकि उस महिला ने मुझे उसी रूप में देखा था यानी की प्रभु श्री राम जो उसे बड़ा ख़राब लगा था. उसके बाद से लेकर आज तक मैंने कभी सिगरेट को हाथ नहीं लगाया. कभी कोई नशा नहीं किया.

अब इतनी कहानी सुनाने का मतलब ये हैं की अमिताभ बच्चन खुद को महानयक कहते हैं लेकिन काम बड़ा ही घटिया किया हैं. अमिताभ बच्चन कमला पसंद का विज्ञापन करते नज़र आये हैं. जिसे देखकर लोगो ने जमकर फटकार लगाई हैं.

जो पान मसाला, तम्बाकू, सिगरेट इस देश के कई युवाओं को बर्बाद कर रहा हैं. कैंसर जैसी बीमारिया लेकर आ रहा हैं ना जाने कितने घर बर्बाद होते हैं. उस विज्ञापन में अमिताभ का दिखना बेहद शर्मनाक है. इस तरह के विज्ञापन इसलिए इन लोगो से कराये जाते है ताकि जो देखे वो ये सोचे की जब अमिताभ बच्चन खा सकता हैं तो मै क्यों नहीं.

अमिताभ तो पेप्सी का भी विज्ञापन करते थे क्या हुआ ? अतड़ियां काटकर निकालनी पडी. लोग क्या बोल रहे वो सुनो. किसी का कहना हैं की जैसे जैसे ये इंसान बुद्धा हो रहा हैं इसकी भीतर की लालच बढ़ रही हैं और इंसानियत खत्म हो रही हैं.

किसी ने लिखा ” क्या करे बेटा कमाता नहीं हैं इसलिए बाप को तरह तरह के गलत काम करने पड़ते हैं. किसी ने लिखा “‘अमिताभ सर, आपको पैसों की दिक्कत है क्या जो आप गुटखा बेच रहे हैं?’

किसी ने लिखा फिल्मे नहीं चल रही तो ऐसे घटिया काम करने पड़ रहे हैं. किसी ने लिखा ” ‘अमिताभ बच्चन जी, कमला पसंद का ये विज्ञापन देखकर बड़ी निराशा हुई। आप जैसे स्टार्स पान मसाला के खिलाफ जागरूकता फैलाने के बजाए लोगों को इसे खाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। कम से कम आप तो ये नहीं करते।’

अब आप सोचिये चेहरे फिल्म की रिलीज़ के दौरान अमिताभ पर ऐसी बात सामने आयी थी की चेहरे के लिए उन्होंने एक रुपया नहीं लिया. फ्री में काम किया है यहाँ तक की ट्रेवल और होटल का खर्चा भी खुद ही उठाया हैं.

जो इंसान पैसे के लिए पान मसाला का विज्ञापन कर सकता हैं क्या उसने अपना फ्री टाइम चेहरे फिल्म के लिए दिया होगा. वाह प्रमोशन का क्या तरीका दिखाया था.


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