अर्जुन कपूर ने कहा सिनेमाघर जानेवाले दर्शक बेवक़ूफ़ होते हैं OTT पर लोग पसंद करते मुझे


अर्जुन कपूर भारतीय सिनेमा के वो महान अभिनेता हैं. और महानता के साथ साथ नेपोटिस्म की दुनिया के वो इकलौते वारिस हैं जो कितनी भी फ्लॉप फिल्मे दे दें लेकिन उनके पास एडवांस में दो चार फिल्म पडी हैं जिसकी शूटिंग शुरू होनी बाकी हैं. यहाँ सुशांत अपनी फिल्म सोन चिड़िया के लिए इंस्टाग्राम पर लोगो से निवेदन कर रहे थे की मेरी फिल्म देख लो वरना आगे फिल्मे नहीं मिलेगी.

क्यों ? क्यूंकि वो एक ऑउटसाइडर थे अगर मेहनत नहीं करेंगे. और मेहनत करने के बाद भी फिल्मे नहीं चलेगी तो करियर समाप्त हो जायेगा. इस बात का डर लगा रहता था. लेकिन उसके बाद भी उनके पास आठ फिल्मे थीं जिसमे से बॉलीवुड गैंग ने बड़ी ही प्लानिंग के साथ सभी फिल्मो से बाहर करवा दिया.

एक ऑउटसाइडर को इंडसट्री में जगह बनाने के लिए इतनी मेहनत करनी पड़ती हैं लेकिन नेपोटिस्म की दुनिया देख लो. कितनी भी फ्लॉप फिल्म दे दो. की टेंशन नहीं है जी. जितनी फ्लॉप देंगे उतनी फिल्मे मिलेंगे. सच कहूं तो अर्जुन कपूर और जान्हवी कपूर दोनों में रेस लगी हैं की कौन कितनी फ्लॉप फिल्मे दे सकता हैं.

अर्जुन कपूर को लगता हैं की उनकी संदीप और पिंकी फरार ब्लॉकबस्टर हैं. जबकि इस फिल्म को बहुत ही गंदी रेटिंग दी थीं फिल्म क्रिटिक ने. इस पर अर्जुन कपूर का कहना हैं की महामारी ने “मुझे नए फैन बेस से जोड़ा, क्योंकि फिल्में ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर चली गईं। मुझे खुशी है कि उन्हें मेरी फिल्में पसंद आईं। ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के दर्शक ज्यादा समझदार होते हैं और यदि उन्हें मेरी फिल्में पसंद आ रही हैं, इसका मतलब यह है कि मैं सही स्क्रिप्ट चुन रहा हूं। मैं इस नए दर्शक वर्ग से संपर्क करना चाहता हूं क्योंकि इससे मुझे इस बात का अनुमान मिलता है कि भारत के लोग क्या देखना चाहता हैं और इससे मुझे बेहतर फिल्मों का चयन करने में मदद मिलेगी।”

इसका मतलब ये हैं की जो दर्शक सिनेमाघर जाते थे वो लोग बेवक़ूफ़ हैं. अब इन्हे कौन समझाए दर्शक तो वही रहते हैं जो चाहे सिनेमाघर जानेवाले हो या OTT पर देखनेवाले.अर्जुन कपूर ने आगे कहा,” ‘संदीप और पिंकी फरार’ मेरे लिए सफलता की एक बड़ी कहानी है और इससे मुझे एक बड़ी बात सीखने को मिली है कि दर्शक केवल अच्छा कंटेंट देखना चाहते हैं। फिल्म ‘सरदार का ग्रैंडसन’ को भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काफी दर्शक मिले। मुझे खुशी है कि डिजिटल दुनिया में मैं दर्शकों का मनोरंजन कर रहा हूं।

हां ये बात तो सच हैं की तुम मनोरंजन तो करते तो दूसरे एक्टर्स की फिल्म अगर कॉमेडी हैं तो लोग हँसते हैं. इमोशनल हैं तो रोते हैं. लेकिन तुम्हारी फिल्मो में सब उलटा होता हैं. हर सीन में एक ही तरह का एक्सप्रेशन देखने के बाद दर्शक सिनेमाघर की सीट फाड़ देते हैं. दीवारों पर सर पटकते हैं की इस इंसान की फिल्म देखने क्यों आया. जितने पैसे खर्च कर दिए इतने में तो तीन महीने का रीचार्ज हो जाता.

अर्जुन का ये भी कहना हैं की मैं “करियर के रोमांचक चरण में हूं.” मुझे तो यही नहीं समझ आ रहा की इस बन्दे की सारी फिल्मे फ्लॉप हैं. फिर करियर के रोमाचंक चरण में कैसे हो सकता हैं. शायद फ्लॉप फिल्मो की लिस्ट में थोड़ी कम फ्लॉप होनेवाली फिल्मो से खुश है ये भाई. ठीक वैसे ही जैसे ऊंट जब तक पहाड़ के नीचे नहीं आता उसे अपनी हाइट का अंदाज़ा नहीं लगता.

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